संघर्ष, महामारी और जलवायु संकट से जूझती दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि का एकमात्र मार्ग सुशासन है। लेकिन आज की वैश्विक व्यवस्था प्रतिनिधित्व, वैधता और प्रभावशीलता के त्रिकोणीय संकट से गुजर रही है – विकासशील देशों को दरकिनार किया जा रहा है, असमानता तेज़ी से बढ़ रही है।
इस पृष्ठभूमि में, चीन का “मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय” का आह्वान सचमुच ताज़ी हवा के झोंके जैसा है। पिछले साल सितंबर में उत्तरी चीन के बंदरगाह शहर थ्येनचिन में “शांगहाई सहयोग संगठन प्लस” सम्मेलन में ‘वैश्विक शासन पहल‘ जैसी महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई- जो वैश्विक शासन को नया रूप देने और उसे मज़बूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निस्संदेह, जीजीआई संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के लिए एक समयोचित प्रतिक्रिया है। जीजीआई वैश्विक शासन के लिए एक चीनी दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो सहयोग, पारस्परिक लाभ और समावेशिता को प्राथमिकता देता है- ये मूल्य आज की दुनिया में बेहद जरूरी हैं। शांति, विकास, सुरक्षा, शासन और विश्वास में दबाव वाली चुनौतियों और कमियों को संबोधित करके, जीजीआई वैश्विक शासन में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।
राष्ट्रपति शी का सभी देशों के लिए समान भागीदारी, सह-निर्माण और लाभ पर जोर, आकार, शक्ति या संपत्ति की परवाह किए बिना, अधिक लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके शब्द आज की दुनिया में एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।
जीजीआई की शुरुआत का श्रेय 23 मार्च, 2013 को मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय संबंध विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति शी के दूरदर्शी भाषण को दिया जा सकता है। इस ऐतिहासिक भाषण में, उन्होंने “मानवता के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय” की अवधारणा पेश की, जो तब से चीन के कूटनीतिक दर्शन की एक पहचान बन गई है। राष्ट्रपति शी ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहां देश परस्पर निर्भर और सहायक हैं, जो बहुपक्षीयता, समावेशिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देता है।
चीन की वैश्विक शासन पहल एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य एक अधिक न्यायपूर्ण, समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण विश्व का निर्माण करना है। इस पहल के माध्यम से, चीन वैश्विक शासन में सुधार, बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
‘संप्रभु समानता को बनाए रखने‘, ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करने‘, ‘बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने‘, ‘लोक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने‘ और ‘ठोस कार्यों पर ज़ोर देने‘ जैसे पांच प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित, जीजीआई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के साथ मेल खाता है।
वैश्विक शासन पहल मानव समाज की चुनौतियों का समाधान करने के लिए चीन की एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहल है। यह चीन की पिछली पहलों – वैश्विक विकास पहल (Global Development Initiative), वैश्विक सुरक्षा पहल (Global Security Initiative), वैश्विक सभ्यता पहल (Global Civilization Initiative) और “बेल्ट एंड रोड” पहल (Belt and Road Initiative) के बाद आया है। इन लोक-केंद्रित पहलों का उद्देश्य मानवता के लिए समान लक्ष्यों वाला समुदाय बनाना और विश्व शांति को बनाए रखना है।
राष्ट्रपति शी का दृष्टिकोण एक सामंजस्यपूर्ण दुनिया के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जहां सहयोग और आपसी लाभ मानवता को फलने-फूलने में सक्षम बनाते हैं। जीजीआई को अपनाकर, राष्ट्र एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
चीन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के क्रम का रक्षक, निर्माता और सुधारक है। प्रभुत्व या समानांतर क्रम की तलाश में नहीं, बल्कि साझेदारी और सहयोग की भावना में चीन की यह भूमिका आज की दुनिया के लिए बेहद जरूरी है। चीन की स्पष्ट प्राथमिकता है कि बहुपक्षवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल सिद्धांत बने, जो साझेदारी और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चीन की उल्लेखनीय प्रगति से प्रभावित है, जो नवाचार, खुलापन और मित्रता की भावना का प्रतीक है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में संपन्न “दो सत्रों” के दौरान संवाददाता सम्मेलन में कहा, “चीन अधिक देशों से वैश्विक शासन पहल (जीजीआई) में भाग लेने और समर्थन करने का आह्वान करता है, और संयुक्त राष्ट्र को पुनर्जीवित करने, संयुक्त राष्ट्र की रक्षा करने और इसे मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान करता है।” जीजीआई को 150 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन मिल चुका है, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
चीन की वैश्विक शासन पहल एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश देती है – एकता और सामूहिक कार्रवाई आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नए समीकरण बन रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर एक साझा लक्ष्य की ओर बढ़ें – एक अधिक शांतिपूर्ण, समृद्ध और न्यायपूर्ण दुनिया के लिए ।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)