Last Updated: October 1, 2026

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चीन ने लाखों-करोड़ों लोगों को गरीबी से कैसे बाहर निकाला

June 14, 2026

चीन ने लाखों-करोड़ों लोगों को गरीबी से कैसे बाहर निकाला

इंटरनेशनल डेस्क: ये बात है चीन की उस अद्भुत यात्रा की जिसमें लाखों-करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। चीन ने दुनिया को दिखाया कि अगर सही इरादा और पूरे देश की एकजुटता हो तो असंभव भी संभव हो जाता है। यह लेख चीन की गरीबी उन्मूलन मुहिम से शुरू होकर चीनी शैली के आधुनिकीकरण के महत्व तक जाता है।

चीन की गरीबी उन्मूलन मुहिम:77 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे थे

चीन ने 2021 में पूर्ण रूप से निरपेक्ष गरीबी को समाप्त करने की घोषणा की। यह कोई छोटी बात नहीं है। 1978 में जब सुधार शुरू हुए तब चीन में करीब 77 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे थे. मात्र कुछ दशकों में चीन ने इतने सारे लोगों को गरीबी से ऊपर उठाया कि दुनिया भर में इसकी तारीफ हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 तक चीन के सभी गांवों और काउंटियों को गरीबी से मुक्त घोषित कर दिया गया।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की औसत आय में भारी बढ़ोतरी हुई. यह उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के लिए भी एक बड़ा योगदान है। चीन ने समय से पहले ही गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

हर गरीब की समस्‍या समझी गई

चीन की सफलता की सबसे बड़ी वजह उसकी संस्थागत व्यवस्था है। सरकार बड़े-बड़े कामों पर पूरा ध्यान और संसाधन केंद्रित कर सकती है। इसे concentrate resources to accomplish major undertakings कहते हैं। पूरी पार्टी, पूरी सरकार और पूरा समाज एक साथ जुड़ जाता है। गरीबी उन्मूलन के लिए विशेष टीमें बनाई गईं। हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई-केंद्र से लेकर गांव तक।

अगर कोई गांव पिछड़ रहा था तो ऊपर से मदद भेजी जाती। सड़कें, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी सब कुछ व्यवस्थित तरीके से बनाया गया। इसमें टारगेटेड पॉवर्टी अलिविएशन की रणनीति काम आई। हर गरीब परिवार की अलग-अलग समस्याएं समझी गईं-कोई खेती नहीं कर पा रहा, कोई बीमार है, कोई शिक्षा से वंचित। उसी के हिसाब से मदद दी गई। यह तरीका बहुत प्रभावी साबित हुआ।

लोगों को केंद्र में रखकर बनाईं योजनाएं

इस पूरे सफर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व सबसे महत्वपूर्ण रहा। पार्टी ने हमेशा लोगों को केंद्र में रखकर विकास की नीति अपनाई। शी चिनफिंग के नेतृत्व में इस अभियान को और तेजी मिली। पार्टी के कार्यकर्ता गांवों में रहकर काम करते थे। उन्होंने खुद गरीब परिवारों के साथ समय बिताया उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान निकाले।

यह सर्विंग द पीपल की भावना का जीवंत उदाहरण है। चीन का मानना है कि विकास तभी सही है जब आम आदमी की जिंदगी बेहतर हो। आज चीन में शिक्षा,स्वास्थ्य,आवास जैसी बुनियादी जरूरतें लगभग सभी तक पहुंच चुकी हैं। इससे लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा और देश की समग्र प्रगति हुई।

दुनिया के लिए सबक

चीन के इस अनुभव से कई देश सीख सकते हैं। सबसे बड़ा सबक है-राजनीतिक स्थिरता और मजबूत नेतृत्व. बिना स्थिर सरकार के लंबी अवधि के लक्ष्य हासिल नहीं होते। दूसरा लोकल परिस्थितियों के अनुसार समाधान। हर जगह एक ही फॉर्मूला नहीं चलाया। जहां खेती अच्छी थी वहां आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया। जहां पर्यटन की संभावना थी वहां होमस्टे और इको-टूरिज्म विकसित किए।

तीसरा इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का उपयोग। ई-कॉमर्स,मोबाइल पेमेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने दूर-दराज के गांवों को भी बाजार से जोड़ा। अलिबाबा, पिंडुआ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने किसानों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने में मदद की। चीन ने दिखाया कि आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय साथ-साथ चल सकते हैं।

चीन का अपना खास मॉडल

चीन का आधुनिकीकरण अपना खास मॉडल है। इसमें समाजवाद की विशेषताओं के साथ चीनी परंपराएं और आधुनिक जरूरतें शामिल हैं। इस मॉडल का व्यावहारिक मूल्य यह है कि यह तेज, समावेशी और स्थायी विकास देता है। गरीबी हटाने के बाद अब चीन हाई-क्वालिटी डेवलपमेंट पर जोर दे रहा है।

दुनिया के लिए बना मिसाल

चीन की गरीबी मुक्ति सिर्फ एक देश की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि सही रणनीति, जन-केंद्रित नीतियां और मजबूत संस्थाएं दुनिया बदल सकती हैं। चीनी शैली का आधुनिकीकरण विकासशील देशों के लिए एक विकल्प प्रस्तुत करता है-जहां तेज विकास के साथ कोई पीछे न छूटे। आज जब पूरी दुनिया चुनौतियों का सामना कर रही है-महंगाई, जलवायु परिवर्तन, असमानता-चीन का अनुभव बहुत उपयोगी है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)

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