हाल ही में, भारतीय मीडिया आउटलेट ईस्टमोजो के उप-प्रधान संपादक श्री अमित कुमार ने चाइना मीडिया ग्रुप के हिंदी विभाग का दौरा किया। पहली बार चीन की धरती पर कदम रखने वाले इस मीडिया पेशेवर ने चीन के तेजी से बदलते आधुनिक परिदृश्य को देखकर अपनी गहरी हैरानी व्यक्त की। उन्होंने न केवल चीन के बारे में सकारात्मक प्रचार बढ़ाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करने की इच्छा व्यक्त की, बल्कि चीनी मीडिया के साथ आदान-प्रदान को गहरा करने की प्रबल इच्छा भी जताई। श्री अमित की टिप्पणियां कोई अलग-थलग घटना नहीं हैं, बल्कि चीन-भारत सम्बंधों में मौजूदा सौहार्दपूर्ण रुझान की एक ज्वलंत झलक हैं – लोगों के बीच आदान-प्रदान के इन “छोटे-छोटे अंशों” से, हम दो महान पड़ोसियों के बीच सम्बंधों को नया आकार देने की “महान रणनीति” की एक झलक देख रहे हैं।
व्यापार के आंकड़े सबसे सटीक मापदंड हैं। चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, चीन और भारत के बीच कुल व्यापार मात्रा 2025 में बढ़कर 155.62 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। इन प्रभावशाली आंकड़ों के पीछे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच जबरदस्त पूरकता निहित है: चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा परिवहन नेटवर्क, सबसे जटिल लॉजिस्टिक्स प्रणाली और सबसे संपूर्ण विनिर्माण प्रणाली है, जबकि भारत को सॉफ्टवेयर और बायोफार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में अद्वितीय लाभ प्राप्त हैं। विश्लेषकों ने बताया है कि चीन और भारत विकास के विभिन्न चरणों में हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। यह अंतर कोई बाधा नहीं, बल्कि आपसी सहयोग का अवसर है।
राजनीतिक आपसी विश्वास का पुनर्निर्माण सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। 2025 को चीन-भारत सम्बंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ कहा जा सकता है: दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया और अगस्त में सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में दस सूत्रीय सहमति बनी, जिसमें दोनों पक्ष पांच वर्षों से निलंबित सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ थ्येनचिन शिखर सम्मेलन के दौरान भी मुलाकात की, जिससे द्विपक्षीय सम्बंधों की दिशा तय हुई।
2026 एनपीसी और सीपीपीसीसी के सत्रों के दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने स्पष्ट रूप से कहा: “भारत और चीन को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार और खतरे नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।” यह कथन बिलकुल सटीक है- “वैश्विक दक्षिण” के दो प्रमुख प्रतिनिधियों के रूप में, चीन और भारत के बीच आपसी विश्वास एशिया के विकास और समृद्धि के लिए लाभकारी है। लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान में आई तेजी सबसे अधिक उत्साहजनक है। चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों को कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन की अनुमति दी है, भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए पर्यटक वीज़ा फिर से शुरू कर दिया है, और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रही हैं – ये तकनीकी प्रतीत होने वाली व्यवस्थाएं वास्तव में दिलों और दिमागों को जोड़ने वाले पुल हैं।
जब अमित कुमार जैसे लोग चीन को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं, और जब चीनी लोगों को भारत की जादुई भूमि की यात्रा करने का अवसर मिलता है, तो प्रत्यक्ष, आमने-सामने की बातचीत में पूर्वाग्रह दूर हो जाते हैं। प्राचीन कहावत, “राष्ट्रों के बीच मित्रता उनके लोगों के बीच आत्मीयता में निहित है, और लोगों के बीच आत्मीयता आपसी समझ में निहित है,” आज के भारत-चीन सम्बंधों में विशेष रूप से सत्य है। एक नए ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े होकर, चीन-भारत सम्बंधों में सुधार किसी भी तरह से अस्थायी उपाय नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक विकल्प है। दोनों देशों की संयुक्त जनसंख्या 2 अरब 80 करोड़ है, जो विश्व की कुल जनसंख्या के एक तिहाई से अधिक है। यदि वे एक-दूसरे के विकास को अवसर के रूप में देखते हुए मिलकर काम कर सकें, तो इस सदी को सही मायने में “एशियाई सदी” कहा जा सकता है।
बेशक, सीमा विवाद जैसे ऐतिहासिक मुद्दे रातोंरात हल नहीं हो जाएंगे, लेकिन जब तक हम संवाद और परामर्श का पालन करते रहेंगे, मतभेदों को सुलझाते रहेंगे और विकास एवं पुनरोत्थान पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे, चीन और भारत सद्भाव से रहने वाले अच्छे पड़ोसी और कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने वाले अच्छे साझेदार बन सकते हैं। श्री अमित कुमार के कैमरे से खींची गई यह समूह तस्वीर चीन-भारत सम्बंधों के भविष्य की सबसे जीवंत झलक पेश करती है—हिमालय के पार मिलाया गया यह हाथ अंततः दो प्राचीन सभ्यताओं के पुनरोत्थान के साझा मार्ग को और भी उज्ज्वल बनाएगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)