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चीन की एआई विकास संबंधी उपलब्धियां विश्व के लिए लाभकारी हैं: वैश्विक हस्तियां

17 जुलाई को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शांगहाई में आयोजित 2026 विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (WAIC) और एआई वैश्विक शासन पर उच्च स्तरीय बैठक के उद्घाटन समारोह में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने एआई से मिलने वाले व्यापक अवसरों और उससे जुड़ी शासन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए चार महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए। उनका उद्देश्य वैश्विक एआई विकास और उसके प्रभावी संचालन के लिए चीन के अनुभव और समाधान साझा करना था। राष्ट्रपति शी के भाषण को विभिन्न क्षेत्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

इस सम्मेलन में चीन ने दुनिया भर के सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया। प्रतिभागियों का मानना था कि यह सम्मेलन आपसी विश्वास बढ़ाने, साझा समझ विकसित करने और सहयोग को मजबूत करने का प्रभावी मंच बना है। उनका कहना था कि इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, स्वस्थ और व्यवस्थित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

संयुक्त राष्ट्र के एआई संबंधी उच्च स्तरीय सलाहकार निकाय की पूर्व सह-अध्यक्ष कार्मे आर्टिगास ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने “जन-केंद्रित, सकारात्मक और मानव हित आधारित” एआई विकास की आवश्यकता पर स्पष्ट रूप से जोर दिया है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ सभी तक पहुंचे। उन्होंने कहा, “यह बेहद महत्वपूर्ण है। हमें ऐसी वैश्विक सहमति की जरूरत है, जो लोगों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ नवाचार को भी आगे बढ़ाए। विशेष रूप से नवाचार और विकास के बीच संतुलन बनाने के मामले में हम चीन के दृष्टिकोण से बहुत कुछ सीख सकते हैं।”

गौरतलब है कि सभी पक्षों के संयुक्त प्रयासों से शांगहाई में विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन की स्थापना हुई। इस दौरान 29 देशों के प्रतिनिधियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन होगा। इसका उद्देश्य एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और प्रभावी शासन को बढ़ावा देना है, ताकि पूरी मानवता को इसका लाभ मिल सके।

संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव अमनदीप सिंह गिल ने कहा कि 29 देशों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि एआई के क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उनके अनुसार, इस तकनीक के प्रभावी प्रबंधन के लिए देशों को राष्ट्रीय सीमाओं और राजनीतिक या आर्थिक मतभेदों से ऊपर उठकर मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग की अहमियत को और मजबूत करती है।

गिल ने यह भी कहा कि विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन की स्थापना से डिजिटल और एआई क्षमता के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र, एआई क्षमता निर्माण के क्षेत्र में चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ दुनिया भर के लोगों तक पहुंच सकें।

दक्षिण अफ्रीका के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री ब्लेड न्ज़िमांडे ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने विश्व एआई सहयोग संगठन के महत्व को जिस तरह रेखांकित किया, उससे वह बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल में साझा भविष्य वाले मानव समुदाय, सभी देशों की भागीदारी और बहुपक्षवाद पर जोर दिया गया है, जो आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है।

न्ज़िमांडे ने कहा कि कई अफ्रीकी देशों में एआई विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी है। ऐसे में चीन जैसे तकनीकी रूप से सक्षम देश विकासशील देशों के साथ अपने अनुभव और संसाधन साझा कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ मिल सकें। उन्होंने चीन को एक समान भागीदार बताते हुए कहा कि वह अपने तकनीकी अनुभव के जरिए वैश्विक विकास में सकारात्मक योगदान दे रहा है।

इस बीच, फाइनेंशियल टाइम्स, ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स और अल जज़ीरा सहित कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी 2026 WAIC पर विशेष रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। इन रिपोर्टों में वैश्विक एआई सहयोग और शासन के लिए चीन के प्रस्तावों को प्रमुखता दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, प्रतिभा विकास और विकासशील देशों के साथ ओपन सोर्स तकनीक साझा करने का समर्थन करता है, ताकि डिजिटल खाई को कम किया जा सके। साथ ही, उसने जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक एआई नियामक प्रणाली को मजबूत करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के स्वस्थ विकास का भी आह्वान किया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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