Last Updated: September 25, 2026

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चीन का गाओकाओ 2026: इसे दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा क्यों कहा जाता है?

July 4, 2026

चीन का गाओकाओ 2026: इसे दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा क्यों कहा जाता है?

एक परीक्षा, जिस पर टिका होता है लाखों छात्रों का भविष्य

हर साल जून का महीना आते ही चीन में एक ऐसी परीक्षा होती है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। इस परीक्षा का नाम है गाओकाओ (Gaokao)। साल 2026 में भी यह परीक्षा एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी वजह सिर्फ इसकी कठिनाई नहीं, बल्कि इसमें शामिल होने वाले छात्रों की भारी संख्या और इससे जुड़ा जबरदस्त मानसिक दबाव भी है।

इस साल करीब 1.29 करोड़ (12.9 मिलियन) छात्रों ने गाओकाओ परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।यह परीक्षा चीन में विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे बड़ा और सबसे अहम माध्यम मानी जाती है।कई छात्रों के लिए यह परीक्षा उनके करियर और भविष्य की दिशा तय करती है इसलिए इसे दुनिया की सबसे कठिन और सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है।

क्या है गाओकाओ परीक्षा?

गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है। यह आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में आयोजित होती है और अलग-अलग प्रांतों में 2 से 4 दिनों तक चल सकती है। इस परीक्षा में छात्रों से चीनी भाषा, गणित, अंग्रेजी और अन्य वैकल्पिक विषयों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। परीक्षा का उद्देश्य यह तय करना होता है कि कौन-से छात्र देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के योग्य हैं।

क्यों इतनी कठिन मानी जाती है यह परीक्षा?

गाओकाओ की सबसे बड़ी चुनौती इसका पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि इसकी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है।लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए मुकाबला करते हैं। चीन के नामी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए बहुत ऊंचे अंक लाने पड़ते हैं। कई छात्र इस परीक्षा की तैयारी के लिए रोज 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई करते हैं। कई परिवार अपनी पूरी दिनचर्या बच्चों की पढ़ाई के हिसाब से बदल देते हैं। परीक्षा के दौरान स्कूलों के आसपास ट्रैफिक रोका जाता है, हॉर्न बजाने पर रोक लगाई जाती है और छात्रों को शांत माहौल देने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

नकल रोकने के लिए हाईटेक इंतजाम

गाओकाओ जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होती है इसलिए चीन सरकार हर साल सुरक्षा के कड़े इंतजाम करती है। 2026 की परीक्षा में भी परीक्षा केंद्रों पर AI आधारित निगरानी, स्मार्ट स्क्रीनिंग सिस्टम, चेहरा पहचानने वाली तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की सख्त जांच की गई।मोबाइल फोन, स्मार्ट ग्लास और अन्य हाईटेक गैजेट्स के जरिए नकल रोकने के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

क्या बदल रहा है चीन का शिक्षा मॉडल?

हालांकि गाओकाओ आज भी चीन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें शामिल होने वाले छात्रों की संख्या में हल्की गिरावट देखी गई है। इसकी एक वजह चीन में घटती युवा आबादी और दूसरी वजह यह है कि अब कई छात्र पारंपरिक विश्वविद्यालयों की बजाय व्यावसायिक (Vocational) शिक्षा को भी चुन रहे हैं। इसके बावजूद अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने की होड़ आज भी बेहद कड़ी बनी हुई है और गाओकाओ का महत्व कम नहीं हुआ है।

दुनिया के लिए क्यों है यह मिसाल?

गाओकाओ सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि चीन की शिक्षा व्यवस्था और अनुशासन का प्रतीक भी मानी जाती है। यहां मेहनत, प्रतिस्पर्धा और योग्यता को काफी महत्व दिया जाता है। हर साल करोड़ों छात्र पूरे समर्पण के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। यही वजह है कि गाओकाओ आज भी दुनिया की सबसे चर्चित और सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)  (लेखक— डी के)

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