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शून्य टैरिफ से सुनहरा भविष्य: चीन-अफ्रीका मैत्री

Zero Tariffs to a Bright Future: China-Africa Friendship

Zero Tariffs to a Bright Future: China-Africa Friendship

अक्टूबर 2000 में पेइचिंग में चीन-अफ्रीका सहयोग मंच (FOCAC) की स्थापना के बाद से चीन और अफ्रीका के बीच मित्रता का रिश्ता लगातार प्रगाढ़ होता रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 11 जून को चीन-अफ्रीका सहयोग मंच के अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने बधाई संदेश में घोषणा की थी कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों की 100% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क नीति लागू की जाएगी।

1 मई 2026 को चीन द्वारा इस नीति के क्रियान्वयन के साथ, एस्वातिनी (Eswatini) को छोड़कर सभी 53 अफ्रीकी देशों के लिए यह लागू हो गई। यह कदम आर्थिक कूटनीति का एक कुशल दाँव है। इन अफ्रीकी देशों के आयात पर शुल्क हटाकर चीन न केवल व्यापार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि खुद को दक्षिण-दक्षिण सहयोग के सबसे भरोसेमंद सहयोगी के रूप में भी स्थापित कर रहा है। दक्षिण अफ्रीका के व्यापार, उद्योग और प्रतिस्पर्धा मंत्री पार्क्स टाउ (Parks Tau) ने 1 मई को चीन की शून्य-शुल्क नीति की सराहना की, जो उसके साथ राजनयिक संबंध रखने वाले सभी अफ्रीकी देशों से आयात पर लागू होती है। उन्होंने कहा कि यह योजना दक्षिण अफ्रीकी निर्यातकों को “दुनिया के सबसे बड़े और सबसे गतिशील उपभोक्ता बाज़ारों में से एक में विस्तार का सार्थक अवसर” प्रदान करती है।

यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका दक्षिण अफ्रीका, लीबिया और अंगोला समेत कई अफ्रीकी देशों पर नए शुल्क लगा रहा है। यह सिर्फ व्यापार नीति नहीं, बल्कि रणनीतिक विश्वास-निर्माण है। शून्य-शुल्क पहुँच अफ्रीकी निर्यातकों को स्थिरता और बाज़ार का विस्तार देती है, और यह संकेत भी देती है कि चीन अफ्रीका को केवल संसाधनों का स्रोत नहीं, बल्कि साझा विकास में बराबर का भागीदार मानता है। यदि यह नीति निरंतर बनी रही, तो यह आपूर्ति शृंखलाओं का स्वरूप बदल सकती है और केवल सहायता या ऋण से कहीं आगे जाकर जन-जन के संबंधों को गहरा कर सकती है।

शून्य-शुल्क नीति का अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। इस कदम से दक्षिण अफ्रीका की वाइन और सिट्रस फलों के निर्यात को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। यह नीति अन्य अफ्रीकी देशों के लिए भी नए द्वार खोलेगी, जिससे वे अपने निर्यात में विविधता ला सकेंगे और पारंपरिक बाज़ारों पर निर्भरता घटा सकेंगे। घाना और कोटे डी आइवर का कोको, केन्या की कॉफी और एवोकाडो, तथा दक्षिण अफ्रीका के टैंजेरीन- ये कुछ ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें चीनी बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

लेसोथो नेशनल यूनिवर्सिटी (National University of Lesotho) के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. लेसेको माखेथा  (Leseko Makhetha ) ने शिन्हुआ से साक्षात्कार में सटीक कहा, “एकपक्षवाद और संरक्षणवाद के माहौल में, चीन की शून्य-शुल्क नीति व्यापार की मजबूती बढ़ाती है, अफ्रीकी निर्यात में विविधता लाने में सहायक है, और बाहरी झटकों से बचाकर विकास की संभावनाओं को सुरक्षित रखती है।” अफ्रीका को लेकर चीन का दृष्टिकोण अमेरिका के संरक्षणवादी रुख के एकदम विपरीत है। जहाँ अमेरिका शुल्क और दबाव की नीति अपना रहा है, वहीं चीन अपने अफ्रीकी साझेदारों को सहयोग का हाथ बढ़ा रहा है। यह अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि चीन चीन-अफ्रीका सहयोग मंच (FOCAC) के प्रति प्रतिबद्ध है और अफ्रीका के साथ साझा भविष्य के अपने दृष्टिकोण पर कायम है।

चीन और अफ्रीका के बीच व्यापार की वृद्धि वाकई उल्लेखनीय है। 2025 में चीन-अफ्रीका व्यापार सालाना 17.7% बढ़कर 348.1  अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें अफ्रीका से चीन को निर्यात 123 अरब डॉलर से अधिक रहा। यह आँकड़ा चीन-अफ्रीका साझेदारी की मज़बूती का प्रमाण है। इसके साथ ही, अफ्रीकी महाद्वीप में चीन का प्रत्यक्ष निवेश भी तेज़ी से बढ़ा है। 2023 के अंत तक अफ्रीका में चीन के प्रत्यक्ष निवेश का कुल स्टॉक 40 अरब डॉलर से अधिक हो चुका था। चीन लगातार 17वें वर्ष अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, और 2025 में चीन-अफ्रीका व्यापार 348.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।

“चीन की शून्य-शुल्क नीति अफ्रीकी देशों के लिए अपने निर्यात बढ़ाने और औद्योगिकीकरण को गति देने का सुनहरा अवसर है,” कैमरून के कोको किसान जॉर्ज वाम्बो कॉर्न्यू (George Wambo Cornyu ) कहते हैं। शून्य-शुल्क नीति से केन्या से चीन को एवोकाडो तेल के निर्यात में भी वृद्धि की उम्मीद है। केन्या में कार्यरत चीनी कंपनी सैनमार्क लिमिटेड के ऑपरेशंस मैनेजर मुहम्मद खान (Muhammad Khan ) का मानना है कि यह नीति व्यापार और निवेश के नए अवसर सृजित करेगी।

संरक्षणवाद और व्यापार युद्धों के दौर में चीन की शून्य-शुल्क नीति एक सामयिक स्थिरीकरण है। अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ के शब्दों में, “वैश्विक अनिश्चितताओं का सबसे बड़ा खामियाजा अफ्रीका भुगत रहा है — ऐसे में चीन की पहल बेहद अहम है।” निष्कर्षतः चीन अफ्रीकी देशों और अन्य तीसरी दुनिया के देशों का भरोसेमंद समर्थक और विश्वसनीय साझेदार है। चीन की शून्य-शुल्क नीति अफ्रीका के आधुनिकीकरण अभियान के लिए आशा की किरण है। यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग की ताकत का प्रमाण है ।

दुनिया देख रही है कि चीन और अफ्रीका अपनी साझेदारी का नया अध्याय लिख रहे हैं — एक ऐसा अध्याय जो अफ्रीका और उससे परे लाखों लोगों के लिए उज्ज्वल भविष्य का वादा करता है। शून्य-शुल्क नीति भी इसी दिशा में एक कदम है। चीन-अफ्रीका व्यापार सहयोग अब व्यापक और अधिक ठोस आधार पर आगे बढ़ रहा है, जो चीन और अफ्रीका दोनों के लिए, तथा एक अधिक खुली और समावेशी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। 

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)  (लेखक— रविशंकर बसु)

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