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चीन की डिजिटल क्रांति: भविष्य की झलक या नई व्यवस्था?

China's Digital Revolution

China's Digital Revolution

इंटरनेशनल डेस्क: क्या आप सोच सकते हैं कि आप घर से बिना बटुआ लिए निकलें और फिर भी पूरा दिन आराम से गुजर जाए? भारत में UPI ने हमें यह आदत सिखाई है। लेकिन चीन में यह कोई नई बात नहीं, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सच कहें तो चीन आज उस दौर में जी रहा है, जहां कैश, कार्ड और काउंटर पीछे छूट चुके हैं। पिछले कुछ सालों में चीन ने खुद को जिस तेजी से बदला है, वह किसी टेक शो से कम नहीं लगता। एक समय था जब चीन को दुनिया की ‘फैक्ट्री’ कहा जाता था, जहां सस्ते खिलौने और कपड़े बनते थे। लेकिन आज चीन दुनिया की डिजिटल लैब बन चुका है। वहां की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी इतनी तेज और दिलचस्प है कि इसे समझना भविष्य में झांकने जैसा लगता है।

चीन की इस कहानी की शुरुआत “सुपर ऐप्स” से होती है। अगर आपके फोन में WeChat नहीं है, तो मान लीजिए आप चीन में हैं ही नहीं। दूसरे देशों में अलग-अलग काम के लिए अलग ऐप होते हैं, लेकिन चीन में एक ही ऐप सब कुछ करता है- मैसेज करना, कॉल करना, टैक्सी बुलाना, बिल भरना, खाना ऑर्डर करना, यहां तक कि सरकारी काम भी। लोगों की ज़िंदगी सचमुच मोबाइल स्क्रीन के भीतर सिमट गई है। सुविधा इतनी ज्यादा है कि अब बिना ऐप के काम करना वहां अजीब लगता है।

अब बात कैशलेस सोसाइटी की। चीन में नकद पैसे लगभग गायब हो चुके हैं। मॉल हो या सड़क किनारे ठेला, हर जगह QR कोड मिल जाएगा। लोग मोबाइल निकालते हैं, स्कैन करते हैं और पेमेंट हो जाता है। अगर आप कैश देने की कोशिश करें, तो दुकानदार आपको ऐसे देखेगा जैसे आप किसी पुरानी दुनिया से आए हों।

शॉपिंग का तरीका भी पूरी तरह बदल चुका है। चीन में ऑनलाइन खरीदारी अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मनोरंजन बन चुकी है। लाइव-स्ट्रीम शॉपिंग वहां बेहद लोकप्रिय है। लोग अपने पसंदीदा एंकर या इंफ्लुएंसर को लाइव देखते हैं और उसी समय सामान खरीद लेते हैं। ऑर्डर सुबह किया और शाम तक डिलीवरी। इतनी तेज रफ्तार कि कई देशों के कूरियर सिस्टम पीछे छूट जाएं। इसने पारंपरिक बाजार की परिभाषा ही बदल दी है।

अब आते हैं AI और स्मार्ट सिटीज पर। चीन के कई शहर ऐसे लगते हैं जैसे वे भविष्य में पहुंच चुके हों। फेशियल रिकग्निशन अब आम बात है। मेट्रो में टिकट दिखाने की जरूरत नहीं, बस कैमरे की ओर देखिए और गेट खुल जाएगा। ट्रैफिक कंट्रोल में भी AI का इस्तेमाल होता है, जिससे जाम कम करने में मदद मिलती है। हां, प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं, और उठने भी चाहिए। लेकिन चीन में लोगों ने सुविधा और सुरक्षा के बदले इस सिस्टम को काफी हद तक स्वीकार कर लिया है।

हालांकि, इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। डिजिटल रफ्तार के इस दौर में बुजुर्ग कहीं न कहीं पीछे छूट गए हैं। जो लोग स्मार्टफोन या ऐप्स के साथ सहज नहीं हैं, उनके लिए रोजमर्रा के काम मुश्किल हो गए हैं। टैक्सी हाथ देकर नहीं रुकती और कई दुकानों पर कैश स्वीकार नहीं किया जाता। इस समस्या को समझते हुए अब चीन में बुजुर्गों के लिए आसान ऐप्स बनाए जा रहे हैं। यह याद दिलाता है कि तकनीक जितनी तेज हो, इंसान को साथ लेकर चलना उतना ही जरूरी है।

चीन का इनोवेशन सिर्फ मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं है। बिना ड्राइवर वाली टैक्सियां, रोबोट वेटर, 5G नेटवर्क और ड्रोन डिलीवरी अब आम होते जा रहे हैं। गांवों तक तेज इंटरनेट पहुंच चुका है और किसान अपनी फसल सीधे ऑनलाइन बेच रहे हैं। यह डिजिटल विकास का एक अलग, लेकिन प्रभावशाली मॉडल पेश करता है।

आखिर में एक सीधी बात। चीन की डिजिटल क्रांति सिर्फ तकनीक की कहानी नहीं है, बल्कि सोच, आदत और सिस्टम के बदलाव की कहानी है। आने वाले पांच सालों में इसका असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में दिखाई देगा। चीन ने यह दिखाया है कि अगर सरकार, कंपनियां और लोग एक दिशा में काम करें, तो इतना बड़ा देश भी तेजी से डिजिटल बन सकता है। आप इससे सहमत हों या आलोचना करें, लेकिन इसे नजरअंदाज करना मुश्किल है।

आने वाले वर्षों में AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ड्रोन इकोनॉमी और स्पेस सेक्टर में चीन की रफ्तार और तेज होने वाली है। वैश्विक टेक रेस में चीन अब सिर्फ हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़ा खिलाड़ी बन चुका है। साफ है कि चीन की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सभ्यता के नए मोड़ का संकेत है एक ऐसा प्रयोग, जो पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि भविष्य आखिर कैसा होगा।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप (CGTN हिन्दी), बीजिंग)

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