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भारतीय मीडियाकर्मी: चीन ने जातीय संस्कृति की विरासत और विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं

28 जून की सुबह,“चाइना वॉक : आधुनिकीकरण की ओर- शीत्सांग की यात्रा(China Walk:Towards Modernization·Xizang Tour” कार्यक्रम के दौरान, भारत, बांग्लादेश, नेपाल, कंबोडिया, मंगोलिया और अन्य देशों के प्रमुख मीडिया के प्रतिनिधियों ने पोताला पैलेस का दौरा किया, जो चीन के शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के प्रचार विभाग और चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के एशिया-अफ्रीका भाषा कार्यक्रम केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है।

पोताला  पैलेस चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा के उत्तर-पश्चिम में मार्पोरी पर्वत (लाल पर्वत) पर स्थित है। यह महल-शैली की इमारत परिसर है, जिसे टुबो राजवंश के राजा सोंगत्सेन गम्पो ने मूल रूप से बनवाया था। 17वीं शताब्दी में पुनर्निर्माण के बाद, पोताला  पैलेस क्रमिक दलाई लामाओं का शीतकालीन निवास और शीत्सांग के राजनीतिक व धार्मिक एकीकरण का शासक केंद्र बना। पूरे पैलेस में एक विशिष्ट तिब्बती जाति शैली है, जो पहाड़ के सामने बना है और बहुत राजसी व भव्य है। पोताला पैलेस में अनगिनत खजाने हैं और यह एक कला महल है। वर्ष 1961 में, इसे चीन की राष्ट्रीय प्रमुख सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण स्थलों के पहले बैच में शामिल किया गया। वर्ष 1994 में, पोताला  पैलेस को विश्व सांस्कृतिक विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया गया।

पोताला पैलेस की यात्रा करने के बाद, भारतीय चैनल हिंदी ख़बर के प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने कहा कि ल्हासा में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है। अतीत में, वे चीन और पोताला  पैलेस के बारे में केवल मीडिया और इंटरनेट से ही जान पाते थे। अब उन्हें आखिरकार चीन आने और असली चीन को जानने का मौका मिला है, वे बहुत सम्मानित और उत्साहित महसूस करते हैं। पोताला पैलेस का दौरा करने के बाद, उन्हें लगा कि चीन जातीय संस्कृति की रक्षा, विरासत और संवर्धन व विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चीन ने जातीय सांस्कृतिक संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन उद्योग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए आम जीत की स्थिति हासिल की है। वे जातीय संस्कृति को विरासत में लेने और विकास करने में चीन की उल्लेखनीय उपलब्धियों से बहुत प्रभावित हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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