Chin Wanchun : चिन वानछुन 30 वर्षों की सैन्य सेवा के साथ सेवानिवृत्त सैनिक हैं। लगभग 20 वर्षों की कड़ी मेहनत के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि उनके गृहनगर के नायकों के नाम इतिहास में दर्ज हों और उनकी कहानियाँ आगे बढ़ें।
चिन वानछुन का जन्म साल 1948 में पूर्वोत्तर चीन में चीलिन प्रांत के यानप्येन कोरियाई स्वायत्त प्रिफेक्चर के एक साधारण परिवार में हुआ। 20 वर्ष की आयु में, वह चीनी जन मुक्ति सेना में एक सैनिक बने, जहां उन्होंने हान जाति, मंगोल जाति और ह्वेई जाति आदि जातियों के साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। जीवन में वे एक-दूसरे की मदद करते थे, सुख-दुख बांटते थे और भाई-बहनों जैसे करीब थे। 30 वर्षों के सैन्य जीवन में उन्होंने देश भर के विभिन्न स्थलों से आए विभिन्न जातियों के सैनिकों के साथ गहरा सम्बंध और गहरी मित्रता स्थापित की, जो जिन्दगी में अविस्मरणीय है।
चिन वानछुन का नायकों और शहीदों के कार्यों को व्यवस्थित करने का मिशन साल 2006 में एक अविस्मरणीय अनुभव से उत्पन्न हुआ। उस समय, जब वह ग्रामीण इलाकों में शोध कर रहे थे, तो उनकी मुलाकात एक सफेद बालों वाले बूढ़े व्यक्ति से हुई, जो एक शहीद की कब्र के सामने निर्माण टीम के साथ बहस कर रहा था। पता चला कि निर्माण टीम पास में ही रेत और मिट्टी खोद रही थी, जिससे शहीदों की समाधि की सुरक्षा को खतरा हो रहा था। स्थिति के बारे में जानने के बाद, चिन वानछुन तुरंत मध्यस्थता के लिए आगे आये। उनके प्रयासों के कारण निर्माण टीम शहीदों के कब्रिस्तान को बायपास करने पर सहमत हो गई और शहीदों के विश्राम स्थल को संरक्षित कर दिया गया। इस मकबरे में दो शहीदों को दफनाया गया है जो 1930 और 1940 के दशक में चीन पर जापानी सैन्यवादी आक्रमण के खिलाफ लड़ाई में वीरतापूर्वक मारे गए थे। लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते।
इस घटना ने चिन वानछुन को बहुत प्रभावित किया। शहीदों का जीर्ण-शीर्ण स्मारक, लंबे समय से भुलाए गए वीरतापूर्ण कार्य, तथा 70 वर्ष से अधिक उम्र का वह वृद्ध व्यक्ति जो अभी भी कब्र की रखवाली कर रहा है, विशेष रूप से चौंकाने वाले हैं। चिन वानछुन यह सोचे बिना नहीं रह सके:राष्ट्रीय मुक्ति के लिए कितने नायकों ने अपने प्राणों की आहुति दी? क्या उनके नाम भी इतिहास की गहराइयों में खो गए हैं, किसी को पता नहीं?
उन्होंने सोचा कि उनकी तरह मैं भी इसी धरती से निकला एक सैनिक हूं। हम शहीदों को भुलाने नहीं दे सकते! चिन वानछुन ने अपने मन में प्रतिज्ञा की: भले ही उन्हें पृथ्वी के छोर तक यात्रा करनी पड़े, वह शहीदों के नाम एक-एक करके खोजेंगे और उन्हें इतिहास में दर्ज करेंगे।
साल 2008 में सेवानिवृत्त होने के बाद, चिन वानछुन ने अपनी सारी ऊर्जा शहीदों के बारे में जानकारी एकत्र करने में लगा दी। जगह-जगह बिखरे शहीदों के कार्यों को खोजने के लिए, वह अभिलेखागार में गए और मूल अभिलेखों को देखा। उन्होंने 1,000 से अधिक शहीदों के नाम और कार्यों को संकलित किया।
20 से अधिक सालों के प्रयास के बाद, आज तक चिन वानछुन ने देश भर के 20 से अधिक प्रांतों और शहरों की यात्रा की है, जिनकी कुल दूरी 80,000 किलोमीटर से अधिक है। उन्होंने 10 लाख से अधिक शब्द विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सामग्री तथा 5,000 से अधिक ऐतिहासिक चित्र एकत्रित और व्यवस्थित किए हैं, और लगभग 600,000 शब्दों की “आनथू शहीदों के रक्त-रंजित पदचिह्न” और 12 लाख शब्दों की “छांगपाई की वीर आत्माएं” दोनों कृतियां लिखी हैं। (यहां आनथू और छांगपाई दोनों चीलिन प्रांत की काउंटियां हैं)
चिन वानछुन ने बहुत समय से भूली हुई स्मृतियों को पुनः खोजा, तथा लुप्त होने के कगार पर पहुंची बहुमूल्य ऐतिहासिक सामग्रियों को पुनः प्रकाश में लाने का अवसर दिया। उनकी सावधानीपूर्वक खोज ने न केवल शहीदों के रिश्तेदारों को उनकी खोई हुई यादें वापस पाने में मदद की, बल्कि नए युग में वीरता की भावना को भी आगे बढ़ाने में मदद की।
चिन वानछुन के द्वारा स्थापित आनथू काउंटी देशभक्ति शिक्षा केंद्र ने लगभग 100,000 आगंतुकों का स्वागत किया है और समाज में अच्छी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। नायकों और शहीदों के कार्यों में उनके उत्कृष्ट योगदान के कारण, उनको “जातीय एकता और प्रगति के लिए राष्ट्रीय आदर्श व्यक्ति” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
(श्याओ थांग)

