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चीन की अर्थव्यवस्था – स्थिरता से गुणवत्ता की ओर

चीन की अर्थव्यवस्था वर्तमान समय में चुनौतियों और अवसरों के संगम से गुजर रही है, जहाँ नवाचार (इनोवेशन) और नई विकास ड्राइवरों ने इसकी गति को नई ऊर्जा प्रदान की है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में चीन ने लगभग 5.3 प्रतिशत की विकास दर हासिल की, जो वैश्विक अस्थिरताओं के बीच भी एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। हालाँकि हाल के आँकड़े बताते हैं कि अगस्त माह में औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री अपेक्षाओं से कम रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आंतरिक मांग और निर्यात पर दबाव बना हुआ है।

 

चीन की अर्थव्यवस्था में ‘न्यू क्वालिटी प्रोडक्टिव फोर्सेज‘ (नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों) का विकास तेजी से हो रहा है। यह अवधारणा उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा, नई ऊर्जा वाहनों, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योगों को संदर्भित करती है। इन क्षेत्रों में निवेश और अनुसंधान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, नई ऊर्जा वाहन (NEV) और सोलर सेल उत्पादन में चीन दुनिया का अग्रणी निर्माता बना हुआ है।

 

चीनी अर्थव्यवस्था ने  पहली दो तिमाहियों में सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप एक स्थिर विकास दर बनाए रखी है। विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और सेवा क्षेत्र में उपभोक्ता खर्च में वृद्धि ने इस प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार की ओर से ढाँचागत सुधारों और बाजार-अनुकूल नीतियों ने इस स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू खपत (domestic consumption) ही निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा सहारा बनेगी। सरकार ने छोटे कारोबारियों और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई है। इसके साथ ही आय असमानताओं को कम करने और सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।

 

वैश्विक व्यापार तनाव, विशेषकर अमेरिका और यूरोप के साथ, चीनी निर्यात पर असर डाल रहे हैं। हाल ही में टैरिफ अवरोधों (tariff barriers) में वृद्धि देखी गई है, जिससे विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा कठिन होती जा रही है। इसके अलावा, रियल एस्टेट क्षेत्र में गिरावट और युवा रोजगार दर पर दबाव घरेलू अर्थव्यवस्था की कमजोर कड़ी मानी जा रही है।

 

चीन की अर्थव्यवस्था के पास अब भी कई ताकतें हैं —

 

 

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन का ध्यान केवल “गति”पर नहीं बल्कि “गुणवत्ता”पर होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि उपभोक्ता विश्वास को मजबूत किया गया, रोजगार सृजन पर बल दिया गया और हरित व तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाया गया, तो चीन न केवल अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा का संचार करेगा। भविष्य के लिए दृष्टिकोण आशावादी बना हुआ है। चीन सरकार नवाचार और तकनीकी स्वतंत्रता पर जोर देकर नई उत्पादक शक्तियों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों से बाजार की गतिशीलता में और वृद्धि होने की उम्मीद है। ये सभी कारक मिलकर अर्थव्यवस्था के स्थिर संचालन और विकास की गुणवत्ता में सुधार को मजबूत समर्थन देंगे।  यदि वह उपभोक्ता विश्वास को पुनर्स्थापित कर सके और हरित व तकनीकी नवाचार को मजबूती दे सके, तो यह केवल चीन ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई ऊर्जा का स्रोत साबित होगा।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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