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चीन और भारत बनेंगे अगले पांच सालों में वैश्विक आर्थिक विकास के ‘मुख्य इंजन’

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की हालिया रिपोर्ट और प्रतिष्ठित वैश्विक स्रोतों के गहन विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि अगले पांच वर्षों, यानी 2025 से 2030 के बीच, वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति काफी हद तक चीन और भारत के इर्द-गिर्द केंद्रित रहेगी। ये दोनों एशियाई दिग्गज विश्व आर्थिक वृद्धि के ‘प्रमुख इंजन’ के रूप में उभरने के लिए तैयार हैं।

आईएमएफ के अप्रैल 2025 के विश्व आर्थिक दृष्टिकोण के अनुसार, भारत 2025 में 6.2% की अनुमानित विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होगा। वहीं, चीन की विकास दर 4% रहने का अनुमान है, जो वैश्विक मानकों से काफी ऊपर है। मौजूदा जीडीपी के मामले में, चीन (19.23 खरब डॉलर) दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जबकि भारत (4.19 खरब डॉलर) चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

हालांकि आईएमएफ की आधिकारिक रिपोर्ट में “शीर्ष इंजन” जैसा कोई विशिष्ट शब्द सीधे तौर पर उल्लेखित नहीं है। ब्लूमबर्ग और TV9हिंदी जैसे प्रमुख वैश्विक स्रोतों ने स्पष्ट किया है कि आईएमएफ इन दोनों देशों को वैश्विक विकास का आधार मानता है। 

इस आशय के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। पहला, चीन और भारत दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं, जिनमें युवा कामगारों की एक बड़ी संख्या उत्पादन और खपत को बढ़ावा दे रही है। दूसरा, दोनों देशों में तकनीकी क्रांति और डिजिटल बुनियादी ढांचे में तेजी से नवाचार हो रहा है, जो आर्थिक विस्तार को गति दे रहा है। अंत में, व्यापार युद्धों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव के मौजूदा दौर में, दुनिया निर्यात-उत्पादन के लिए इन दोनों देशों पर काफी हद तक निर्भर हो गई है।

भविष्य की बात करें तो, 2030 तक इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अनुमान है कि भारत 2030 तक जर्मनी और जापान को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। चीन के 2026 तक 20 खरब डॉलर जीडीपी का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है, जबकि भारत 2029 तक 6 खरब डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि 2025-2030 के बीच वैश्विक जीडीपी वृद्धि में इन दोनों देशों का योगदान सबसे बड़ा होगा।

हालांकि, इस उज्ज्वल आर्थिक परिदृश्य में कुछ चुनौतियां भी हैं। चीन में जनसंख्या घटने का संभावित खतरा और भारत में रोजगार सृजन व असमानता से जुड़ी चिंताएं प्रमुख हैं। फिर भी, इन चुनौतियों का मुकाबला सुधारवादी नीतियों और निरंतर निवेश के माध्यम से किया जा सकता है।

आईएमएफ के आंकड़े और विश्लेषण एक स्पष्ट संकेत देते हैं: 2025-2030 का दशक एशिया के नाम होगा, जिसमें चीन और भारत वैश्विक आर्थिक पटल पर अपनी अग्रणी भूमिका स्थापित करेंगे। इन दोनों देशों की तेज रफ्तार विकास यात्रा न केवल अपने नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत को भी सँवारेगी। यह समय भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करता है, जहाँ सही नीतियों और जनभागीदारी से यह देश वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में आ सकता है।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप (CGTN हिन्दी), बीजिंग)

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