यह महीना दुनिया के 53 देशों के लिए एक नई खुशखबरी लेकर आया। जहां एक तरफ दुनिया में उथल पुथल मची है वहीं चीन ने एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया।चीन ने अफ्रीका के 53 देशों के लिए जीरो टैरिफ प्लान लागू कर दिया। मतलब अफ्रीका से चीन जाने वाले सामान पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। ये दुनिया का पहला बड़ा अर्थव्यवस्था वाला देश है जिसने अफ्रीकी देशों के साथ ऐसा पूरा कवरेज दिया है। चीन इसे हाई-लेवल ओपनिंग-अप का नया कदम बता रहा है।
जीरो टैरिफ का मतलब क्या है?
सरल भाषा में समझें तो टैरिफ यानी आयात शुल्क। जब कोई देश दूसरे देश से माल खरीदता है तो उस पर टैक्स लगता है। जीरो टैरिफ का मतलब है कि ये टैक्स पूरी तरह खत्म।अफ्रीका से चीनी बाजार में आने वाले प्रोडक्ट्स अब सस्ते हो जाएंगे। इससे अफ्रीकी किसान, छोटे उद्योग और एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा होगा।चीन सिर्फ टैरिफ खत्म नहीं कर रहा। वो इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी साइन करने पर जोर दे रहा है।साथ ही ग्रीन चैनल को और बेहतर बना रहा है ताकि अफ्रीकी सामान जल्दी और आसानी से चीन पहुंच सके। ये सब मिलकर अफ्रीका के लिए एक बड़ा बाजार खोल रहा है।
अफ्रीकी देशों को कितना फायदा?
अफ्रीका के कई देश कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। वहां से कॉफी, कोको, फल, सब्जियां, खनिज, तेल और हस्तशिल्प जैसे प्रोडक्ट्स आते हैं। अब ये सब चीन में बिना टैक्स के पहुंचेंगे। नतीजा अफ्रीकी व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाएंगे। रोजगार बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।कई अफ्रीकी देश पहले से ही चीन के साथ व्यापार करते हैं, लेकिन टैरिफ की वजह से उनका माल महंगा पड़ जाता था। अब ये बाधा दूर हो गई है।खासकर छोटे-मोटे उत्पादकों के लिए ये गेम चेंजर साबित हो सकता है। चीन कह रहा है कि वो अफ्रीकी प्रोडक्ट्स के लिए मार्केट एक्सेस और बढ़ाएगा।
चीन को क्यों फायदा?
चीन की अपनी जरूरतें भी हैं। वो अफ्रीका से कच्चा माल, खनिज और कृषि उत्पाद खरीदता है। जीरो टैरिफ से सप्लाई चेन सस्ती और तेज हो जाएगी। साथ ही चीन अफ्रीका में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।ज्यादा व्यापार का मतलब ज्यादा दोस्ती और निवेश के नए मौके।ये कदम चीन की विन-विन वाली नीति को दिखाता है। एक तरफ अफ्रीका का विकास, दूसरी तरफ चीन को सस्ता और भरोसेमंद सप्लाई। चीन पहले से ही अफ्रीका में सड़कें, बंदरगाह, रेलवे और फैक्टरियां बना रहा है। अब व्यापार को और आसान बनाकर वो अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है।
दुनिया के लिए क्या मायने रखता है?
ये फैसला सिर्फ चीन-अफ्रीका का नहीं है। ये वैश्विक व्यापार के लिए भी एक संदेश है। कई विकसित देश अफ्रीका से सामान खरीदते हैं लेकिन टैरिफ और नियमों की वजह से पूरा फायदा नहीं पहुंच पाता। चीन ने दिखा दिया कि बड़े अर्थव्यवस्था वाला देश भी अफ्रीका को बिना शर्त सपोर्ट दे सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अन्य देशों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वो अफ्रीका के साथ अपने व्यापार नीतियां दोबारा सोचें।
चुनौतियां भी हैं
हालांकि सब कुछ इतना आसान भी नहीं। अफ्रीका में बुनियादी ढांचा अभी भी कमजोर है। उत्पादन बढ़ाने की क्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स में सुधार की जरूरत है। अगर ये नहीं हुआ तो सिर्फ टैरिफ खत्म करने से पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।दूसरी तरफ चीन के अपने उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है।कुछ लोकल प्रोड्यूसर्स को सस्ते अफ्रीकी माल से मुकाबला करना पड़ेगा, लेकिन कुल मिलाकर चीन इसे लंबे समय का फायदा मानकर आगे बढ़ रहा है।
भविष्य की तस्वीर: आर्थिक विकास होगा तेज
मई से शुरू ये व्यवस्था अफ्रीका-चीन संबंधों में नया अध्याय जोड़ रही है। अगर ये सफल रही तो दोनों तरफ आर्थिक विकास तेज होगा। अफ्रीकी युवाओं को रोजगार मिलेगा।चीन को संसाधन और नया बाजार।ये कदम दिखाता है कि आज की दुनिया में व्यापार सिर्फ मुनाफे का नहीं, बल्कि साझेदारी का भी साधन बन सकता है। चीन ने जो किया है वो न सिर्फ अपने लिए बल्कि विकासशील देशों के लिए भी एक उदाहरण है। अंत में ये खबर अच्छी है उन सभी के लिए जो मानते हैं कि मजबूत व्यापार संबंध गरीबी कम कर सकते हैं और देशों के बीच पुल बना सकते हैं।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)