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अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संवारने की दिशा में चीन का नया कदम

China's new step towards preserving its cultural heritage

China's new step towards preserving its cultural heritage

चीन अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को लगातार नई दिशा दे रहा है। इसी कड़ी में देश ने पारंपरिक गांवों और ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और उपयोग से जुड़े मानकों को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित तथा व्यावहारिक बनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य केवल प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक विकास के साथ संतुलित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना भी है।

चीन के अनेक पारंपरिक गांव आज भी अपनी मूल स्थापत्य कला, लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए हैं। इन्हें देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वर्तमान में 8,155 गांव राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित पारंपरिक गांवों की सूची में शामिल हैं, जबकि 5,000 से अधिक गांवों को प्रांतीय स्तर पर भी संरक्षण प्रदान किया गया है। यह व्यापक संरक्षण अभियान चीन की ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नई योजना के तहत पारंपरिक गांवों और ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, मरम्मत, पुनर्निर्माण, नवीनीकरण और अनुकूल पुनः उपयोग के लिए अधिक विस्तृत तकनीकी मानक तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक गांव और इमारत का संरक्षण उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला की विशेषताओं के अनुरूप हो। इससे एक जैसी संरक्षण पद्धति अपनाने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

वर्ष 2026 से 2028 के दौरान केंद्र सरकार उन क्षेत्रों को विशेष सहायता प्रदान करेगी, जहां पारंपरिक गांवों के संरक्षण की मजबूत आधारशिला मौजूद है और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक ब्रांड विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इसके साथ ही पारंपरिक गांवों में निहित निर्माण तकनीकों, नियोजन सिद्धांतों और संरक्षण के व्यावहारिक अनुभवों का व्यवस्थित अध्ययन किया जाएगा। इन अनुभवों को संकलित कर पारंपरिक चीनी स्थापत्य ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित तथा आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक शहरी और ग्रामीण विकास के लिए भी उपयोगी सीख प्राप्त हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल ऐतिहासिक इमारतों और गांवों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण पुनर्जीवन, सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकती है। बेहतर संरक्षण मानकों और योजनाबद्ध विकास के माध्यम से चीन अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए उसे सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

(दिव्या पाण्डेय – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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