आज के दौर में तकनीक के साथ-साथ एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व काफी बढ़ गया है। तमाम देश इस बात को समझ रहे हैं और एआई को अपना रहे हैं। लेकिन अभी एआई आम लोगों के लिए एक नया प्लेटफार्म है, जिसके बारे में धीरे-धीरे जिज्ञासा बढ़ रही है। चीन ने एआई को बहुत तेजी से अपनाया है, चीन में एआई से जुड़े कई स्टार्ट अप स्थापित हो रहे हैं। कहना होगा कि चीन एक क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है। क्योंकि चीन में एआई और रोबोटिक्स का तेज विकास हो रहा है। इसके साथ ही सुरक्षा उद्योग को लेकर भी व्यापक संभावनाएं दिख रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में एआई और रोबोटिक्स का जिस गति से विकास हो रहा है, वह देखने लायक है। बताया जाता है कि चीन सुरक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भागीदार है। इसे देखते हुए चीनी शोधकर्ता सक्रिय रूप से एआई परिवर्तन को अपना रहे हैं और सुरक्षा सेवाओं के लिए एक एआई औद्योगिक क्लस्टर बनाने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही नवाचार, प्रतिभा संवर्धन और अनुप्रयोग-संचालित मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है।
इससे पता चलता है कि चीन नए और तकनीकी नवाचार को अपनाने में पीछे नहीं रहना चाहता है। चीन अब एआई आदि के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों को भी शामिल कर रहा है। क्योंकि चीन एआई और रोबोटिक्स के सेक्टर में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है, इसलिए देश भर में इस तकनीक को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए काम किया जा रहा है।
इसके साथ ही, विशेषज्ञ मानव-मशीन सहयोग और साझा नवाचार द्वारा चिह्नित डेटा-संचालित, क्रॉस-इंडस्ट्री इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी उद्यमों के साथ सहयोग को गहरा करने का आह्वान कर रहे हैं। वर्तमान में रोबोट का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों में किया जाने लगा है। मल्टी-मॉडल सेंसर और एआई एल्गोरिदम को एकीकृत करते हुए सुरक्षा रोबोट बुनियादी सुरक्षा कार्यों को संभालने में सक्षम हो रहे हैं।
कहा जा सकता है कि चीन एआई और रोबोटिक्स को प्राथमिकता दे रहा है। खासतौर पर एआई की बात करें तो इस बारे में चीन में साल 2017 से काम हो रहा है। चीन ने वर्ष 2017 में घोषणा करते हुए साल 2030 तक एआई के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए चीन में वर्ष 2027 तक 38 बिलियन डॉलर खर्च किए जाने की योजना है। कहा जा रहा है कि चीन में हर वर्ष इस क्षेत्र में 25 प्रतिशत का इजाफा होगा।
इससे स्पष्ट होता है कि चीन एआई और रोबोटिक्स के प्रति बहुत दिलचस्पी दिखा रहा है और इस क्षेत्र में काफी निवेश भी किया जा रहा है। जो भविष्य में चीन को एक बड़ी शक्ति के रूप में सामने ला सकता है।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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