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शीनिंग: छिंगहाई-शीत्सांग पठार की दहलीज पर बसा आधुनिक शहर

Qinghai-Xiaotang Plateau

Qinghai-Xiaotang Plateau

Qinghai-Xiaotang Plateau: अगर कोई आपसे पूछे कि छिंगहाई-शीत्सांग पठार की यात्रा कहां से शुरू होती है, तो जवाब होगा, शीनिंग। चीन के छिंगहाई प्रांत की राजधानी शीनिंग को यूं ही छिंगहाई-शीत्सांग पठार का प्रवेश द्वार कहा जाता। सदियों से यह शहर लोगों, संस्कृतियों और व्यापारिक रास्तों को जोड़ता आया है। आज भी चीन के भीतरी इलाकों को शीत्सांग से जोड़ने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण परिवहन और पर्यटन केंद्र है। यही वजह है कि छिंगहाई-शीत्सांग पठार की ओर जाने वाले ज्यादातर यात्रियों का पहला पड़ाव शीनिंग ही होता है।

दरअसल, शीनिंग की यह पहचान कोई नई नहीं है। अगर इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि कभी यह शहर प्राचीन सिल्क रोड का एक अहम पड़ाव हुआ करता था। उस दौर में व्यापारियों के कारवां यहां से गुजरते थे और दूर-दूर तक सामान पहुंचाते थे। समय बदला, रास्ते बदले और परिवहन के साधन भी आधुनिक हो गए, लेकिन शीनिंग की अहमियत कभी कम नहीं हुई। आज यही शहर चीन के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी केंद्रों में शामिल है। यही नहीं, शीनिंग केवल छिंगहाई प्रांत की प्रशासनिक राजधानी भर नहीं है। इसे पूरे छिंगहाई-शीत्सांग पठार का सबसे बड़ा और प्रभावशाली शहर भी माना जाता है। राजनीति हो, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति या फिर परिवहन, हर क्षेत्र में इसकी मजबूत मौजूदगी साफ दिखाई देती है। इसलिए पश्चिमी चीन के विकास की चर्चा शीनिंग के बिना अधूरी मानी जाती है।

अगर इसके भूगोल की बात करें तो शीनिंग की अपनी अलग खासियत है। यह शहर ह्वांगशुई नदी की घाटी में बसा है, जो ह्वांगहो यानी येलो रिवर की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है। समुद्र तल से लगभग 2,200 मीटर की ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम सालभर अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना बना रहता है। यही वजह है कि यहां पहुंचते ही वातावरण में एक अलग तरह की ताजगी महसूस होती है। लेकिन शीनिंग की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। करीब 24 लाख की आबादी वाला यह शहर अपनी बहु-सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहां हान चीनी समुदाय के साथ-साथ हुई मुस्लिम, तिब्बती, सालार और थु समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं। यही विविधता इस शहर को खास बनाती है। यहां एक ओर मस्जिदें दिखाई देती हैं, तो दूसरी ओर बौद्ध मठ नजर आते हैं। वहीं पारंपरिक चीनी स्थापत्य कला भी हर कदम पर अपनी अलग छाप छोड़ती है।

शहर की सड़कों पर निकलते ही यह एहसास और गहरा हो जाता है। एक तरफ चौड़ी और आधुनिक सड़कें हैं, ऊंची इमारतें हैं, तो दूसरी तरफ पुराने बाजार और पारंपरिक जीवन की झलक भी दिखाई देती है। ऐसा लगता है जैसे शीनिंग ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोकर रखा है और साथ ही आधुनिक विकास को भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनाया है। शायद यही संतुलन इसे दूसरे शहरों से अलग पहचान देता है। अब अगर अर्थव्यवस्था की बात करें तो यहां भी शीनिंग तेजी से आगे बढ़ता दिखाई देता है। ऊन, वस्त्र उद्योग, डेयरी उत्पाद और नमक उद्योग लंबे समय से यहां की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रहे हैं। छिंगहाई पशुपालन और ऊन उत्पादन के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहा है। अब इन पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक, नए निवेश और बेहतर प्रबंधन के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल रही है।

इसी विकास यात्रा को चीन की बेल्ट एंड रोड पहल ने भी नई दिशा दी है। आज शीनिंग से चलने वाली अंतरराष्ट्रीय मालगाड़ियां दुनिया के 70 से अधिक देशों तक सामान पहुंचा रही हैं। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि शीनिंग अब केवल एक क्षेत्रीय शहर नहीं रहा, बल्कि वैश्विक व्यापार नेटवर्क का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अगर परिवहन की बात करें तो शीनिंग की सबसे बड़ी ताकत उसकी बेहतरीन कनेक्टिविटी है। यहां का हवाई अड्डा पेइचिंग, शांगहाई, क्वांगचो सहित चीन के लगभग सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। लेकिन शीनिंग की असली पहचान छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे से बनी। इसी शहर से होकर गुजरने वाली इस ऐतिहासिक रेल लाइन ने आधुनिक रेल नेटवर्क को तिब्बती पठार तक पहुंचाया। यही कारण है कि ल्हासा जाने वाली अधिकांश ट्रेनें शीनिंग से होकर गुजरती हैं और यह शहर यात्रियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट हब बन गया है।

अब अगर पर्यटन की बात करें तो शीनिंग का आकर्षण और भी बढ़ जाता है। यहां सिर्फ एक आधुनिक शहर नहीं, बल्कि प्रकृति, अध्यात्म, तिब्बती संस्कृति और ऊंचे पठारों की जीवनशैली का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यही वजह है कि हर साल लाखों देसी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में रोड ट्रिप, बाइकिंग और हाई एल्टीट्यूड एडवेंचर का शौक भी तेजी से बढ़ा है। कई पर्यटक तो केवल छिंगहाई-शीत्सांग राजमार्ग पर सफर करने का रोमांच महसूस करने के लिए ही शीनिंग आते हैं। मेरी नज़र में शीनिंग केवल एक शहर नहीं है। यह वह पुल है जो अतीत को भविष्य से जोड़ता है। यहां इतिहास की विरासत भी जीवित है और आधुनिक विकास की रफ्तार भी साफ दिखाई देती है। शायद यही वजह है कि जो भी छिंगहाई-शीत्सांग पठार की यात्रा पर निकलता है, उसकी कहानी की शुरुआत अक्सर शीनिंग से ही होती है।

(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, बीजिंग)

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