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रिपोर्ट ने ‘दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट के निर्णय’ में गंभीर भ्रांतियों का किया खुलासा

The ruling of the South China Sea arbitration tribunal

The ruling of the South China Sea arbitration tribunal

दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा पर एक गोलमेज संवाद सोमवार को चीन के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और क्षेत्रों के कानूनी विशेषज्ञों, विद्वानों तथा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस संवाद के दौरान ‘दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट के निर्णय का नया खंडन’ (New Critique of the South China Sea Arbitration Award) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट ने एक बार फिर इस ‘निर्णय’ में कानूनी व्याख्या और अनुप्रयोग, तथ्यों के निर्धारण तथा साक्ष्यों के मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियों को उजागर किया है।

रिपोर्ट का उद्देश्य क्षेत्रीय और बाहरी दोनों प्रकार के संबंधित देशों को ‘निर्णय’ की वास्तविक प्रकृति और उसके हानिकारक परिणामों को स्पष्ट रूप से पहचानने में सक्षम बनाना है। यह रिपोर्ट प्रदर्शित करती है कि दक्षिण चीन सागर में अपने अधिकारों और दावों को बनाए रखने, शांति और स्थिरता की रक्षा करने तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन की रक्षा के लिए चीन का रुख – कि वह ‘निर्णय’ पर आधारित किसी भी दावे या कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा – एक न्यायसंगत और वैध कदम है।

बता दें कि इस वर्ष फिलीपींस द्वारा एकतरफा रूप से प्रस्तुत तथाकथित ‘दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट के निर्णय’ के आने के दस साल पूरे हो रहे हैं। पिछले एक दशक में इस ‘निर्णय’ की अवैधता और बेतुकापन तथा चीन-फिलीपींस संबंधों और क्षेत्रीय स्थिति पर इसके नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह स्पष्ट हो चुके हैं। 

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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