China-India Relations: “भारत और चीन – दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय ‘साझेदार‘ और खतरे के बजाय ‘अवसर‘ के रूप में देखना चाहिए,” यह भारत-चीन संबंधों पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा देश के 2026 “दो सत्रों” के मौके पर 8 मार्च को राजधानी पेइचिंग में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दिया गया मुख्य संदेश था।
उनका स्पष्ट संदेश इस बात का साफ़ इशारा है कि दो करीबी पड़ोसियों – भारत और चीन को आपसी रिश्तों पर असर डालने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों को बातचीत से सुलझाने के लिए एक-दूसरे का साथ देना चाहिए।
वांग यी ने चीन की शीर्ष विधायी संस्था 14वीं राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के चौथे सत्र के दौरान संवाददाता सम्मेलन में दुनिया को 2026 के लिए चीन की विदेश नीति के एजेंडे से अवगत कराया। यह प्रस्तुति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जब चीन वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशांत अंतरराष्ट्रीय स्थिति में चीन-अमेरिका संबंध, चीन-रूस संबंध, मध्य पूर्व के मामलों और इस साल होने वाली कुछ बड़ी घरेलू कूटनीतिक गतिविधियों जैसे एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के नेताओं की अनौपचारिक बैठक और दूसरे चीन-अरब देश शिखर सम्मेलन पर सवाल ज्यादा थे, लेकिन चीनी विदेश मंत्री ने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की अहमियत पर भी जोर दिया।
इसमें कोई दो राय नहीं कि चीन और भारत, दो करीबी पड़ोसी और दुनिया के सबसे बड़े उभरते बाजार और विकासशील देश, के बीच सहयोग की अनंत संभावनाएं हैं। दोनों देशों की मज़बूत दोस्ती उनके मूलभूत हितों को बढ़ावा देगी और इस सदी को “एशियाई शताब्दी” बनाने में भी मदद करेगी।
बेशक, वांग यी के शब्दों में एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच संबंधों को लेकर एक सकारात्मक संदेश है। वांग यी ने कहा, “चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ही वैश्विक दक्षिण के हिस्से हैं, जिनके बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और व्यापक साझा हित हैं। चीन-भारत के बीच आपसी विश्वास और सहयोग साझा विकास के लिए बहुत फायदेमंद है, जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान में बाधक हैं।”
उनके बयान से पता चलता है कि दोनों देशों को एक-दूसरे से लड़ना नहीं चाहिए, बल्कि मिलकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे के प्रति अपने दृष्टिकोण में सुधार करना चाहिए। यह सच है कि चीन और भारत की बढ़ती ताकत और आर्थिक प्रभाव के साथ, उनके रिश्ते 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक हो सकते हैं।
चीनी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शांगहाई सहयोग संगठन के 25वें शिखर सम्मेलन के लिए उत्तरी तटीय शहर थ्येनचिन (Tianjin) में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर चीन यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा, “2024 में कज़ान में हुई उनकी बैठक से मिली नई शुरुआत को आगे बढ़ाते हुए, थ्येनचिन शिखर सम्मेलन ने चीन-भारत संबंधों में और सुधार किया।”
थ्येनचिन में अपनी ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी इस बात पर सहमत हुए कि आज की वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों का विकास स्थिरता की ताकत है, और दोनों देशों को अपने मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।
महत्वपूर्ण थ्येनचिन बैठक के बाद से, भारत-चीन रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आया है और दोनों देश आपसी रिश्तों को मज़बूत करने पर फिर से जोर दे रहे हैं। नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के अनुसार, 2025 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% से अधिक की वृद्धि है।
वांग यी का कहना है कि भारत और चीन को मतभेदों को टकराव की बजाय सहयोग और संवाद के जरिए हल करना चाहिए, ताकि दोनों देश मजबूत और खुशहाल बन सकें। तेजी से बदलते विश्व में, चीन और भारत को अच्छे पड़ोसी और साझीदार बनकर साथ आगे बढ़ना चाहिए।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के साथ, चीन-भारत सहयोग के नए दरवाजे खुल रहे हैं। भारत, चीन के “उच्च-गुणवत्तापूर्ण विकास और उच्च-स्तरीय खुलापन” का लाभ उठाकर आपसी विकास के लिए सहयोग और साझेदारी को प्राथमिकता दे सकता है, जिसमें बहुत ज़्यादा क्षमता है जिसका अनावरण होना बाकी है।
असल में, दोनों देश अब राष्ट्रीय विकास और पुनरुत्थान के एक अहम मोड़ पर हैं। यह कहा जा सकता है कि विकास दोनों देशों के लिए एक साझा प्राथमिकता है और सहमति का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। 2026 में, आशा है कि दोनों देश भारत-चीन संबंधों को मजबूत करेंगे, एक-दूसरे के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेंगे, और एक समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ेंगे, जिससे दोनों देशों के लोगों के दिल करीब आएंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- रविशंकर बसु)

