इंटरनेशनल डेस्क: 14 जनवरी को पूर्वी चीन के शानतोंग प्रांत के छिंगताओ बंदरगाह पर वैक्यूम स्वचालित लंगर प्रणाली के प्रयोग से जहाज़ के लंगर डालने का समय 30 मिनट से घटकर केवल 30 सेकंड रह गया। यह उदाहरण चीन की नई गुणवत्ता आधारित उत्पादकता का प्रतीक है, जो उसके विदेशी व्यापार की मजबूती को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। साल 2025 में चीन का कुल आयात और निर्यात 454.7 खरब युआन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.8 प्रतिशत अधिक रहा।
लगातार नौ वर्षों तक वृद्धि दर्ज करते हुए चीन ने दुनिया के सबसे बड़े माल व्यापारिक राष्ट्र के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया है। वैश्विक आर्थिक मंदी और बढ़ते संरक्षणवाद के बावजूद यह उपलब्धि उल्लेखनीय मानी जा रही है।
इस सफलता के पीछे चीन सरकार की सुदृढ़ नीतिगत समर्थन व्यवस्था और उसकी मजबूत आर्थिक बुनियाद की दोहरी शक्ति कार्यरत रही। विदेशी व्यापार को स्थिर बनाए रखने से संबंधित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव लगातार जारी है, वहीं विशाल उपभोक्ता बाजार और पूर्ण औद्योगिक प्रणाली इस सफलता की ठोस नींव सिद्ध हुई है। चीन के विदेशी व्यापार का यह रिपोर्ट कार्ड तीन प्रमुख विशेषताओं को उजागर करता है, जो इसकी व्यापकता और गुणवत्ता दोनों को रेखांकित करते हैं।
पहली विशेषता यह है कि चीन के व्यापारिक साझेदार लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2025 में चीन ने 240 से अधिक देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे, जिनमें से 190 से अधिक देशों में आयात और निर्यात दोनों में वृद्धि दर्ज की गई। प्रत्येक महाद्वीप के कम से कम 60 प्रतिशत देशों के साथ चीन का व्यापार बढ़ा, जबकि आसियान के साथ चीन का आयात-निर्यात 10 खरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। यह वैश्विक आर्थिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला कारक सिद्ध हुआ है।
दूसरी विशेषता है चीन के विदेशी व्यापार की गुणवत्ता में सुधार। साल 2025 में उच्च-तकनीकी उत्पादों के आयात और निर्यात में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो कुल विदेशी व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत रहा। “नए तीन उत्पादों”- नई ऊर्जा वाहन, लिथियम बैटरी और फोटोवोल्टिक उद्योग के साथ-साथ पवन टर्बाइनों के निर्यात में क्रमशः 27.1 प्रतिशत और 48.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यह प्रवृत्ति हरित विकास और टिकाऊ भविष्य की दिशा में चीन के प्रयासों को दर्शाती है। लिडार उपकरणों के आयात तथा औद्योगिक रोबोटों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो चीन की निरंतर बढ़ती “बुद्धिमान क्षमता” का प्रमाण है। इस प्रकार, चीन की अनुकूलित विदेशी व्यापार संरचना वैश्विक वाणिज्यिक परिदृश्य को नई गति प्रदान कर रही है।
तीसरी विशेषता पारस्परिक सहयोग की गहराई और व्यापारिक “संतुलन” में उल्लेखनीय सुधार से संबंधित है। शीर्ष दस व्यापारिक साझेदारों का कुल व्यापार में 47.7 प्रतिशत योगदान रहा, जो व्यापार में अधिक विविधता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। विदेशी निवेश वाली कंपनियों का आयात-निर्यात में लगभग एक-तिहाई का योगदान रहा। जर्मनी की जेडएफ फ्रेडरिकशाफ़ेन एजी (ZF Friedrichshafen AG) ने अपनी चीनी आपूर्ति श्रृंखला का लाभ उठाते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विस्तार किया है, जबकि अमेरिका की टेपेस्ट्री, इंक. (Tapestry, Inc.) ने चीन में 18 प्रतिशत की बिक्री वृद्धि दर्ज कर वैश्विक स्तर पर अग्रणी प्रदर्शन किया है। चीन लगातार 17 वर्षों से विश्व में दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा है और पिछले वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में 79 देशों के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा। हाईनान मुक्त व्यापार बंदरगाह जैसे उदारीकरण उपायों ने चीन के विशाल घरेलू बाजार को अंतरराष्ट्रीय अवसरों में रूपांतरित किया है।
साल 2026 में जब वैश्विक व्यापार वृद्धि का अनुमान केवल 0.5 प्रतिशत है, तब भी चीन का विदेशी व्यापार अपनी लचीलापन बनाए हुए है। 20वीं सीपीसी केंद्रीय समिति के चौथे पूर्ण सत्र तथा चीन की केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन में वस्तु व्यापार के अनुकूलन और संतुलित विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा तय की गई थी। अपनी ठोस आर्थिक बुनियाद पर भरोसा करते हुए चीन का विदेशी व्यापार न केवल घरेलू विकास का दर्पण है, बल्कि वैश्विक आर्थिक पुनरुत्थान और व्यापारिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी बन गया है। विदेशी मीडिया के अनुसार, चीन की दीर्घकालिक योजना “विकास के वास्तविक अर्थ” को उजागर करती है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

