Last Updated: September 27, 2026

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चीन-श्रीलंका कृषि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति आदान-प्रदान सप्ताह का शुभारंभ

January 20, 2026

चीन-श्रीलंका कृषि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति आदान-प्रदान सप्ताह का शुभारंभ

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में 19 जनवरी को हरित पौध संरक्षण प्रौद्योगिकी नवाचार पर छठे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और चीन-श्रीलंका कृषि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति आदान-प्रदान सप्ताह का शुभारंभ हुआ। “सतत कृषि विकास को बढ़ाने वाला हरित पौध संरक्षण नवाचार” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में पौध संरक्षण में तकनीकी नवाचार, हरित कीट नियंत्रण प्रौद्योगिकियों और पौधों तथा सूक्ष्मजीवों के बीच अंतर्संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया गया। उद्घाटन समारोह में श्रीलंका सरकार के अधिकारियों और चीन, श्रीलंका, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों के विशेषज्ञों व युवा विद्वानों सहित लगभग 700 लोगों ने भाग लिया।

सम्मेलन को दिए अपने बधाई संदेश में श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या ने कहा कि श्रीलंका और चीन के कृषि क्षेत्र में सहयोग का लंबा इतिहास रहा है और इस तरह का आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भाग लेने वाले विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान और चर्चाओं से सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे, जिससे श्रीलंका और चीन के बीच आगे सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

श्रीलंका में चीनी राजदूत छी चेनहोंग ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि आज की दुनिया में जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण परस्पर जुड़े हुए हैं, और हरित कृषि का विकास एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति बन गया है। कृषि सहयोग को मजबूत करना न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की कुंजी है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में भी एक अनिवार्य कदम है। उन्हें विश्वास है कि इस सम्मेलन और आदान-प्रदान सप्ताह में भाग लेने वाले विशेषज्ञ विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे चीन और श्रीलंका के बीच सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों में चाय उद्योग के हरित रूपांतरण और व्यापक सतत कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

यह सम्मेलन 24 जनवरी तक चलेगा और इसमें कई सेमिनार शामिल होंगे। आदान-प्रदान सप्ताह में युवा विद्वानों के लिए एक गोष्ठी, एक राष्ट्रीय प्रमुख प्रयोगशाला में एक सेमिनार और श्रीलंका के चाय बागानों के भ्रमण का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि भाग लेने वाले विशेषज्ञों और विद्वानों के बीच गहन आदान-प्रदान को और सुगम बनाया जा सके।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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