Site icon Dainik Savera Times

विदेशी रिपोर्ट: वैश्विक ऊर्जा संकट के तहत चीन की आर्थिक वृद्धि में लचीलापन

कतर न्यूज़ एजेंसी ने 28 मार्च को कतर नेशनल बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता के बावजूद, चीनी अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। रिपोर्ट बताती है कि चीन के संरचनात्मक लाभ, जैसे कि विविध ऊर्जा संरचना, तेल पर कम निर्भरता और पर्याप्त रणनीतिक भंडार, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव से प्रभावी रूप से बचाव करते हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अधिकांश समान अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में, चीनी अर्थव्यवस्था अधिक लचीली है और मौजूदा बाज़ार उथल-पुथल का सामना करते हुए अपने विकास लक्ष्यों को बनाए रखने की उम्मीद है। रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि 2026 तक, मजबूत निर्यात, लचीली घरेलू मांग और निरंतर उत्पादकता वृद्धि चीन के आर्थिक विकास लक्ष्यों को समर्थन देगी।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि ऊर्जा बाज़ार में निरंतर अस्थिरता के बावजूद, चीन अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम प्रभावित होगा। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से आयात लागत बढ़ सकती है और कुछ हद तक मुद्रास्फीति का दबाव पैदा हो सकता है, लेकिन समग्र आर्थिक विकास पर इसका व्यापक प्रभाव नियंत्रण में रहेगा।

नाइजीरिया की प्रमुख मीडिया “थिस डे” (This Day) में 28 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में बिगड़ती स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को संकट में डाल दिया है, और कई देश तेल की बढ़ती कीमतों के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। इस उथल-पुथल के बीच, एक देश उल्लेखनीय रूप से शांत नज़र आ रहा है, और वो है चीन।

लेख में विश्लेषण किया गया है कि अधिकांश विकासशील देशों को लंबे समय से ऊर्जा संबंधी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है: या तो आयातित जीवाश्म ऊर्जा पर निर्भर रहना, अंतरराष्ट्रीय मूल्य उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों का खामियाजा भुगतना; या वित्तीय और तकनीकी सीमाओं से ग्रस्त होकर बड़े पैमाने पर घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा विकसित करने में असमर्थ होना। लेकिन चीन ने तीसरा रास्ता चुना है कि पश्चिमी गोबी रेगिस्तान में दुनिया का सबसे बड़ा पवन और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना, और अति-उच्च वोल्टेज तकनीक के माध्यम से हजारों किलोमीटर दूर पूर्वी शहरों तक स्वच्छ बिजली पहुंचाना। 

लेख का निष्कर्ष यह है कि चीन का अनुभव दर्शाता है कि विकासशील देशों को वास्तविक विकास हासिल करने के लिए अत्यधिक बाहरी ऊर्जा निर्भरता से मुक्त होना होगा और अपने संसाधनों के लाभ के आधार पर एक स्वतंत्र मार्ग अपनाना होगा। चीन अन्य विकासशील देशों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है, प्रौद्योगिकी साझाकरण और अनुभव हस्तांतरण के माध्यम से उनकी ऊर्जा आपूर्ति क्षमता में सुधार करने और उनके ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ाने में मदद कर रहा है। समान सहयोग और पारस्परिक लाभ का यह मॉडल न केवल कुछ प्रमुख शक्तियों के ऊर्जा आधिपत्य से अलग है, बल्कि विकासशील दुनिया के एक सदस्य के रूप में चीन की जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

Exit mobile version