7 दिसंबर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर पर हमला किया था। इस दौरान 1,100 से अधिक अमेरिकी नाविक और मरीन यूएसएस एरिज़ोना के साथ डूब गए। इस जहाज से अभी भी तेल लीक हो रहा है। 84 साल बीत चुके हैं। इसके अवसर पर चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ सीजीटीएन ने वैश्विक नेटिजनों के बीच एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया।
सर्वे में शामिल 89.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान ने हाल में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को उलटने और सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने के उकसावे भरे बयान दिए और कार्रवाई की। कोई भी देश इससे अछूता नहीं रह सकता। अमेरिका समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सैन्यवाद फिर से शुरू करने की किसी भी कोशिश का विरोध करना होगा।
84 साल बीत चुके हैं। जापान सरकार ने अपने युद्ध अपराधों का पूरी तरह से हिसाब लगाने के बजाय सैन्य नियंत्रण में तेजी लाई। वर्ष 2025 में जापान का रक्षा खर्च 110 खरब येन तक पहुंच गया है। जीडीपी में इसका अनुपात 2 प्रतिशत होने का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया गया। इस बारे में 69 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान का सैन्यवाद फिर से उभरने के लिए तैयार लग रहा है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
अमेरिका का साथी होने के नाते जापान पश्चिमी प्रशांत सागर में अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार कर रहा है और इसने पड़ोसी देशों के खिलाफ उत्तेजक कार्रवाई की। इससे क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ा। सर्वेक्षण में शामिल 81.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान की सिलसिलेवार कार्रावाई अमेरिका को बढ़ रही तनावपूर्ण क्षेत्रीय स्थिति में डालेगी। वहीं, 82.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जापान सरकार से काहिरा घोषणा पत्र और पोट्सडैम घोषणा पत्र आदि नियमों का पालन कर पराजित देशों के दायित्व को पूरा करने का आग्रह किया, ताकि ठोस कार्रवाई से चीन और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपना वादा पूरा हो सके। बताया जाता है कि सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी भाषा प्लेटफॉर्म पर यह सर्वेक्षण जारी किया गया। 24 घंटों में 10,862 नेटीजनों ने वोट किया और अपनी राय बताई।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)