हाल ही में आयोजित चीन के केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन ने वर्ष 2026 के लिए आर्थिक कार्यों की दिशा स्पष्ट कर दी है। सम्मेलन में यह निर्धारित किया गया कि आने वाले वर्ष में चीन “स्थिरता बनाए रखते हुए प्रगति की तलाश” को अपना बुनियादी मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएगा, साथ ही आर्थिक गुणवत्ता और दक्षता में सुधार को प्रमुख लक्ष्य के रूप में आगे बढ़ाएगा। इसमें एक मजबूत घरेलू बाजार का निर्माण, नई प्रेरक शक्तियों के विकास और विस्तार में तेजी लाना तथा पारस्परिक लाभ और सहयोग के नए क्षेत्रों को प्रोत्साहित करना 2026 के प्रमुख आर्थिक कार्यों के रूप में तय किया गया है।
पहला, चीन अपनी विशाल जनसंख्या और मजबूत बाजार क्षमता के बल पर घरेलू मांग के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगा। 1.4 अरब की आबादी वाले चीन का कुल आर्थिक उत्पादन और उपभोक्ता बाजार दोनों ही विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। यह न केवल दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन खुदरा बाजार है बल्कि दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश भी है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि बीते चार वर्षों में चीन की आर्थिक वृद्धि में घरेलू मांग का औसत योगदान 86.4% रहा है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति में जब कुछ देश व्यापारिक प्रतिबंधों और शुल्कों के माध्यम से अन्य देशों के विकास को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे समय में चीन की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति और आत्मनिर्भरता की नीति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
दूसरा, 2026 में चीन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को नई आर्थिक प्रेरक शक्ति बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा। देश पेइचिंग (पेइचिंग-थ्येनचिन-हपेइ क्षेत्र), शांगहाई (यांग्त्ज़ी नदी डेल्टा क्षेत्र) और क्वांगतोंग-हांगकांग-मकाऊ ग्रेटर बे एरिया में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित करेगा। खुलेपन की नीति को और गहरा करते हुए, चीन संस्थागत सुधारों के माध्यम से सेवा क्षेत्र के लिए उच्च स्तरीय खुलापन सुनिश्चित करेगा, मुक्त व्यापार क्षेत्रों की योजना और दायरे को सुदृढ़ बनाएगा, तथा हाईनान मुक्त व्यापार बंदरगाह के निर्माण को ठोस रूप से आगे बढ़ाएगा। उल्लेखनीय है कि 18 दिसंबर से पूरे द्वीप पर विशेष सीमा शुल्क नियंत्रण व्यवस्था लागू होने के बाद, हाईनान दुनिया भर की उन्नत तकनीकों और विदेशी निवेशों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा। यह विदेशी कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए चीनी बाजार में प्रवेश का एक महत्त्वपूर्ण प्लेटफ़ॉर्म भी बनेगा।
तीसरा, 2026 और उसके बाद चीन अपने विकास मॉडल में लोगों की आजीविका, शहरी-ग्रामीण एकीकरण, क्षेत्रीय समन्वय और हरित परिवर्तन को प्रमुखता देगा। आने वाले वर्षों की मध्यम और दीर्घकालिक योजनाओं में “काउंटी-स्तरीय अर्थव्यवस्थाओं” के विकास को एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में रखा गया है। यह क्षेत्र लगभग 74 करोड़ की आबादी का घर है, जो देश की कुल जनसंख्या का 50% से अधिक और आर्थिक उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा है। जैसे-जैसे इन क्षेत्रों में आय में वृद्धि होती जा रही है, वैसे-वैसे असीमित व्यावसायिक अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं।
2012 से 2024 के बीच चीन की औसत वार्षिक आर्थिक विकास दर वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी रही है। यह तथ्य न केवल चीन की अर्थव्यवस्था की स्थिरता और शक्ति को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में निरंतर निश्चितता और ऊर्जा का स्रोत बना हुआ है। बाहरी दुनिया चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर इसलिए भी आशावादी है, क्योंकि उसने लगातार चुनौतियों का सामना करते हुए अभूतपूर्व लचीलापन, नवाचार और जीवंतता प्रदर्शित की है। इसीलिए कहा जा सकता है कि चीन उम्मीदों पर खरा उतरता है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

