फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा 22 दिसंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति का लाभ उठाते हुए वैश्विक स्वच्छ ईंधन प्रतिस्पर्धा में बढ़त बना रहा है। यह रुझान विश्व स्तर पर उभरती हरित क्रांति के एक नए चरण की शुरुआत को इंगित करता है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यद्यपि स्वच्छ ईंधन प्रौद्योगिकियाँ अभी विकास के आरंभिक चरण में हैं, फिर भी चीन अपनी प्रचुर और कम लागत वाली नवीकरणीय ऊर्जा तथा जैव ईंधन संसाधनों पर निर्भर करते हुए अपने विशाल औद्योगिक क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। इस दिशा में चीनी कंपनियाँ वैश्विक स्वच्छ प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला की आधारशिला मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं।
उद्योग जगत की आम सहमति है कि जैसे-जैसे बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता में विस्तार होगा, स्वच्छ ईंधन की लागत धीरे-धीरे घटेगी, ठीक वैसे ही जैसे पूर्व में सौर पैनलों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। उपलब्ध आँकड़ों से पता चलता है कि कई चीनी कंपनियाँ, जिनमें अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा निर्माता भी शामिल हैं, अमोनिया, मेथनॉल और विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों में अपने स्वच्छ ईंधन और रासायनिक व्यवसायों का विस्तार कर रही हैं।
रिपोर्ट में संयुक्त अरब अमीरात सरकार और ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज़ द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित एक गैर-लाभकारी संगठन के कार्यकारी निदेशक फ़ॉस्टीन डेलासेल के हवाले से कहा गया है, “चीन निस्संदेह अगली पीढ़ी की स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उसके पास न केवल परियोजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, बल्कि और भी महत्वपूर्ण यह है कि उन परियोजनाओं का प्रतिशत निरंतर बढ़ रहा है जो अंतिम निवेश निर्णय की अवस्था तक पहुँच रही हैं।” फाइनेंशियल टाइम्स ने यह भी रेखांकित किया है कि चीनी कंपनियाँ घरेलू बाज़ार में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वच्छ ईंधन उद्योग का विस्तार करने और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देने के अवसर तलाश रही हैं।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)
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