चीन ने पिछले कई वर्षों से तकनीक के विकास में बहुत ध्यान दिया है, जिसके चलते वह विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बात स्पेस कंप्यूटिंग इंडस्ट्री की करें तो इसके विकास के लिए चीन में एक नीति बनाने पर काम हो रहा है। जानकार कहते हैं कि यह एक रणनीतिक कदम है जो ऑर्बिट में डेटा प्रोसेस करने के तरीके को बदल सकता है और दुनिया में तकनीकी दौड़ में चीन के स्थान को मज़बूत कर सकता है।
बता दें कि स्पेस कंप्यूटिंग का मतलब ऑर्बिट में कंप्यूटिंग क्षमता का इस्तेमाल होता है, जिससे सैटेलाइट नेटवर्क को आसानी से ग्लोबल कवरेज मिल सके। संबंधित नीति से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि पुराने सैटेलाइट सिर्फ़ कैमरे की तरह काम करते हैं जो डेटा कैप्चर करते हैं और प्रोसेसिंग के लिए ग्राउंड स्टेशनों पर बहुत सारी अपुष्ट जानकारी भेजते हैं। जबकि स्पेस कंप्यूटिंग में ऑनबोर्ड सर्वर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स और स्टोरेज डिवाइस लगे सैटेलाइट शामिल होते हैं, जो काफी आधुनिक माने जाते हैं।
बताया जाता है कि इससे सैटेलाइट डेटा इकट्ठा और एनालाइज़ कर पाते हैं, साथ ही रियल टाइम में फ़ैसले भी ले पाते हैं, जिससे डेटा प्रोसेसिंग का समय कई घंटों से घटकर कुछ सेकंड में आ जाता है। साथ ही सैटेलाइट ग्राउंड-बेस्ड डेटा सेंटर के सामने आने वाली ऊर्जा और जगह की लिमिटेशन को भी दूर करते हैं। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सूचना और प्रौद्योगिकी विकास विभाग के उप प्रमुख चाओ छ के मुताबिक ग्राउंड-बेस्ड डेटा सेंटर्स की तुलना में स्पेस कंप्यूटिंग रियल-टाइम इन-ऑर्बिट प्रोसेसिंग, कम लागत वाली ऊर्जा आपूर्ति और विस्तृत दायरे में कवरेज जैसे लाभ देती है।
इतना ही नहीं ये फीचर्स स्पेस ऊर्जा का इस्तेमाल करने और ग्लोबल कवरेज और एंटी-जैमिंग क्षमताओं को बेहतर बनाने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगे। कहने का मतलब है कि इस तकनीक से उभरते सेक्टर के रणनीतिक महत्व और अच्छी औद्योगिक संभावना का पता चलता है। कहा गया है कि इससे सिस्टमैटिक प्लानिंग मजबूत की जाएगी। साथ ही स्पेस कंप्यूटिंग इंडस्ट्री को ठोस और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम किया जाएगा।
ध्यान रहे कि मार्केट रिसर्च कंपनी बीआईएस रिसर्च के अनुसार, ग्लोबल इन-ऑर्बिट डेटा सेंटर मार्केट वर्ष 2035 तक 39.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जिसकी वार्षिक बढ़ोतरी दर 67.4 प्रतिशत होगी।कहा जा सकता है कि चीन ने हाल के दशकों में तकनीक और नवाचार को बड़ी तेजी से अपनाया है, यही वजह है कि आज वह लगातार इस दिशा में निर्णायक रोल निभा रहा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग, अनिल पांडेय)

