इंटरनेशनल डेस्क: यह अनजाना सच नहीं है कि दुनिया कार्बन उत्सर्जन से उत्पन्न प्रदूषण का सामना कर रही है। प्रदूषण को कम करने, मौजूदा सभ्यता को स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ हवा-पानी एवं भोजन उपलब्ध कराने को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं।
इसके बावजूद दुनियाभर में ऊर्जा की आपूर्ति और उत्पादन को बढ़ावा देने या बनाए रखने के लिए कार्बन उत्सर्जन आधारित ऊर्जा उत्पादन में कटौती नहीं दिख रही है। ऐसी स्थिति में दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना का हरित ऊर्जा की ओर बढ़ाने की बात करना दुनिया के लिए नजीर हो सकती है।
चीन की पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना के जो दस्तावेज सामने आए हैं, इसके जो संकल्प समाने आए हैं, उससे साफ है कि चीन हरित हाइड्रोजन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में चल पड़ा है। पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना में चीन सरकार ने इस क्षेत्र को अपना समर्थन बढ़ाने का संकेत दिया है।
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में चीन में यह विकास ऐसे समय में हो रहा है, जब देश की दिलचस्पी पानी से हाइड्रोजन हासिल करके उसके जरिए नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली प्राप्त करने में दिख रही है। इस क्षेत्र में मिलने वाली सफलता इस्पात और रसायन उद्योग में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि अत्यधिक लागत के कारण इसे विश्व के अधिकांश भागों में पैर जमाने में संघर्ष करना पड़ा है।
पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेजों से साफ है कि चीन सरकार इस तकनीक का भरपूर समर्थन कर रही है। उसने इस साल कई पायलट परियोजनाओं के का साथ दिया है, और पिछले महीने इस क्षेत्र को वित्त पोषण में मदद के लिए कार्बन क्रेडिट के लिए खोल दिया है। चीन ने 2026-2030 तक की अपनी अगली पंचवर्षीय योजना में हाइड्रोजन ऊर्जा को भी एक ऐसे क्षेत्र के रूप में चुना है, जिसे वह बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
उद्योग जगत के लिए विशेष रूप से प्रकाशित होने वाले किंगनेंगहुई की इसी महीने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी ऊर्जा कंपनियां सिर्फ 2025 में ही 500 से ज़्यादा हाइड्रोजन परियोजनाएँ शुरू कर चुकी हैं। जिनमें कुल 221 अरब युआन का निवेश होना है, जिनके जरिए करीब 18 गीगावाट बिजली पैदा होगी।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल चीन में 44 हजार टन हाइड्रोजन का उत्पादन शुरू हुआ था, तब से अब तक इसके उत्पादन में केवल 1,000 टन की ही वृद्धि हुई है। इससे साफ है कि कई परियोजनाओं की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। फिर भी, उम्मीद है कि चीन में हरित हाइड्रोजन क्षमता 2030 तक 1.2 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी, जो 2024 के अंत तक के आंकड़े सवा लाख टन से अधिक है।
इसकी अगली कड़ी के रूप में बेहतर कृत्रिम बुद्धिमत्ता विजेताओं की तलाश में चीनी निवेशक खूब निवेश कर रहे हैं और चिप निर्माताओं से आगे धातु उत्पादकों की ओर देख रहे हैं। दिलचस्प यह है कि हरित ऊर्जा उद्योग की ये ही रीढ़ हैं। इतना ही नहीं, चीन में निवेशक यहां के लिथियम बैटरी निर्माताओं और उनके आपूर्तिकर्ताओं के शेयरों में भी जमकर निवेश कर रहे हैं। इसकी वजह से माना जा रहा है कि चीन की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहयोग से अमेरिका आगे निकल सकती है।
इस बीच चीन के राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन (NEA) ने पुष्टि कर दी है कि हाइड्रोजन और अन्य हरित ईंधन उसकी अगली पंचवर्षीय योजना (2026-2030) में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही चीन बिजली क्षेत्र में कार्बन मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बुधवार यानी बारह नवंबर को जारी एक नीतिगत दस्तावेज़ में, एनईए ने बिजली उत्पादकों और प्रांतीय एवं स्थानीय सरकारों को हरित हाइड्रोजन, अमोनिया, मेथनॉल और टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद करने का आग्रह किया।
हाइड्रोजन से अतिरिक्त पवन और सौर ऊर्जा में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे इस्पात, जहाजरानी और उर्वरक जैसे ऊर्जा-प्रधान उद्योगों को फायदा मिल सकता है। एनईए ने तटीय क्षेत्रों को अपतटीय पवन-से-हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया है, क्योंकि इस क्षेत्र का विकास अब भी जारी है। हरित हाइड्रोजन उत्पादन समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर करेगा, जिससे ग्रिड की भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा और ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलेगा।
एनईए का यह कदम दुनिया की सबसे बड़ी बिजली प्रणाली में नवीकरणीय ऊर्जा की कटौती के सिलसिले में बढ़ती चिंताओं के बाद सामने आया है। एक एजेंसी का अनुमान है कि आने वाले दशक में चीन के 21 प्रांतों में सौर ऊर्जा में कटौती की दर 5 प्रतिशत से अधिक होगी, जो 2025 के पहले आठ महीनों में केवल 10 थी।
जैसे-जैसे चीन अभूतपूर्व पैमाने पर पवन और सौर ऊर्जा बेड़े का निर्माण कर रहा है, पारंपरिक ग्रिड क्षमता गति बनाए रखने में विफल हो रही है, इससे योजनाकारों को डाउनस्ट्रीम विद्युतीकरण और अणु रूपांतरण की ओर मजबूर होना पड़ रहा है। चीन ने जिस तरह बाकी क्षेत्रों में तरक्की हासिल की है, उसके आधार पर कह सकते हैं कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी वह उसी तरह आगे बढ़ कर वैश्विक प्रेरणा और चुनौती बन सकता है।
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(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- उमेश चतुर्वेदी)