चीन में पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना की शुरूआत होने वाली है। इसके ठीक पहले आर्थिक मोर्चे पर चीन के बेहतर प्रदर्शन ने देश को नए उत्साह से भर दिया है। साल 2025 में चीन के सकल घरेलू उत्पाद दर यानी जीडीपी में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की है। हालांकि घरेलू मोर्चे पर जिस तरह की परेशानियां चीन की आर्थिकी झेल रही थी और इसी बीच बाहरी, विशेषकर ट्रंप प्रशासन की ओर से थोपे गए टैरिफ युद्ध के बावजूद चीन अपना आर्थिक लक्ष्य 2025 में हासिल करने में सफल रहा है। यहां ध्यान देने की बात है कि चीन सरकार ने पांच प्रतिशत सालाना बढ़ोत्तरी का ही लक्ष्य रखा था। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा सहयोग सेवा और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने दिया। ये आंकड़े एक तरह से चीन के आर्थिक विकास को आकार देने वाले संरचनात्मक बदलावों को ही जाहिर करते हैं।
चीन की आर्थिकी ने साल 2025 का समापन अपने आधिकारिक लक्ष्य के लिहाज से विकास के साथ किया। कह सकते है कि यह 14वीं पंचवर्षीय योजना का एक शालीन अंत रहा। 19 जनवरी, 2026 को नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स यानी एनबीएस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, लगातार घरेलू मांग में कमजोरी और बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद साल 2025 में चीन का सकल घरेलू उत्पाद 5.0 प्रतिशत की दर से बढ़ा।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना साल 2026 से 2030 तक चलेगी। अब तक के आर्थिक आंकड़े बड़े उद्योगों में स्थिरता का संकेत देते हैं, इन आंकड़ों से जाहिर है कि औद्योगिक विकास, सेवाओं और बाहरी बाजारों के साथ चीन की अर्थव्यस्था संतुलन बनाने में कामयाब हो रही है। 2025 में चीन की आर्थिकी का प्रदर्शन दिखाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि के लिए योजना बनाने की मजबूत क्षमता से फायदा होता है, जबकि वह छोटी अवधि में व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ रही है।
पांच प्रतिशत की वृद्धि दर का महत्व सोच से कहीं ज़्यादा है, क्योंकि यह 15वीं पंचवर्षीय योजना की बेहतर और स्थिर शुरुआत के लिए बुनियाद तैयार करता है। जिस तरह इन दिनों आर्थिकी के मोर्चे पर बाहरी अनिश्चितताएं हैं, अगर वैसे ही हालात बने रहते हैं, इस स्थिति में देश में घरेलू मांग को और बढ़ाने की जरूरत महसूस होती है। पुराने से नए विकास इंजनों में बदलाव के लिए अधिक लक्षित इनपुट की आवश्यकता है। ये आंकड़े जाहिर करते हैं कि चीन के लिए इन दिनों रणनीतिक योजना, नीति समन्वय, व्यावहारिक सुधार और उच्च-मानक वाले खुलेपन पर लगातार निर्भरता की जरूरत है। गौरतलब है कि पिछले महीने हुए वार्षिक केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन में इन्हीं विषयों पर जोर दिया गया था।
खास बात यह है कि पिछले पांच सालों में चीनी अर्थव्यवस्था की बुनियाद और मजबूत हुई है। व्यापार संरचना में और विविधता आई है, बेहतरीन औद्योगिक प्रणाली का बेहतर लाभ उठाया गया है और चीन के बहुत बड़े घरेलू बाजार की क्षमता को और उजागर किया गया है। इसने बाहरी झटकों को कम करने में मदद दी है, साथ ही नीति निर्माताओं को विकास को स्थिर करने और अपग्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए तुरंत नीतिगत उपकरणों को तैनात करने के लिए जगह बनाई है।
पिछले पांच सालों में हाई-टेक और उच्च-मूल्य-वर्धित निर्यात की मजबूत गति की छाप भी इन आंकड़ों में दिखती हैं। दिलचस्प है कि इस दौरान दुनिया की कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका आदि ने चीन से “अलग होने” या अपने व्यापार और उद्योगों को “जोखिम मुक्त” करने की कोशिश की। इसके बावजूद चीन की आर्थिकी संतुलित पटरी पर आगे बढ़ती रही है। कुछ देशों द्वारा अलग राह चुनने के बावजूद 150 से ज़्यादा देशों के साथ प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में चीन लगातार आगे बढ़ता रहा।
