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चीन और भारत सहयोग और पारस्परिक विकास का एक मॉडल बना सकते हैं : प्रोफेसर राजीव रंजन

July 17, 2024

चीन और भारत सहयोग और पारस्परिक विकास का एक मॉडल बना सकते हैं : प्रोफेसर राजीव रंजन

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग के एक प्रतिष्ठित एसोसिएट प्रोफेसर राजीव रंजन ने चीन की प्रमुख मीडिया संगठन, चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को दिए एक इंटरव्यू में भारत-चीन संबंधों को आकार देने वाले गहन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी शिक्षा के सहस्राब्दियों से बने ये प्राचीन संबंध दोनों सभ्यताओं की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

प्रोफेसर राजीव रंजन ने कहा, “इस गतिशील आदान-प्रदान को रोकना सभ्यता को दबाने के समान होगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच ज्ञान का निरंतर प्रवाह उनके विकास और नवाचार के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत और चीन के बीच चित्रित ऐतिहासिक तस्वीर केवल अतीत का अवशेष नहीं है, बल्कि एक जीवंत, सांस लेने वाली इकाई है जो वर्तमान को प्रभावित करती रहती है।

राजीव रंजन ने दोनों देशों के आर्थिक इतिहास में महत्वपूर्ण क्षणों का उल्लेख किया। जहां 1978 में चीनी नेता तंग श्याओफिंग द्वारा शुरू की गई चीन की सुधार और आर्थिक खुलेपन की नीति ने एक महत्वपूर्ण मोड़ दिखाया, वहीं 1991 में भारत का आर्थिक उदारीकरण हुआ। इन मील के पत्थरों ने दोनों देशों को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाया और ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) के नेताओं के रूप में उनकी जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर राजीव रंजन के अनुसार, भारत और चीन को अपने प्रभाव क्षेत्र में छोटे व विकासशील देशों को सक्रिय रूप से शामिल करना चाहिए ताकि वे वास्तव में उन्हें साथ लेकर चल सकें। 

राजीव रंजन ने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन और एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग करने से वैश्विक राजनीति को नया रूप देने की क्षमता है।” वह एक ऐसी साझेदारी की परिकल्पना करते हैं, जिसमें भारत और चीन एशिया और दुनिया को परिवर्तनकारी लाभ पहुंचाने के लिए मिलकर काम करें, जिससे सहयोग और साझा प्रगति का एक शक्तिशाली उदाहरण स्थापित हो। 

राष्ट्रों और व्यक्तियों के रिश्तों के बीच समानताएं बताते हुए, राजीव रंजन ने संचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि संवाद की कमी गलतफहमी और संघर्ष को बढ़ावा देती है। रणनीतिक तनावों के बावजूद, विशेष रूप से चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच, आपसी समझ के लिए चल रहे उच्च-स्तरीय संवाद महत्वपूर्ण बने हुए हैं। 

उन्होंने कहा, “बातचीत और अकादमिक आदान-प्रदान के खुले चैनल बनाए रखना ज़रूरी है, क्योंकि इससे गुमराह करने वाली नीतियों को रोकने और मज़बूत द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।”

राजीव रंजन की अंतर्दृष्टि बौद्ध दर्शन में निहित आपसी समझ के सिद्धांतों से मेल खाती है, जहाँ खुला संचार अक्सर स्वाभाविक रूप से संघर्षों को हल करता है। वह भारत-चीन संबंधों को मज़बूत करने के लिए निरंतर संवाद की वकालत करते हैं, एक ऐसी साझेदारी को बढ़ावा देते हैं जो दोनों देशों को फ़ायदा पहुँचाए और दुनिया के लिए एक मिसाल कायम करे।

राजीव रंजन का भारत-चीन संबंधों के लिए दृष्टिकोण कायाकल्प और सहयोग है। उनका मानना ​​है कि अपने साझा इतिहास को अपनाकर और खुले संचार को बढ़ावा देकर, भारत और चीन एक ऐसा भविष्य बना सकते हैं जो अपने लोगों को फ़ायदा पहुँचाए और पूरी दुनिया के लिए सहयोग और आपसी विकास का एक शक्तिशाली मॉडल पेश करे।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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