चीन में वसंत महोत्सव का मौसम चल रहा है, और पूरा देश उत्सव की लालटेन से सजा हुआ है! 17 फरवरी को पड़ने वाले घोड़े के वर्ष, यानी पारंपरिक चंद्र नव वर्ष 2026 का स्वागत करने के लिए हर कोई बेकरार है। पूरा चीन इस दौरान रोशनी से नहाया रहता है। स्प्रिंग फेस्टिवल, जिसे चीनी चंद्र नव वर्ष भी कहते हैं, के आने पर मशहूर बंगाली कवि सुभाष मुखोपाध्याय की एक विख्यात कविता की पंक्ति याद आती है: ” चाहे फूल खिलें या न खिलें/आज वसंत है!”
वाक़ई, सर्दियों की उदासी को दूर करते हुए, वसंत का स्पर्श, इस मौसम के जोशीले रंग, चीन और पश्चिम बंगाल की शाश्वत प्रकृति को और भी सुंदर बना रहे हैं। वसंत की हवा हर जगह सबके दिलों को छू रही है, लोग खुद को वसंत के रंगों से सजा रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, चीनी लोगों की अपनी अनूठी पारंपरिक संस्कृति है, जिसने कई पारंपरिक त्योहारों को जन्म दिया है। इनमें से अधिकांश आज की आधुनिक दुनिया में भी अपनी भव्यता और महत्व बनाए हुए हैं। समृद्ध सांस्कृतिक अर्थ और लंबे इतिहास के साथ, चीनी नव वर्ष दुनिया के सबसे रंगीन और उत्साहपूर्ण आयोजनों में से एक है, जो दुनिया भर में भव्य समारोहों को प्रेरित करता है।
यह कहा जा सकता है कि आज वसंत समारोह सिर्फ़ चीनियों का त्योहार नहीं रहा। चीन के दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और विदेशों में चीनी कंपनियों की बढ़ती गतिविधियों की वजह से यह एक वैश्विक उत्सव सीज़न बन गया है। वसंत समारोह का जश्न दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है, जो देश की बढ़ती सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
हैप्पी स्प्रिंग फेस्टिवल पूर्वी भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आया। 3 फरवरी, 2026 को, स्थानीय नागरिकों को कोलकाता में एक चीनी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भव्य नए साल के स्वागत समारोहों का हिस्सा बनने का मौका मिला। इस कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता स्थित चीनी महावाणिज्य दूतावास ने चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने और भारत-चीन दोस्ती को मजबूत करने के लिए किया था।
यह सच में उत्साह बढ़ाने वाली बात है कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने जीवंत वसंत समारोह 2026 का गवाह बनकर चीनी नव वर्ष और घोड़े के वर्ष का जश्न देखा, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और उत्सव की परंपराओं का संगम था। इस स्प्रिंग फेस्टिवल रिसेप्शन में भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों पर जोर दिया गया। अतिथियों ने पारंपरिक चीनी रीति-रिवाजों का अनुभव किया, जिसमें कोलकाता की धड़कन में संस्कृति की दोस्ती और विरासत को दिखाया गया, और चीन-भारत के बढ़ते राजनयिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
मुझे लगता है कि चीनी महावाणिज्य दूत शू वेई (Xu Wei) के उद्घाटन भाषण ने सबका ध्यान खींचा! उन्होंने चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि दोनों देशों के लोगों में कई साझा हित हैं, जिनमें संगीत, साहित्य और फिल्मों का प्रेम भी शामिल है। उनकी बातें वाक़ई दिल को छू गईं जब उन्होंने कहा, “जैसे गंगा और यांगत्से की धाराएं अलग-अलग बहती हुई भी अंततः मानव सभ्यता के एक ही महासागर में मिल जाती हैं, वैसे ही बौद्ध धर्म, रवींद्रनाथ, योग और चाय की हमारी साझा विरासत हमें जोड़ती है।” उनका भाषण दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। अपने मुख्य भाषण में, शू वेई ने समझाया कि नई विश्व व्यवस्था के लिए भारत-चीन संबंध क्यों सर्वोपरि हैं।
अतिथियों को त्योहारों की शुभकामनाएँ और नए साल की शुभकामनाएं देते हुए शू वेई ने कहा, “जब ड्रैगन और हाथी एक साथ कदम मिलाकर चलते हैं, तो उनका नृत्य न सिर्फ एशिया में स्थिरता और तरक्की लाता है, बल्कि हमारी साझी दुनिया के लिए एक अहम सहारा भी देता है।” अपने भाषण में उन्होंने भारत-चीन संबंधों की नई दिशा पर ज़ोर दिया।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)