बाहरी दबावों के बावजूद चीन ने ना सिर्फ अपनी आर्थिक संरचना को अनुकूलित किया, बल्कि अपने उद्योगों को अपग्रेड करने पर दोगुना जोर दिया। कह सकते हैं कि एक तरह से इन चुनौतियों ने ही चीन को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ चीन हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया, जिसने औद्योगिक उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, आखिरी खपत ने आर्थिक विकास थ में आधे से ज़्यादा योगदान दिया और एक समन्वित एवं एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने की दिशा में प्रगति हुई। इस बीच, संस्थागत सुधारों ने सही प्रतियोगिता को बढ़ावा देकर बाजार में जान फूंकने में मदद की। साफ़ है कि कुछ बाहरी ताकतें चीन के विकास और उसके नवाचार दबाकर और वैश्विक अर्थव्यवस्था से उसे अलग करना और उसकी राह में बाधा डालने की जितनी भी कोशिश करती हैं, चीन उतना ही नवाचार केंद्रित विकास की ओर बढ़ा है और दुनिया के लिए अपने दरवाज़े और खोले हैं। ऐसा करके, उसने उच्च मानक आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ और गहराई से जुड़ा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्यक्ष, बोर्गे ब्रेंडे ठीक ही कहते हैं कि चीन अपनी पारंपरिक ताकत को और मज़बूत कर रहा है, साथ ही नए क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, और नवाचार प्रेरित वैश्विक विकास में बड़ा हिस्सेदार बना हुआ है।
कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए चीन का सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहना न केवल वैश्विक विकास में उसके अनुमानित 30 प्रतिशत योगदान के लिए उल्लेखनीय है। संयुक्त राज्य अमेरिका के आर्थिक दबाव में जहां कुछ वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने झुकने को मजबूर हुईं, वहीं कुछ ने अमेरिका से संघर्ष को लेकर हिचकिचाहट दिखाई, कुछ ने अमेरिका का साथ दिया, लेकिन चीन विकास पथ पर चलते हुए अपनी स्थिर आर्थिकी के जरिए अमेरिका का दृढ़ता से जवाब दिया। अब चीन दुनिया को संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि लचीली नीतिओं और वैश्विक सहयोग के चलते दुनिया में टिका रहा जा सकता है।
चीन ने खुलेपन, सहयोग और नवाचार आधारित विकास का दूरगामी लाभ उठाया है। डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित ऊर्जा और एडवांस्ड उपकरण मैन्युफैक्चरिंग में चीन की प्रगति ने न केवल उत्पादकता को बढ़ाया है, बल्कि अनिश्चितताओं के अनुकूल होने की अर्थव्यवस्था की क्षमता में भी सुधार किया है। नई पंच-वर्षीय योजना अवधि के दौरान, चीन अपने शोध और विकास के मद में निवेश बढ़ाना जारी रखेगा, अपने नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मज़बूत करेगा और नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों को बढ़ावा देने के लिए उद्योग के साथ प्रौद्योगिकी के अपने एकीकरण को गहरा करेगा।
पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भी चीन अपनी घरेलू मांग को अपने विकास का मुख्य इंजन मानते हुए आगे बढ़ता रहेगा। इस व्यवस्था में खपत, विशेष रूप से सेवा खपत को बढ़ावा देने और आय वितरण में सुधार पर अधिक ज़ोर दिया जा सकता है। इस दौरान चीन की कोशिश होगी कि आपूर्ति व्यवस्था में विकास होता रहे। इसके साथ ही पारंपरिक उद्योगों को अपग्रेड करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही उभरते उद्योगों को बढ़ावा देने की नीतियां आगे बढ़ती रहेंगी। चीन में आर्थिक सुधार एक प्रमुख कारक बना रहेगा, जिसमें दक्षता को बढ़ावा मिलेगा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत को कम करने की कोशिश होगी और इसी तरह के उपाय किए जाएंगे।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

