अमेरिकी राजनेता हेनरी किसिंजर ने एक बार अमेरिका-यूरोप सम्बंधों को “समस्याग्रस्त साझेदारी” बताया था, और यह सम्बंध वर्तमान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विभाजन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। इस वर्ष की “म्यूनिख सुरक्षा रिपोर्ट” में अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का “सबसे बड़ा विध्वंसक” बताया गया है, जिससे कभी सौहार्दपूर्ण रहे “पार-अटलांटिक पारिवारिक मिलन” के सम्बंध अब विशेष रूप से ठंडे और कुछ हद तक असहज भी हो गए हैं।
चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के अधीन चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (CGTN) द्वारा जारी एक वैश्विक ऑनलाइन सर्वेक्षण के अनुसार, 81.4% उत्तरदाताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि सुरक्षा, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तथा साझा मूल्यों की मान्यता के मामले में अमेरिका-यूरोप सम्बंध डगमगा गए हैं। यूरोपीय संघ को टैरिफ की धमकी देने और उसे सैन्य खर्च में भारी वृद्धि करने के लिए मजबूर करने से लेकर यूक्रेन मुद्दे पर यूरोपीय देशों को वार्ता की मेज़ से दरकिनार करने और यहां तक कि ग्रीनलैंड को ज़बरन हासिल करने के प्रयास तक, अमेरिकी विदेश नीति में आए बदलावों ने उसके यूरोपीय सहयोगियों के विश्वास को बार-बार ठेस पहुंचाई है।
इस प्रकार, अमेरिका यूरोप के सुरक्षा गारंटर से बदलकर उसके राजनीतिक तंत्र का विनाशक और उसके राष्ट्रीय हितों का शोषक बन गया है। इस संदर्भ में, 88.4% उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिकी कार्रवाइयों ने यूरोपीय देशों के हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, यूरोप की अमेरिका पर दीर्घकालिक सुरक्षा निर्भरता को अल्पकाल में बदलना मुश्किल है। यूरोपीय देशों की एक एकीकृत राजनयिक आवाज बनाने में लगातार असमर्थता के साथ, यूरोप के “स्वयं को बचाने” की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं। 86.6% उत्तरदाताओं का तर्क है कि यूरोप में अमेरिकी एकतरफा दादागिरी का सामना करने के लिए पर्याप्त रणनीतिक स्वायत्तता और आंतरिक एकजुटता का अभाव है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका “खुले तौर पर यूरोप विरोधी” है और यूरोपीय संघ को “विघटित” करने की कोशिश कर रहा है, और यूरोप अमेरिका को रियायतें देना जारी नहीं रख सकता। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने यूरोपीय देशों से ट्रांसअटलांटिक सम्बंधों की वर्तमान स्थिति को स्वीकार करने का आग्रह किया और कहा कि अमेरिका-यूरोप सम्बंधों के “गौरवशाली अतीत” के लिए तरसना “वास्तविकता को बदलने के लिए व्यर्थ है”। सर्वेक्षण में, 82.1% उत्तरदाताओं का मानना है कि यूरोप अमेरिका का “द्वितीयक भागीदार” नहीं है, और अमेरिका-यूरोप सम्बंधों को समानता, स्वायत्तता और उत्तरदायित्व के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। वहीं, 84.1% उत्तरदाताओं ने गंभीर वैश्विक शासन व्यवस्था की कमियों और अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित प्रणाली के लिए लगातार चुनौतियों के मद्देनजर यूरोप से अधिक रचनात्मक और स्वतंत्र भूमिका निभाने का आह्वान किया।
“म्यूनिख सुरक्षा सूचकांक” दर्शाता है कि लगभग सभी जी-7 सदस्यों सहित कई देशों का मानना है कि अमेरिका द्वारा उत्पन्न वैश्विक जोखिम पिछले वर्ष की तुलना में अधिक गंभीर हो गए हैं। सर्वेक्षण में, 89.2% उत्तरदाता सर्वसम्मति से सहमत हैं कि अमेरिका द्वारा उत्पन्न वैश्विक जोखिम और बढ़ गए हैं, और युद्धोत्तर सुरक्षा व्यवस्था उसकी एकतरफा दादागिरी से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। 87.1% उत्तरदाताओं का मानना है कि यदि विश्व अमेरिकी नेतृत्व पर निर्भर शासन प्रणाली को जारी रखता है, तो इससे वैश्विक विकास संकट और भी गहरा जाएगा। इसके अतिरिक्त, 92.7% उत्तरदाताओं ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे संयुक्त रूप से अधिक स्वतंत्र शासन प्रणाली की खोज करें, न कि निर्भरता वाली, और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा शासन प्रणाली में प्रणालीगत सुधारों को बढ़ावा दें। बता दें कि यह सर्वेक्षण CGTN के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफार्मों पर प्रकाशित किया गया था, जिसमें कुल 8,268 प्रतिभागियों ने 24 घंटों के भीतर अपने विचार व्यक्त किए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)