इंटरनेशनल डेस्क : नदियां हर देश और क्षेत्र की सभ्यता, संस्कृति से गहराई से जुड़ी होती हैं। नदियों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए इनका महत्व बहुत ज्यादा होता है। क्योंकि लोग अपने आसपास की चीजों और वातावरण से बहुत लगाव रखते हैं। प्राचीन काल से ऐसा देखने में आया है कि लोगों ने अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए काफी कुछ किया। चीन की बात करें तो चीन में यांगत्जी नदी और पीली नदी जैसी नदियां मौजूद हैं। जो चीनी नागरिकों के जीवन से संबद्ध रही हैं। पीली नदी को चीन में मातृ नदी का दर्जा हासिल है। हजारों किमी. लंबी ये नदियां नागरिकों के जीवन से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं। चीन सरकार ने भी नदियों और झीलों को साफ-सुथरा करने और संरक्षित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं।
गौरतलब है कि चीन में यांग्त्जी नदी और पीली नदी की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा को लेकर समय-समय पर कार्यक्रम चलते रहते हैं। इन नदियों के अन्य देशों की नदियों और सभ्यताओं से संबंध को लेकर भी बात होती रहती है। क्योंकि चीन एक प्राचीन देश है, ऐसे में चीन के सांस्कृतिक व व्यापारिक रिश्ते अन्य प्राचीन देशों से लंबे समय से रहे हैं। बता दें कि चीन की केंद्र सरकार और जल संसाधन मंत्रालय द्वारा एक योजना चलायी गयी है। जिसमें साल 2027 की अवधि तक नदियों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के अलावा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता में सुधार किया जाना है।
ध्यान रहे कि चीन में नदियों और झीलों को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया गया है। जिन पर लगातार फोकस करते हुए जलीय पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस बीच दुनिया की प्रमुख नदी सभ्यताओं के विशेषज्ञ हाल में चीन के छोंगछिंग में संस्कृतियों के संरक्षण और संवर्धन पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए। जिसमें नदियों और समुद्रों को जोड़ना, सभ्यताओं के ज्ञान को साझा करना विषय पर आयोजित यांग्त्ज़ी नदी सभ्यता मंच का मुख्य उद्देश्य यांग्त्ज़ी नदी की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और दुनिया की प्रमुख नदी सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान को गहरा करना था।
इस दौरान एक विदेशी विशेषज्ञ ने चीन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है कि यांग्त्ज़ी नदी सभ्यता पर काम कर रहे विशेषज्ञ आधुनिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए अतीत से सीखने की कोशिश कर रहे हैं।
यांग्त्ज़ी नदी छिंगहाई-तिब्बत पठार के ग्लेशियरों से 6,300 से अधिक किमी. की लंबी दूरी तय कर छोंगछिंग, वुहान और नानचिंग से होकर शांगहाई में पूर्वी चीन सागर तक पहुंचती है। जाहिर है यह नदी हजारों वर्षों से अपने किनारे वाले लोगों को पाकृतिक संसाधनों से भरपूर भोजन प्रदान करती रही है। इसके साथ ही 40 करोड़ से अधिक लोगों को इससे पीने का पानी मिलता है।
जाहिर है कि चीन एक बड़ी जनसंख्या और भौगोलिक लिहाज से विशाल देश होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाने में लगा है। क्योंकि चीन में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। जिनका सही ढंग से इस्तेमाल होना आवश्यक है। कहा जा सकता है कि नदियों को सुंदर बनाने के लिए एक स्थिर स्रोत, अच्छा जल प्रवाह और पर्याप्त पारिस्थितिक जल इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए बहते जल वाली नदियों का लक्ष्य लगातार प्राप्त करना होगा। चीन इस संबंध में अच्छा काम कर रहा है। इसके साथ ही चीन ने नदियों के संरक्षण और प्रबंधन, नदी पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार और जल-संरक्षण करने वाले समाज के विकास को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

