इंटरनेशनल डेस्क: संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू छ्वोंग ने 28 फ़रवरी को मध्य पूर्व की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की आपातकालीन खुली बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा एक ही दिन ईरान पर किए गए सैन्य हमलों से क्षेत्रीय हालात में अचानक गंभीर तनाव पैदा हो गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीन ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
फू छ्वोंग ने दोहराया कि चीन लगातार इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि सभी पक्ष संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या बल की धमकी का चीन निरंतर विरोध करता आया है और इसकी निंदा करता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि ईरान सहित सभी क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
फू छ्वोंग ने संघर्ष में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया और कहा कि सशस्त्र संघर्ष की परिस्थितियों में भी नागरिकों की सुरक्षा की सीमा किसी भी हाल में पार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध बल प्रयोग अस्वीकार्य है। चीन ने सभी पक्षों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून सहित अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने दायित्वों का पूर्ण पालन करें, नागरिकों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करें और नागरिक ठिकानों तथा बुनियादी ढाँचे पर हमलों से बचें।
अपने संबोधन में फू छ्वोंग ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान का रास्ता सैन्य कार्रवाई नहीं है, क्योंकि इससे केवल वैमनस्य और टकराव बढ़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव व्यापक और दीर्घकालिक दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकता है, जो किसी भी पक्ष के हित में नहीं होगा।
उनके अनुसार, संवाद और बातचीत ही मतभेदों तथा संघर्षों को सुलझाने का एकमात्र व्यवहारिक और स्थायी मार्ग है। चीन ने स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए सभी सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने का आह्वान किया है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

