एक सौ पांच साल पहले पूरी दुनिया उथल-पुथल से भरी थी। तब दुनिया के कई हिस्सों में मार्क्स और लेनिन की विचारधारा लोगों को आकर्षित कर रही थी। जगह-जगह कम्युनिस्ट आंदोलन अपनी नींव जमा रहा था। उन्हीं दिनों चीन में भी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की गई। भयंकर गरीबी से जूझ रहे तत्कालीन चीन में इस पार्टी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य विदेशी साम्राज्यवाद और सामंतवाद के खिलाफ मार्क्सवाद-लेनिनवाद की वैचारिक बुनियाद पर राष्ट्रीय क्रांति का नेतृत्व करने के साथ वर्ग संघर्ष के माध्यम से चीन में समाजवादी और आखिर में साम्यवादी समाज की स्थापना करना था।
कम्युनिस्ट पार्टी का उद्देश्य स्थापना के 28 साल बाद जाकर ही सफल हो पाया, जब चीन में एक अक्टूबर 1949 को माओत्से तुंग के नेतृत्व में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की। तब से लेकर चीन ने लंबी यात्रा की है। कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में उसने घोर गरीबी से दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सोपान तय किया है। चीन आज दुनिया की ना सिर्फ दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था है, बल्कि वह दुनिया की बड़ी सैनिक ताकत भी है।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बने और उसके नेतृत्व में चीन के आगे बढ़ते रहना आज की राजनीतिक वैचारिकी के लिए अध्ययन का विषय हो सकता है। इसकी वजह यह है कि उन्हीं दिनों दुनिया के कई देशों में शुरू हुए कम्युनिस्ट आंदोलन जहां कमजोर पड़ गए हैं, वहीं चीन में वह पूरी ताकत और शिद्दत से आगे बढ़ रहा है। यहां याद आता है भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के ठीक चार साल बाद भारत में मानवेंद्र नाथ राय ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। इसी कम्युनिस्ट पार्टी ने 1957 में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई पहली सरकार बनाने में सफलता हासिल की। सर्वहारा की क्रांति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए भी हो सकती है, इसे दिखाने-समझाने की कोशिश भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन ने भारत के केरल राज्य से शुरू की। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में लंबे समय तक कम्युनिस्ट आंदोलन की सरकारें रहीं। उन्होंने अपने ढंग से काम जरूर किया, लेकिन वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की तरह टिकाऊ नहीं रह पाईं।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अगर चीन की राजनीतिक केंद्रबिंदु बनी हुई है तो इसकी बड़ी वजह दुनिया के साथ लगातार कदमताल करते रहना और बदलती वैश्विक स्थिति के मुताबिक खुद को ढालना और उसके जरिए चीन को बदलना रहा है। जब दुनिया में आर्थिक सुधारों की ओर कदम बढ़ाना शुरू किया, चीन ने भी आर्थिक गति के साथ कदम बढ़ाना शुरू किया। आज चीन दुनिया की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन चुकी है। चीन के साथ रिश्ते बढ़ाने और हाथ मिलाने के लिए दुनिया का बड़ा हिस्सा उत्सुक रहता।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना का एक उद्देश्य चीन को विदेशी शक्तियों (साम्राज्यवादियों) के प्रभाव और घरेलू युद्ध सरदारों (सैन्यवादियों) के दमन से मुक्त कराना भी था। आज चीन की महिलाएं पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर फैक्टरियों, कार्यस्थलों आदि पर चीन की आर्थिक क्रांति का नया अध्याय रच रही हैं। इसे देखकर कहा जा सकता है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपने इस उद्देश्य से कितना आगे निकल चुकी है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में चीन ने अब अपना घोषित उद्देश्य तय किया है, वैश्विक साझा विकास। ताकि मानवता की रक्षा हो सके। उम्मीद कर सकते हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की अगुआ में चीन इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)
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