
China Warns Philippines : 29 अप्रैल की शाम को चीन ने फिलीपींस के राजदूत को आधिकारिक तौर पर बुलाकर एक गंभीर चेतावनी जारी की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने थाईवान मुद्दे और सुरक्षा क्षेत्र में फिलीपींस द्वारा उठाए गए कदमों को “खतरनाक और उकसावे वाला” बताया। चीन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
साल 2023 के बाद से फिलीपींस को इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला मुख्य कारक माना जा रहा है। चीन के अनुसार, फिलीपींस ने बार-बार हुआंगयान द्वीप के समुद्री क्षेत्र में अवैध घुसपैठ की है और थ्येनश्यानच्याओ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध गतिविधियाँ चलाई हैं। इसके अलावा, अमेरिका और जापान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करके फिलीपींस ने क्षेत्रीय स्थिरता को जानबूझकर चुनौती दी है। चीन का मानना है कि यह रणनीति “लोमड़ी द्वारा बाघ की ताकत भरोसे चलने” जैसी है, जिसमें फिलीपींस बाहरी देशों के समर्थन से अपने अवैध दावों को बढ़ावा दे रहा है।
फिलीपींस की ये रणनीति कुछ ऐसी है जैसे लोमड़ी बाघ की ताकत का इस्तेमाल करना चाह रही हो। वो क्षेत्र के बाहर के ताकतवर देशों को साथ लेकर अपने अवैध दावों को सही ठहराना चाहता है। लेकिन हकीकत ये है कि अमेरिका और जापान जैसी ताकतें भी फिलीपींस की मदद अपनी चालें चलने के लिए कर रही हैं – न कि वाकई उसकी चिंता करने के लिए। अमेरिका चाहता है कि फिलीपींस चीन के खिलाफ उसके मोहरे की तरह काम करे, और जापान अपनी सेना को मज़बूत करने का बहाना ढूंढ रहा है।
मार्कोस सरकार ने अमेरिका के साथ मिलकर सैन्य अड्डे खोल दिए हैं, मिसाइलें तैनात करने दी हैं और महंगे अमेरिकी फाइटर जेट भी खरीद लिए हैं। लेकिन जब सवाल आया कि अगर चीन और फिलीपींस के बीच जंग हुई तो अमेरिका मदद करेगा या नहीं, तो अमेरिका ने साफ़ हाथ खड़े कर दिए। वहीं, जापान की ओर से मिली सैन्य सहायता भी इतनी नहीं है कि फिलीपींस की असल ताकत बढ़ा दे। उल्टा, इस सब से इलाके के बाकी देशों में बेचैनी और नाराज़गी ही बढ़ेगी।
फिलीपींस की यह नीति न तो उसे कोई असली सुरक्षा दे रही है, न ही भविष्य में दे पाएगी। इसका उल्टा असर हो सकता है, जिससे खतरे और बढ़ सकते हैं। चीन की पॉलिसी हमेशा से यह रही है कि दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता बनी रहे। चीन बातचीत और सलाह-मशवरे के ज़रिए मसलों को सुलझाना चाहता है, लेकिन साथ ही यह भी तय है कि वो अपने क्षेत्रीय अधिकारों और समुद्री हक़ों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
2025 में जब दुनिया फ़ासीवाद पर जीत की 80वीं सालगिरह मना रही है, तब हमें याद रखना चाहिए कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय फिलीपींस को जबरदस्त तकलीफों का सामना करना पड़ा था। लेकिन अफसोस की बात है कि आज वही देश फिर से बाहर की ताकतों के लिए एक ‘ठग’ जैसा रोल निभा रहा है। इससे न सिर्फ उसकी अपनी जनता का नुकसान हो रहा है, बल्कि पूरे इलाके में भरोसे और सहयोग की भावना को भी चोट पहुंच रही है।
अब वक्त आ गया है कि फिलीपींस ज़मीनी सच्चाई को समझे, दूसरों की ताकत का सहारा लेने की चालाकी छोड़े और वापस शांति और सहयोग की राह पर लौटे। तभी देश में लंबे समय तक स्थिरता और विकास की उम्मीद की जा सकती है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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