Last Updated: October 8, 2026

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China-Taiwan Tension : ताइपे का बड़ा एक्शन, 7 चीनी विश्वविद्यालयों पर लगाया प्रतिबंध

March 1, 2025

China-Taiwan Tension : ताइपे का बड़ा एक्शन, 7 चीनी विश्वविद्यालयों पर लगाया प्रतिबंध

China-Taiwan Tension : ताइवान ने सात विश्वविद्यालयों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन यूनिवर्सिटी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना गया और इन्हें चीन की राष्ट्रीय रक्षा के सात पुत्र कहा जा रहा है। देश के प्रमुख दैनिक ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों की स्थापना चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने की थी, जिसके बाद इन्हें चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंप दिया गया।

ताइवान के शिक्षा मंत्री चेंग यिंग-याओ ने शुक्रवार को कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों की रक्षा के लिए ताइवानी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को इन सात चीनी यूनिवर्सिटी के साथ किसी भी शैक्षणिक गतिविधि या आदान-प्रदान में शामिल होने से प्रतिबंधित किया गया है।’ ताइवानी मंत्री ने आगे कहा कि यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है, क्योंकि ऐसे आदान-प्रदान से ‘अनजाने में कई महत्वपूर्ण ताइवानी तकनीकों की चोरी हो सकती है।’ यिंग-याओ ने आगे कहा कि ये विश्वविद्यालय प्रमुख रूप से चीनी हथियार, उपकरण, विमानन, दूरसंचार, रसायन और भौतिक विज्ञान के विकास में योगदान देते रहे है।

बीजिंग शक्ति के इस्तेमाल की संभावना

फरवरी में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति विलियम लाइ ने कहा था कि देश में लोकतंत्र और शैक्षणिक स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण हैं। विश्वविद्यालयों को चीन के साथ आदान-प्रदान करते समय सतर्क रहना चाहिए। इससे पहले, ताइवान ने दो चीनी विश्वविद्यालयों को देश में शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित करने से रोक दिया था, क्योंकि खबरें आई थीं कि ये संस्थान बीजिंग के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट की शाखाएं हैं। चीन का बढ़ता प्रभाव ताइवान के लिए सुरक्षा चिंता का विषय रहा है।

ताइवान ने आरोप लगाया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपनी संयुक्त मोर्चा रणनीति का इस्तेमाल खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और देश के भीतर सार्वजनिक निर्णयों को प्रभावित करने के लिए करती है। ताइपे टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से बीजिंग ने ताइवान के लोगों को चीन की ओर आकर्षित करने के लिए शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल किया है, जिसमें एक नई ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली भी शामिल है। चीन ताइवान को अपनी मुख्य भूमि का हिस्सा मानता है और एक अलग प्रांत के रूप में देखता है जिसे अंतत: देश का हिस्सा बनना है। इस मकसद को पाने के लिए बीजिंग शक्ति के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं करता है।

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