Last Updated: September 22, 2026

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चीन में ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण पर दिया विशेष ध्यान, कोयला खदान बनी राष्ट्रीय पार्क

June 1, 2026

चीन में ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण पर दिया विशेष ध्यान, कोयला खदान बनी राष्ट्रीय पार्क

चीन में सबसे पहले औद्योगीकरण हासिल करने वाले क्षेत्रों में से एक उत्तर-पूर्वी चीन में आज भी अतीत की झलक दिखती है। लियाओनिंग प्रांत की राजधानी शेनयांग से 45 किमी. दूर फुशुन कस्बे में एक ऐतिहासिक विरासत मौजूद है, जो कभी एशिया की सबसे बड़ी ओपन पिट कोयला खदान के तौर पर प्रसिद्ध थी। इसे चीन में हुए औद्योगीकरण का प्रतीक माना जाता है। आज यह म्यूज़ियम का रूप ले चुका है, और पर्यटक यहां पहुंचकर चीन में उद्योगों के विकास के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके साथ ही इस इलाके में पर्यावरण संरक्षण के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। क्योंकि यह पूरा क्षेत्र राष्ट्रीय खदान पार्क के रूप में विकसित हो रहा है। 

हाल के दिनों में, मुझे फुशुन काउंटी की इस खदान को नजदीक से देखने और जानने का अवसर मिला। इसे देखकर कहा जा सकता है कि चीन में औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन किस तरह बिठाया जा रहा है। जब मैं संग्रहालय बन चुके इस जगह के पास गया तो वहां बड़ी संख्या में पर्यटकों को देखा। ये लोग इसके इतिहास और पृष्ठभूमि के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक नजर आ रहे थे। 

ध्यान रहे कि चीन के उत्तर-पूर्वी इलाके में खनिज संसाधन व्यापक मात्रा में मिलते हैं, यही वजह है कि 20वीं शताब्दी में विभिन्न कंपनियों का ध्यान यहां की तरफ गया। साथ ही, विदेशी आक्रमणकारियों ने भी संसाधनों का दोहन करने की योजना बनायी। 

अगर इतिहास पर नज़र डालें, तो वर्ष 1901 में चीनी उद्योगपति वांग छंगयाओ ने इस खदान का काम शुरू करवाया। हालांकि खदान को बाद में मुख्य रूप से जापानी नियंत्रण वाली दक्षिण मंचूरिया रेलवे कंपनी (मंतेत्सु) ने वर्ष 1907 में तैयार किया था और इसका विस्तार किया गया। बता दें कि साल 1905 से 1945 तक इसमें जापानी आक्रमणकारियों का कब्ज़ा रहा। इस दौरान 86.5 मिलियन टन कोयला और 78 मिलियन टन ऑयल शेल लूटा गया।

बाद में जापानी नियंत्रण से मुक्त होने पर यह वर्ष 1949 से 1990 तक चीन का मुख्य राष्ट्रीय ऊर्जा आधार रहा, इस दौरान खदान का पीक आउटपुट 50 हज़ार टन प्रतिदिन होता था। 

इस खदान की लंबाई लगभग 6.6 किमी है, जबकि चौड़ाई 2 किमी और गहराई 300 मीटर है। जब यहां काम होता था, तब कोयले की माइनिंग पावर बेलचे, ट्रक और इलेक्ट्रिक रेल सिस्टम से की जाती थी। वहीं, इओसीन जिजुंटुन फॉर्मेशन से ऑयल शेल की भी माइनिंग होती थी।

इस खदान से लगभग सौ साल से अधिक समय तक कोयला आदि निकालने के बाद वर्ष 2019 में संचालन बंद कर दिया गया। संबंधित एजेंसियों ने विभिन्न वजहों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया। इसमें पर्यावरण संबंधी खतरे, संसाधनों की कमी और भूस्खलन व जमीन धंसने जैसे कारण शामिल हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि हाल के समय में चीन ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। ऐसे में इस खदान से आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण संबंधी नुकसान के मद्देनजर ऐसा किया गया।

वैसे इस खदान ने चीन की शुरुआती इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया, साथ ही फुशुन कस्बे को चीन की कोयला राजधानीका खिताब दिलाया। अब यहां आसपास के 432 हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया गया है, और 40 लाख से अधिक पेड़-पौधे लगाए गए हैं। जिससे पर्यावरण प्रदूषण में काफी कमी आयी है। 

लेकिन इस खदान और उसकी विरासत का इतिहास नयी पढ़ी और पर्यटकों के सामने रखने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। इस खदान वाले क्षेत्र में एक म्यूज़ियम बनाया गया है। साथ ही, इसे नेशनल माइन पार्क में बदला जा रहा है, मिट्टी भराव, पेड़ लगाने और ढलानों को स्थिर करने जैसे काम किए जा रहे हैं।

वहीं, इस साइट को एक “लाइव” इंडस्ट्रियल टूरिज़्म साइट में बदल दिया गया है, जहां पहुंचकर पर्यटक एक तय प्लेटफ़ॉर्म से बड़े, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण गड्ढे को देख सकते हैं। 

जबकि भविष्य के लिए भी योजना तैयार की गयी है, इसमें सौर ऊर्जा और संभावित पंप-स्टोरेज हाइड्रोपावर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी खाली जगह का इस्तेमाल करना शामिल है।

ओपन पिट माइनिंग एक सरफेस माइनिंग तकनीक है, जिसका इस्तेमाल धरती की सतह के पास मौजूद खनिजों को निकालने के लिए किया जाता है। इसकी सुरक्षा और आर्थिक फ़ायदों की वजह से खदान संचालक इस तरीके को पसंद करते हैं। दुनिया भर में लगभग 70 फीसदी मिनरल्स इसी तरीके से निकाले जाते हैं।

(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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