दक्षिण चीन के खूबसूरत तटीय शहर सान्या में आयोजित होने वाले 2026 एशियन बीच गेम्स केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एशिया की बदलती भू-राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिशीलता का प्रतीक बनकर उभर रहे हैं। यह आयोजन एशियाई देशों के बीच सहयोग, प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय पहचान को नई दिशा देने की क्षमता रखता है,खासतौर पर चीन और भारत जैसे दो प्रमुख देशों के लिए।
चीन के लिए सान्या में इस आयोजन की मेजबानी कई स्तरों पर रणनीतिक महत्व रखती है। चीन लंबे समय से खेल आयोजनों के माध्यम से अपनी वैश्विक छवि मजबूत करता आया है- जैसे बीजिंग ओलंपिक 2008 और बीजिंग विंटर ओलंपिक 2022। सान्या गेम्स भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं, जहां चीन खुद को एक संगठित, आधुनिक और सक्षम राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। हाईनान को चीन “फ्री ट्रेड पोर्ट”के रूप में विकसित कर रहा है। सान्या में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन न सिर्फ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करेंगे बल्कि निवेश और व्यापार को बढ़ावा देकर “स्पोर्ट्स टूरिज़्म”को भी मजबूत करेंगे।
भारत के लिए एशियन बीच गेम्स अवसर और चुनौती दोनों हैं। भारत पारंपरिक खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती में मजबूत रहा है, लेकिन बीच कबड्डी, बीच वॉलीबॉल और बीच सॉकर जैसे बीच गेम्स में अभी विकास की गुंजाइश है। यह आयोजन भारत के लिए इन खेलों में अपनी पहचान मजबूत करने का मंच है। एशियन बीच गेम्स में भारत का अच्छा प्रदर्शन न सिर्फ भारत की खेल नीति को मजबूती देगा बल्कि युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देकर उन्हे ओलंपिक जैसे बड़े मंचों की तैयारी में मदद करेगा।
एशियन बीच गेम्स जैसे आयोजन एशिया को एक साझा पहचान देने में मदद करते हैं, जहां पश्चिमी प्रभुत्व से अलग एक क्षेत्रीय खेल संस्कृति विकसित होती है। सान्या 2026 एशियन बीच गेम्स केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि चीन के लिए वैश्विक प्रस्तुति का मंच और भारत के लिए उभरते खेलों में खुद को साबित करने का अवसर है। जहां चीन इसे अपनी सॉफ्ट पावर और आर्थिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है, वहीं भारत इसे खेल प्रदर्शन और क्षेत्रीय उपस्थिति के रूप में देख रहा है। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बन सकता है कि प्रतिस्पर्धा के बीच भी सहयोग संभव है- और खेल, राजनीति से परे, देशों को जोड़ने की शक्ति रखते हैं।
(दिव्या पाण्डेय- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

