दुनिया की छत कहे जाने वाले हिमालय की गोद में बसा शीत्सांग, 23 मई को अपने शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। वर्ष 1951 में हस्ताक्षरित 17-पॉइंट एग्रीमेंट के बाद शीत्सांग में सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। पिछले सात दशकों में शीत्सांग ने पारंपरिक सामंती व्यवस्था से आधुनिक विकास की ओर लंबी यात्रा तय की है। आज शीत्सांग चीन के पश्चिमी क्षेत्र में तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में शामिल है। पहले जहाँ शीत्सांग की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पारंपरिक कृषि और पशुपालन पर निर्भर थी, वहीं अब पर्यटन, स्वच्छ ऊर्जा, आधुनिक कृषि, व्यापार और बुनियादी ढांचे ने इसकी अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।
1951 से पहले शीत्सांग में सामंती व्यवस्था थी, जहां 90% से अधिक लोग भूदास थे। आज शीत्सांग की अर्थव्यवस्था मजबूत है। 2023 में शीत्सांग का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 240 अरब युआन (लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये) था, जो 1951 की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक है। रेलवे, राजमार्गों और हवाई संपर्क के विस्तार ने स्थानीय व्यापार को मजबूत किया है। चिंगहाई-शीत्सांग रेलवे ने शीत्सांग को चीन के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ा है, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा, जलविद्युत परियोजनाओं और हरित विकास मॉडल ने शीत्सांग को पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।
2019 तक शीत्सांग के सभी 74 जिलों में गरीबी का स्तर शून्य पर आ गया। लगभग 628,000 लोग गरीबी से बाहर निकले। 1950 के दशक में केवल 2% बच्चे स्कूल जाते थे। अब निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा (9 साल) लागू है, और साक्षरता दर 95% से अधिक है। औसत जीवन प्रत्याशा 1951 में 35.5 वर्ष से बढ़कर अब 72.2 वर्ष हो गई है। हर गाँव में स्वास्थ्य केंद्र हैं, और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। शीत्सांग की भाषा, परंपराएँ और बौद्ध धर्म संरक्षित हैं। पोटाला पैलेस, जोखांग मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ है, और लोग प्रार्थना, तीर्थयात्रा स्वतंत्र रूप से करते हैं।
आज शीत्सांग के लोग अधिक स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पारंपरिक जीवन शैली भी कायम है। पर्यटन उद्योग ने स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाई है और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। ल्हासा की सड़कों पर बढ़ती आर्थिक गतिविधियाँ, आधुनिक बाजार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा संस्थान यह दर्शाते हैं कि शीत्सांग ने पिछले 75 वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है। 2023 तक लगभग 1.2 लाख किलोमीटर सड़कें, कई हवाई अड्डे (ल्हासा, शिगात्से, निंगची), और रेल मार्ग शीत्सांग को देश से जोड़ते हैं। हर घर में बिजली, साफ पानी और इंटरनेट पहुँच रहा है।
शीत्सांग का यह 75 वर्षों का सफर अत्यंत परिवर्तनकारी रहा है। भूदास प्रथा से आधुनिक, शिक्षित और स्वस्थ समाज तक का विकास हुआ है। अर्थव्यवस्था स्थिर है, लोगों का जीवन स्तर ऊँचा है, और सांस्कृतिक धरोहरें सुरक्षित हैं। यह शांतिपूर्ण मुक्ति शीत्सांग के लिए एक नए युग का द्वार थी, जहाँ आज लोग सुरक्षा, समृद्धि और शांति से जी रहे हैं। शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति के 75 वर्ष केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव नहीं, बल्कि विकास, स्थिरता और सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी हैं। आर्थिक प्रगति, गरीबी उन्मूलन, सांस्कृतिक संरक्षण और बेहतर जीवन स्तर ने शीत्सांग को आधुनिकता और परंपरा के संतुलन का एक उदाहरण बना दिया है। आज का शीत्सांग एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर रहा है जहाँ विकास के साथ शांति और समृद्धि को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- देवेंद्र सिंह)

