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वैश्विक चुनौतियों के बीच चीन की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और सकारात्मक संकेत

China's Economy Amidst Global Challenges

China's Economy Amidst Global Challenges

इंटरनेशनल डेस्क: चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा 16 अप्रैल, 2026 को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि चीन की अर्थव्यवस्था ने वर्ष की ठोस शुरुआत की है, और पहली तिमाही के प्रमुख संकेतक जटिल बाहरी और आंतरिक दबावों के बावजूद स्थिर और सकारात्मक विकास दर्शा रहे हैं। यह आंकड़े न केवल चीन की आंतरिक आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था ने 2026 की पहली तिमाही में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो कुछ विदेशी संस्थानों की अपेक्षाओं से कहीं अधिक है और तेजी से अस्थिर होती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक स्थिर शक्ति के रूप में देश की भूमिका को और मजबूत करती है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने इस अवधि के दौरान 33.4 ट्रिलियन युआन (लगभग 4.87 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) का उत्पादन किया, जो 2025 की चौथी तिमाही की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। यह परिणाम चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2026-2030) की मजबूत शुरुआत का संकेत देता है।

2026 की पहली तिमाही के प्रमुख आर्थिक पहलू:

जीडीपी वृद्धि: चीन की जीडीपी में पहली तिमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 5.0% की वृद्धि हुई, जो लगभग 33.42 ट्रिलियन युआन (4.87 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच गई। 2025 की चौथी तिमाही की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक की यह वृद्धि कई विश्लेषकों की अपेक्षाओं से अधिक रही और 2026 के 4.5% से 5.0% के लक्ष्य सीमा के ऊपरी सिरे पर है।

औद्योगिक उत्पादन: निर्धारित आकार से ऊपर के औद्योगिक उद्यमों के मूल्यवर्धन में पिछले वर्ष की तुलना में 6.1% की वृद्धि हुई, जिसमें उच्च-तकनीकी विनिर्माण ने मजबूत दृढ़ता दिखाई।

सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 5.2% की वृद्धि हुई, जो इसकी रिकवरी को जारी रखते हुए, विशेष रूप से आधुनिक सेवाओं में, मजबूत गति प्रदर्शित करती है।

बाजार बिक्री और उपभोग: उपभोक्ता वस्तुओं की कुल खुदरा बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 2.4% की वृद्धि हुई, जो उपभोक्ता वस्तुओं के ट्रेड-इन कार्यक्रमों के कारण 2025 के अंत की तुलना में तेज गति दर्शाती है।

विदेशी व्यापार: निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, डॉलर के संदर्भ में 14.7% (युआन के संदर्भ में 11.9%) की वृद्धि हुई, जो मजबूत स्थिरता और व्यापार संरचनाओं के अनुकूलन को दर्शाती है।

रोजगार और कीमतें: सर्वेक्षण किए गए शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर औसतन 5.3% रही, जो स्थिर बनी हुई है, जबकि उपभोक्ता कीमतों में मामूली वृद्धि देखी गई, जो घरेलू मांग में सुधार का संकेत देती है।

हाल के महीनों में जारी प्रारंभिक संकेतक जैसे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि, सेवा क्षेत्र का विस्तार, खुदरा बिक्री में तेजी और निर्यात में सुधार यह दर्शाते हैं कि चीन सरकार की नीतियों का सकारात्मक असर हो रहा है। कोविड के बाद की रिकवरी अब एक संतुलित और टिकाऊ विकास चरण में प्रवेश कर चुकी है।

विशेष रूप से, विनिर्माण क्षेत्र में निवेश, हरित ऊर्जा और उच्च तकनीक उद्योगों में हो रही प्रगति चीन के आर्थिक संरचनात्मक सुधारों को दर्शाती है। बेरोजगारी दर में कमी और शहरी आय में स्थिर वृद्धि ने घरेलू मांग को मजबूत किया है। वहीं, मुद्रास्फीति नियंत्रण में होने से नीति निर्माताओं के पास अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की गुंजाइश बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने भी चीन के जीडीपी विकास अनुमान को संशोधित करते हुए कहा है कि चीन वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से खड़ा है। चीन का आर्थिक मॉडल जिसमें घरेलू खपत, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर है आने वाले वर्षों में भी स्थिरता प्रदान कर सकता है।

चीन की अर्थव्यवस्था ने इस तिमाही में संतुलित वृद्धि दर्ज की है। औद्योगिक उत्पादन, निर्यात और उपभोक्ता मांग में सुधार देखा गया है। विशेष रूप से हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से विस्तार हुआ है, जो चीन के दीर्घकालिक विकास मॉडल की दिशा को स्पष्ट करता है।

सरकार की नीतिगत समर्थन, जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश और घरेलू खपत को बढ़ावा देने के प्रयास, इस सकारात्मक प्रवृत्ति के पीछे प्रमुख कारण रहे हैं। साथ ही, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था का यह स्थिर और सकारात्मक प्रदर्शन आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा, क्योंकि उनका प्रभाव निरंतर बना हुआ है। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के संदर्भ में, स्थिरता चीन के लिए एक ठोस “लाभ” बन गई है। चीन की मजबूत ऊर्जा आपूर्ति, समृद्ध प्रतिभा भंडार और उन्नत विनिर्माण जैसी प्रमुख शक्तियों की पहचान की, जो मिलकर तकनीकी नवाचार में प्रगति का कारण बनती हैं।

चीन के पास अब विकास के कई स्तंभ हैं। उपभोग, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में उन्नयन ने देश को वैश्विक जोखिमों का सामना करने में सक्षम बनाया है।

अंततः, ताजा आर्थिक आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि चीन न केवल चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि उन्हें अवसरों में बदलते हुए स्थिर और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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