इंटरनेशनल डेस्क : चीन की राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के वार्षिक सम्मेलन (दो सत्र) चीन के पूरी प्रक्रिया वाले लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। राजधानी पेइचिंग में आयोजित इन बैठकों में एनपीसी और सीपीपीसीसी के लगभग पाँच हज़ार प्रतिनिधि और सदस्य एकत्रित होते हैं। ये प्रतिनिधि अपने साथ जमीनी स्तर से उठने वाली जनता की सशक्त आवाज़ें भी लेकर आते हैं। कुछ प्रतिनिधि विकास से जुड़ी चर्चाओं के लिए स्थानीय विशेषज्ञता साझा करते हैं, तो कई अन्य “जनभावनाओं की नोटबुक” के साथ व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करते हैं।
इस महत्वपूर्ण मंच के माध्यम से एनपीसी के प्रतिनिधि और सीपीपीसीसी के सदस्य सक्रिय रूप से अपने विचार, सुझाव और परामर्श रखते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक जमीनी स्तर की आवाज़ें निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया तक पहुँचे और अंततः प्रमुख राष्ट्रीय नीतियों और निर्णयों का रूप लें। यही प्रक्रिया चीन के पूरे लोकतांत्रिक ढाँचे की जीवंतता और प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
पूरी प्रक्रिया वाला लोकतंत्र चुनाव, परामर्श, निर्णय-निर्माण, प्रबंधन और पर्यवेक्षण के सभी चरणों में समाहित है। जनता को केंद्र में रखने वाली यह व्यवस्था वास्तव में इस सिद्धांत की गारंटी देती है कि देश के मामलों में जनता ही अंतिम स्वामी है। इसी कारण इसे लोकतंत्र का “सबसे व्यापक, सबसे प्रामाणिक और सबसे प्रभावी” रूप माना जाता है। यह व्यवस्था जमीनी वास्तविकताओं से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के पाँचों स्तरों पर कुल लगभग 27 लाख प्रतिनिधि हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत काउंटी और टाउनशिप स्तर के हैं। इनमें बड़ी संख्या जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और किसानों की है। इस प्रकार यह प्रणाली “वास्तविक” जनमत को सीधे सामने लाने का माध्यम बनती है और विभिन्न क्षेत्रों, उद्योगों तथा सामाजिक समूहों की आकांक्षाओं और विचारों को सहज रूप से व्यक्त करने का अवसर देती है।
इस व्यवस्था में जनमत को वास्तविक रूप से शामिल किया जाता है। उदाहरण के लिए, 15वीं पंचवर्षीय योजना के मसौदे की तैयारी के दौरान देशभर से 31.13 लाख से अधिक वैध सुझाव आमंत्रित किए गए थे, जिनमें से अनेक सुझावों को योजना में शामिल भी किया गया। इसी प्रकार इस वर्ष के दो सत्रों के दौरान समीक्षा किए गए तीन मसौदा क़ानूनों, जिनमें पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता भी शामिल है, पर व्यापक स्तर पर परामर्श किया गया। उदाहरण के तौर पर, इस संहिता में शोर प्रदूषण से जुड़े मुद्दों के लिए वर्गीकृत विनियमन का प्रावधान किया गया है, जो सीधे तौर पर जनता की वास्तविक चिंताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
यह लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में भी ठोस कदम उठाती है। उदाहरण के लिए, हपेई प्रांत के प्रतिनिधि छन छुनफ़ांग ने सर्किट अदालतों से संबंधित एक सुझाव प्रस्तुत किया था, जिसे अगले ही वर्ष सर्वोच्च जन न्यायालय की रिपोर्ट में शामिल कर लिया गया। इसी तरह 2025 तक प्रतिनिधियों के सुझावों और सीपीपीसीसी के प्रस्तावों पर सरकार की कार्यान्वयन दर 95 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई, जो इस प्रणाली की प्रभावशीलता और व्यावहारिक परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
इस लोकतांत्रिक मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक ध्यान और मान्यता प्राप्त हुई है। पिछले वर्ष प्रकाशित एडेलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और व्यवसायों के प्रति चीनी जनता का समग्र विश्वास सर्वेक्षण में शामिल सभी देशों में सबसे अधिक रहा। साथ ही भविष्य के प्रति उनका आशावाद भी वैश्विक स्तर पर सर्वोच्च पाया गया। यह व्यवस्था न केवल चीनी शैली के आधुनिकीकरण के लिए एक सुदृढ़ संस्थागत आधार प्रदान करती है, बल्कि उन विकासशील देशों के लिए भी महत्वपूर्ण अनुभव और सीख प्रस्तुत करती है जो अपने लिए उपयुक्त लोकतांत्रिक मॉडल की तलाश में हैं।
15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत के साथ, पूरी प्रक्रिया वाला लोकतंत्र शीर्ष-स्तरीय नीति-निर्माण और व्यापक जन परामर्श के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इसका उद्देश्य जनता की तात्कालिक आवश्यकताओं और चिंताओं का समाधान करना, तथा चीनी शैली के आधुनिकीकरण को नई ऊर्जा प्रदान करना है। साथ ही यह व्यवस्था विश्व को और अधिक प्रेरणा प्रदान करेगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)