20 फरवरी को, स्थानीय समयानुसार, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे प्रमुख टैरिफ नीति को खारिज़ कर दिया। वर्तमान अमेरिकी टैरिफ दरें 1940 के दशक के बाद से उच्चतम स्तर पर हैं। विडंबना यह है कि पिछले वर्ष अमेरिकी व्यापार घाटा रिकॉर्ड 12.409 खरब डॉलर तक पहुंच गया, और घाटे को कम करने के उद्देश्य से लगाए गए उच्चतम टैरिफ ने अब तक का सबसे बड़ा घाटा पैदा कर दिया, और यह अंतर और भी बढ़ सकता है। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार 94.7% उत्तरदाताओं का मानना था कि “अमेरिका फर्स्ट” के तहत टैरिफ़ नीति पूरी तरह विफल रही है।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की टैरिफ़ नीति के तीन मुख्य लक्ष्य थे: विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करना, घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करना और दशकों से घटते विनिर्माण रोजगार को पुनर्जीवित करना। एक साल बाद, ये तीनों लक्ष्य विफल हो गए हैं। पिछले साल से अमेरिका ने दुनिया भर के दर्जनों देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ़ लगाए हैं, लेकिन व्यापार घाटा बना हुआ है। अनुमान है कि दिसंबर 2025 तक वस्तुओं और सेवाओं में अमेरिकी व्यापार घाटा 70.3 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो लगातार दूसरे महीने वृद्धि का संकेत है। सर्वेक्षण में, 91.2% उत्तरदाताओं ने संकेत दिया कि टैरिफ अमेरिकी व्यापार संरचना को संतुलित करने में अप्रभावी हैं। 86.7% ने बताया कि अमेरिकी व्यापार घाटा मुख्य रूप से घरेलू आर्थिक नीतियों से प्रभावित है।
अमेरिकी टैरिफ नीतियों से प्रभावित होकर, कंपनियां अपने ऑर्डर आपूर्ति योजनाओं को समायोजित कर रही हैं और अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर उत्पादन लाइनों को अमेरिका में वापस नहीं ला पाई हैं, जबकि अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र ने पिछले साल 80,000 से अधिक श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया था। इस बारे में, 93.4% उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र अमेरिका में वापस नहीं लौटा है। वास्तव में, टैरिफ़ नीतियों ने विनिर्माण क्षेत्र के खोखलेपन को और तेज़ कर दिया है। 92.5% उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ़ नीतियां अपने और वैश्विक आर्थिक विकास दोनों में गंभीर बाधा उत्पन्न करेंगी।
टैरिफ़ न केवल ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख घरेलू आर्थिक नीति है, बल्कि विदेशी देशों पर अधिकतम दबाव डालने और अपने “अमेरिका फर्स्ट” स्वार्थ को साधने का एक हथियार भी हैं। फैसले के बाद, कैलिफोर्निया के गवर्नर न्यूजॉम ने अमेरिकी सरकार से ब्याज़ सहित तत्काल रिफंड जारी करने का आह्वान किया, और कनाडा के व्यापार मंत्री डोमिनिक लेब्लांक ने फैसले का स्वागत किया। हालांकि, ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका में आयातित सभी वस्तुओं पर मौजूदा नियमित टैरिफ़ के अलावा 150 दिनों की अवधि के लिए 10% का अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया गया है।
यह टैरिफ़ अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किए गए कुछ आपातकालीन टैरिफ़ को प्रतिस्थापित करने के लिए है। सर्वेक्षण में, 88% उत्तरदाताओं ने अमेरिकी व्यापार नीति में व्यापार नियमों का दुरुपयोग करने की आलोचना की, इसे “अमेरिका फर्स्ट” वर्चस्ववादी व्यवहार का सच्चा प्रतिबिंब माना। 92.9% उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने टैरिफ़ नीति में बार-बार बदलाव किया, जिससकी अनिश्चितता वैश्विक आर्थिक जोखिमों को बढ़ाएगी। 97% उत्तरदाताओं ने अमेरिकी टैरिफ़ नीति की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह विभिन्न देशों के वैध अधिकारों और हितों का गंभीर रूप से उल्लंघन करती है और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को नुकसान पहुंचाती है। उनका मानना है कि अमेरिका ही बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का सबसे बड़ा विनाशक है।
यह सर्वे सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया था, जिसमें 24 घंटों के भीतर 10,445 लोगों ने भाग लिया और अपनी राय व्यक्त की।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

