अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग गलियारों में बढ़ते राजनीतिक तनाव अब प्रत्यक्ष आरोपों में बदल रहे हैं, जिससे चीन और अमेरिका दोनों के व्यापारिक हित प्रभावित हो रहे हैं। चीन के परिवहन मंत्रालय ने 10 अक्तूबर 2025 को घोषणा की कि वह 14 अक्तूबर 2025 से अमेरिकी जहाज़ों पर विशेष बंदरगाह शुल्क लागू करेगा। यह कदम इस वर्ष 17 अप्रैल को अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा जारी घोषणा के जवाब में उठाया गया है, जिसमें चीन के समुद्री, रसद और जहाज़ निर्माण उद्योगों पर अतिरिक्त बंदरगाह सेवा शुल्क लगाने की बात कही गई थी।
यह विवाद 17 अप्रैल 2025 को उस समय शुरू हुआ, जब अमेरिका ने 301 जांच उपायों के तहत चीनी कंपनियों के स्वामित्व या संचालन वाले जहाज़ों, चीनी ध्वज वाले जहाज़ों और चीनी निर्मित जहाज़ों पर 14 अक्तूबर से अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया। चीन का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रासंगिक सिद्धांतों और चीन-अमेरिका समुद्री परिवहन समझौते का गंभीर उल्लंघन है, जिससे द्विपक्षीय समुद्री व्यापार को गहरा नुकसान पहुँचा है।
अमेरिका के अनुचित दबाव का सामना करते हुए, चीन ने आवश्यक प्रतिवादात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया है। मंत्रालय के अनुसार, 14 अक्तूबर से अमेरिकी कंपनियों, संगठनों और व्यक्तियों के स्वामित्व वाले जहाज़ों, उनके संचालन वाले जहाज़ों, या किसी कंपनी या संगठन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 25% या उससे अधिक अमेरिकी हिस्सेदारी वाले जहाज़ों पर विशेष बंदरगाह शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिका में निर्मित जहाज़ भी इस दायरे में आएंगे। इस शुल्क की वसूली संबंधित चीनी बंदरगाह पर स्थित समुद्री प्रशासन एजेंसी द्वारा की जाएगी।
चीन ने इस नीति में तार्किकता और संयम दोनों का प्रदर्शन किया है। यदि कोई जहाज़ एक ही यात्रा में कई चीनी बंदरगाहों पर रुकता है, तो केवल पहले बंदरगाह पर ही विशेष शुल्क लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, किसी भी जहाज़ पर एक वर्ष में अधिकतम पाँच यात्राओं के लिए ही यह शुल्क लागू होगा। ये प्रावधान दर्शाते हैं कि चीन के प्रतिवाद सीमित और संतुलित हैं, जबकि अमेरिका की नीति कठोर और लचीलेपन से रहित है।
वहीं, अमेरिकी नियमों के अनुसार, किसी जहाज़ को पहली बार अमेरिकी सीमा शुल्क क्षेत्र में प्रवेश से पहले आवश्यक शुल्क चुकाना होगा, अन्यथा उसे लदान-उतराई की अनुमति नहीं दी जाएगी और उसकी रिहाई रोकी जा सकती है।
चीन का मत है कि अमेरिका द्वारा भड़काए गए इस समुद्री व्यापार विवाद में उठाया गया उसका कदम आवश्यकता से प्रेरित है। इतिहास बताता है कि एकतरफ़ा व्यापारिक अवरोध अंततः सभी पक्षों के लिए घाटे का सौदा साबित होते हैं। चीन का मानना है कि जब अमेरिकी जहाज़ चीनी बंदरगाहों पर विशेष शुल्क अदा करेंगे, तब वे मात्र सेवा शुल्क नहीं, बल्कि अमेरिका के एकतरफ़ावादी दृष्टिकोण की कीमत चुका रहे होंगे।
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(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)