चीन के पश्चिमी हिस्से में बनी छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को दुनिया इंजीनियरिंग का एक अनोखा चमत्कार मानती है। ऊंचे पहाड़ों, जमी हुई धरती और बर्फीले इलाकों के बीच बनी यह रेलवे सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं है। आज यह लाखों लोगों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रही है। इसने दूर-दराज के गांवों को शहरों से जोड़ा है, कारोबार को नई रफ्तार दी है और स्थानीय लोगों के लिए विकास के नए रास्ते खोल दिए हैं।
इस बदलाव को समझना हो, तो छिंगहाई प्रांत की राजधानी शीनिंग का रुख करना होगा। यहां स्थित बायोटेक इंडस्ट्रियल पार्क इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि मजबूत कनेक्टिविटी किसी इलाके की तस्वीर कैसे बदल सकती है। रेलवे के आसपास करीब 10 औद्योगिक पार्क विकसित किए गए हैं, लेकिन इनमें सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला पार्क शीनिंग आर्थिक एवं तकनीकी विकास क्षेत्र का बायोटेक इंडस्ट्रियल पार्क है। रेलवे के बिल्कुल करीब होने की वजह से यह आज उद्योग, व्यापार और नई तकनीक का अहम केंद्र बन चुका है।
अब सवाल यह है कि यहां आखिर ऐसा क्या हो रहा है? दरअसल, इस पार्क की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग है। यहां तीन बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं। एक तरफ पठारी इलाकों में मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों से स्वास्थ्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ पारंपरिक तिब्बती और चीनी हर्बल चिकित्सा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है। वहीं तीसरे क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस और फंक्शनल फूड बनाए जा रहे हैं, जिनकी मांग दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है।
इसी पार्क में छिंगहाई प्योरडिया लिमिटेड जैसी कंपनी भी काम कर रही है। इस कंपनी ने खेती से लेकर अनुसंधान, उत्पादन और ब्रांडिंग तक पूरी प्रक्रिया को एक साथ जोड़ दिया है। यहां सी-बकथॉर्न, गोजी बेरी, सिस्टान्के और रोडियोला जैसी औषधीय वनस्पतियों से स्वास्थ्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन उत्पादों की मांग अब सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई देशों के बाजारों तक पहुंच चुकी है।
लेकिन यह सफलता अचानक नहीं मिली। इसके पीछे छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे की बड़ी भूमिका है। पहले सामान को बाजार तक पहुंचाने में काफी समय और खर्च लगता था। अब परिवहन तेज भी है और सस्ता भी। इसका सीधा फायदा कंपनी को तो मिला ही, साथ ही उन किसानों को भी मिला जो इन औषधीय पौधों और फलों की खेती करते हैं। पहले जिन उत्पादों की कीमत कम मिलती थी, आज वही बेहतर दाम पर बिक रहे हैं और किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
यही कहानी एक और उद्योग में भी दिखाई देती है। छिंगहाई को तिब्बती कालीनों का जन्मस्थान माना जाता है और इस परंपरा को दुनिया तक पहुंचाने का काम किया है शंगयुआन कार्पेट ग्रुप ने। कंपनी ने स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक मशीनों और अंतरराष्ट्रीय तकनीक से जोड़ा। नतीजा यह हुआ कि यहां बने कालीन आज यूरोप, अमेरिका, मध्य एशिया और मध्य पूर्व के बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
बेशक, इस सफलता के पीछे भी रेलवे की बड़ी भूमिका है। दूर-दराज के पशुपालक इलाकों से ऊन आसानी से फैक्ट्री तक पहुंच जाती है। इसके बाद तैयार कालीन बिना किसी बड़ी परेशानी के बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय रेलवे टर्मिनलों तक भेज दिए जाते हैं। इससे कारोबार तो बढ़ा ही है, साथ ही स्थानीय महिलाओं और युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार भी पैदा हुए हैं। अब उन्हें काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता।
दरअसल, बदलाव की कहानी सिर्फ इन दो कंपनियों तक सीमित नहीं है। रेलवे ने पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। उद्योग बढ़े हैं, छोटे कारोबार मजबूत हुए हैं और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। खासकर महिलाओं और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा संभावनाएं खुली हैं।
इतना ही नहीं, किसानों की जिंदगी भी बदल रही है। औषधीय जड़ी-बूटियां और दूसरे स्थानीय उत्पाद अब आधुनिक प्रोसेसिंग के बाद सीधे बड़े शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ी है और खेती पहले से कहीं ज्यादा लाभदायक बन गई है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर फैक्ट्रियां, प्रोसेसिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र विकसित होने से युवाओं का गांव छोड़कर बाहर जाने का सिलसिला भी धीरे-धीरे कम हो रहा है।
और जब रोजगार बढ़ता है, तो विकास अपने आप दिखाई देने लगता है। गांवों में सड़कें बेहतर हुई हैं, स्कूलों और क्लिनिक की सुविधाएं मजबूत हुई हैं और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहले की तुलना में कहीं आसानी से पहुंच रही हैं। यानी रेलवे ने सिर्फ माल और यात्रियों का सफर आसान नहीं किया, बल्कि पूरे इलाके के विकास को नई गति दी है।
यही वजह है कि छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे की कहानी सिर्फ लोहे की पटरियों या इंजीनियरिंग की उपलब्धि तक सीमित नहीं है। यह उन गांवों की कहानी है, जहां उम्मीदें फिर से जागी हैं। यह उन किसानों की कहानी है, जिनके स्थानीय उत्पाद अब दुनिया के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। और यह उन कारीगरों की कहानी है, जिनकी पीढ़ियों पुरानी कला को वैश्विक पहचान मिली है। साफ़ है, जब मजबूत आधारभूत ढांचा, स्थानीय संसाधन और सही अवसर एक साथ मिलते हैं, तो सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र बदल जाता है। आज छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे उसी बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी है।
(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, बीजिंग)

