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एपस्टीन मामले में पाखंडी न्याय को छिपाया ताकत और पैसे ने

China News

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एपस्टीन फ़ाइल के रिलीज़ होने के साथ 30 लाख से ज़्यादा पेज के दस्तावेज़, 2,000 से ज़्यादा वीडियो और 1 लाख 80 हज़ार फ़ोटो एक लहर की तरह सामने आए। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे व स्लोवाकिया आदि यूरोपीय और अमेरिकी देशों के कई राजनीतिक और व्यावसायिक हस्तियों को इस मामले में शामिल पाया गया। इन नेताओं का अचानक रूप से खुलासा हुआ कि एपस्टीन की “शैतानी डील” से उनके करीबी संबंध थे, जो कभी “प्रक्रियात्मक न्याय” का नारा लगाते थे। सावधानी से बनाए गए ये नैतिक उच्च आधार संबंधित ईमेल व फ़ोटो के सामने आने से टूट रहे हैं।

फ्रांस के पूर्व संस्कृति मंत्री जैक्स लैंग , ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रभारी मॉर्गन मैकस्वीनी और अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन आदि कई देशों के जाने-माने लोगों ने एपस्टीन फ़ाइलों में शामिल होने की वजह से इस्तीफा दे दिया है या उनकी जांच चल रही है। ऐसा लगता तो इनका पतन एपस्टीन फ़ाइलों के रिलीज़ होने का आकस्मिक परिणाम है, लेकिन असल में यह बात शक्ति और पूंजी के बीच मिलीभगत का एक ज़रूरी खुलासा है। जब मैंडेलसन के एपस्टीन के साथ करीबी रिश्ते सामने आए, तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का “सबसे गंभीर संकट” का बयान बहुत कुछ कहता है। मैंडेलसन पर शक है कि एपस्टीन ने मैंडेलसन को हज़ारों डॉलर ट्रांसफर किए, और मैंडेलसन ने एपस्टीन को बाजार-संवेदनशील और राष्ट्रीय संवेदनशील जानकारी भी लीक की। ये नेता लंबे समय से लाभों के आदान-प्रदान के दलदल में फंसे हुए हैं, जो कभी खुद को “साफ़” और “न्यायप्रिय” बताते थे।

इससे भी ज़्यादा अजीब बात अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक का ” प्रदर्शन” है। हावर्ड लटनिक ने पहले पक्के तौर पर दावा किया कि वह एपस्टीन से “सिर्फ़ एक बार मिले थे”। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी बात बदल दी और “कई बार मिलने” की बात मान ली। उन्होंने अमेरिकी सीनेट की सुनवाई में भी ज़ोर देकर कहा कि उनका “एपस्टीन से कोई संबंध नहीं है।” लेकिन अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी संबंधित ईमेल से पता चलता है कि वर्ष 2012 वह अपनी पत्नी, बच्चों और नैनी को एपस्टीन के निजी द्वीप पर ले गए। उन्होंने वर्ष 2018 में एपस्टीन के साथ संपर्क बनाए रखा। लुटनिक के इस्तीफे की कई अमेरिकी कांग्रेसियों की मांग के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बस इतना कहा कि “लुटनिक समेत अमेरिकी संघीय सरकार के सभी सदस्य अपने काम करते रहेंगे”। इस चयनात्मक अंधेपन की वजह से अमेरिका में “न्यायिक स्वतंत्रता” और “मानवाधिकार सर्वप्रथम” के नारे खास तौर पर कमज़ोर लगते हैं।

यह बात कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम बिना एडिट की गयी एपस्टीन फ़ाइलों में “10 लाख से ज़्यादा बार आया”, इस पाखंडी प्रहसन को और हवा देता है। इससे भी ज़्यादा दिलचस्प बात यह है, पहले ट्रंप ने एपस्टीन फ़ाइलों में लुटनिक और अन्य अमेरिकी अधिकारियों के ज़िक्र के प्रति ऐसा कहा था कि “मेरे मन में वे ठीक हैं। नहीं तो, यह हेडलाइन न्यूज़ होती”। इसमें शामिल नेताओं को “सुरक्षात्मक छत्र” देने का यह काम “अमेरिकी लोकतंत्र” के दोगलेपन को सामने लाता है।

एपस्टीन मामले में “सुरक्षात्मक छत्र” की शक्ति आम जनता की उम्मीदों व कल्पनाओं से कहीं ज़्यादा है। वर्ष 1992 में एपस्टीन ने बिल क्लिंटन के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए दान किए और पावर के सेंटर का दरवाज़ा खटखटाया। वर्ष 1993 से वर्ष 1995 तक वह कम से कम 17 बार व्हाइट हाउस गए और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन के सहयोगियों के साथ उनके करीबी रिश्ते थे। वर्ष 2002 में क्लिंटन ने एपस्टीन के निजी हवाई विमान बदनाम “लोलिता एक्सप्रेस” से अफ्रीका की यात्रा की थी। इस यात्रा में चाउंटे डेविस के क्लिंटन की मसाज करते हुए तस्वीर ऑनलाइन वायरल हो गई है। बाद में चाउंटे डेविस की पहचान एपस्टीन मामले के पीड़ितों में से एक के रूप में हुई।

इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाला एपस्टीन का “स्वीकारोक्ति समझौता” है। वर्ष 2005 में एक टिप प्राप्त करने के बाद, अमेरिका के फ्लोरिडा के पाम बीच पुलिस विभाग के कर्मचारियों ने 13 महीने तक अंडरकवर जांच शुरू की थी, जिसमें आखिरकार एपस्टीन के घर पर छिपे हुए कैमरे और बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों की अश्लील तस्वीरें मिलीं। लेकिन एफबीआई के अभियोग करने से ठीक एक दिन पहले, एपस्टीन ने एक गुप्त स्वीकारोक्ति समझौते पर हस्ताक्षर किया कि अमेरिकी संघीय आपराधिक आरोपों से बचने के लिए उसे बस एक यौन अपराधी के रूप में पंजीकृत करना होगा और 30 संबंधित पीड़ितों को मुआवजा देना होगा। इस “इतिहास की सबसे अपमानजनक अनुबंध दलील” ने न सिर्फ़ एपस्टीन को बचाया, बल्कि इसमें शामिल सभी ताकतवर लोगों को जवाबदेही से भी छूट दी। वर्ष 2005 में एफबीआई द्वारा टारगेट किए जाने से लेकर वर्ष 2019 में असल में गिरफ्तार होने तक, एपस्टीन 14 साल तक फरार रहा था। इस दौरान, एपस्टीन “सोशल” होता रहा, अपराध करता रहा और पैसे से चुप्पी खरीदता रहा। “न्यायिक संरक्षण” के तहत ऐसे अपराध कार्निवल ने “प्रक्रियात्मक न्याय” को शक्ति और पूंजी के बीच मिलीभगत को बहाने की तरह बनाया है।

इस ब्लैक कॉमेडी का आखिरी नतीजा यह हुआ कि अमेरिकी न्याय विभाग ने “इस मामले की जांच खत्म होने और कोई नई क्रिमिनल कार्रवाई शुरू नहीं होने” की घोषणा की। एपस्टीन (उसकी जेल में अजीब हालात में मौत हो गई थी) और उसकी सहायक अपराधी घिसलेन मैक्सवेल ( उसे 20 साल जेल की सज़ा हुई) के अलावा, नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के शक में दूसरे “ग्राहकों” पर आपराधिक अभियोजन नहीं लगेंगे। “चयनात्मक जवाबदेही” के इस नतीजे ने अमेरिका समेत पश्चिमी देशों में न्यायिक स्वतंत्रता के लिए लोगों की उम्मीदों को अचानक खत्म कर दिया है। जब अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर हमला करने के लिए एपस्टीन मामले को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया, तो अमेरिकी न्याय व्यवस्था की नाकामी सामने आ गई। अमेरिकी न्याय व्यवस्था कभी भी “मानवाधिकार सर्वप्रथम” या “प्रक्रियात्मक न्याय” की रक्षा नहीं करता, बल्कि शक्ति और पूंजी के बीच मिलीभगत के गहरे जाल की रक्षा करता है।

एपस्टीन फ़ाइलों का सार्वजनिक खुलासा अमेरिकी न्याय विभाग की तरफ से जनता को दिया गया एक “व्याख्या” लगता है, लेकिन असल में यह एक सावधानीपूर्वक व्यवस्थित प्रचार स्टंट है, जिसे जनता को गुमराह करने और असली स्थिति को छिपाने के लिए बनाया गया है। क्या 30 लाख से ज़्यादा पेज के दस्तावेज़ों में “विशाल जानकारी” सच को सामने लाने के लिए है, या उसे दबाने के लिए? जब अमेरिकी कांग्रेसियों को बहुत कम समय के लिए बहुत कम कंप्यूटर पर संबंधित दस्तावेज़ों को रिव्यू करने की अनुमति देते हैं, तो अमेरिकी सांसदों द्वारा उठाए गए शक किसी भी तरह से बेबुनियाद नहीं है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के सदस्य और शीर्ष डेमोक्रेट सांसद जेमी रस्किन ने कहा कि “यह व्यवस्था खुद ही एक कवर-अप का हिस्सा लगती है”।

बदकिस्मती से, अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है, यह संबंधित दस्तावेज़ों के खुलासे के लिये आखिरी मौका है। बाकी 25 लाख पेज के दस्तावेज़ों में छिपे राज़ शायद हमेशा के लिए फाइलिंग कैबिनेटों में दबे रह जाएंगे और कभी सामने नहीं आएंगे। ठीक एपस्टीन की मौत की तरह।

(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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