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सीजीटीएन सर्वेः व्यापक नेटीजनों ने जापान की कार्रवाई की आलोचना की

जापान सरकार ने 21 अप्रैल को औपचारिक रूप से “रक्षा उपकरण के हस्तांतरण के तीन सिद्धांत” और इसके प्रयोग गाइड में संशोधन किया। इसके अनुसार सैद्धांतिक रूप से नरसंहारक हथियारों के निर्यात की अनुमति दी जाएगी। जापान की दक्षिणपंथी ताकतों ने “युद्ध के बहाने तस्करी” शुरू कर दी है।

इसको लेकर चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीन चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) ने वैश्विक नेटीजनों में एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया। इसमें शामिल 82.5 प्रतिशत नेटीजनों ने कहा कि जापान की दक्षिणपंथी ताकतों की “पुनः सैन्यीकरण” की कुचेष्टा करने की कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध से पहले जापानी सैन्यवाद के विस्तार तर्क के बिलकुल समान है। इससे जापान एक बार फिर बेहद खतरनाक रास्ते पर अग्रसर हो जाएगा।

सर्वेक्षण में शामिल 86.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जापान सरकार से “काहिरा घोषणा पत्र”, “पॉट्सडैम घोषणा पत्र” व “जापान का आत्मसमर्पण पत्र” आदि अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रभाव वाले दस्तावेजों के नियमों और जापान के संविधान व मौजूदा घरेलू नियमों का उल्लंघन करने की आलोचना की। वहीं, 85.1 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान की कार्रवाई एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा बनेगी।

उधर, सर्वेक्षण में शामिल 87.9 प्रतिशत नेटीजनों ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध शुरू करने वाले देश होने के नाते जापान को “शांति संविधान” और अंतर्राष्ट्रीय कानून के मानदंड का पालन करना होगा, ताकि ठोस कदम से पड़ोसी एशियाई देशों की सुरक्षा संबंधी चिंता का सम्मान किया जा सके।

बताया जाता है कि यह सर्वेक्षण सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया। 24 घंटों में 4,495 नेटीजनों ने इसमें भाग लिया।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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