
चीन के थ्येनचिन शहर में 31 अगस्त से शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। ये सम्मेलन दो दिन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा। इसमें दुनिया के कई बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं। भारत के PM नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के दिग्गज थ्येनचिन पहुंच चुके हैं।
2018 के बाद PM मोदी का चीन दौरा
भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी 30 अगस्त को थ्येनचिन पहुंचे जो 2018 के बाद उनका पहला चीन दौरा है। पीएम मोदी ने पहुंचते ही उन्होंने एक्स पर लिखा कि SCO सम्मेलन और नेताओं से मिलने का इंतजार है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की जिसमें दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा हुई।दोनों नेताओं की मुलाकात में PM मोदी ने शी चिनफिंग को उनके गर्मजोशी से स्वागत के लिए शुक्रिया किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल कजान में हमारी बातचीत ने हमारे रिश्तों को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि हमारे सहयोग से 2 अरब 80 करोड़ लोगों का भला जुड़ा है और हम इसे और मजबूत करेंगे। इस दौरान शी चिनफिंग ने कहा कि चीन और भारत प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दुनिया के सबसे आबादी वाले देश हैं और ग्लोबल साउथ के अहम हिस्से हैं। हमें अपने लोगों की भलाई, विकासशील देशों की एकता और मानवता की प्रगति के लिए जिम्मेदारी निभानी है। हमें पड़ोसी, साझेदार और दोस्त बनना चाहिए।
SCO की शुरुआत 2001 में हुई थी।जब चीन,रूस,कजाकिस्तान,किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने इसे बनाया। वक्त के साथ 2017 में भारत-पाकिस्तान, 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस जुड़े तो ये 10 देशों का ग्रुप बन गया। ये देश मिलकर दुनिया की 40% आबादी का नेतृत्व करते हैं।
AI सेंटर बनाने का न्योता
चीन ने शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) के देशों को एक खास ऑफर दिया है। वह चाहता है कि सभी SCO सदस्य देश मिलकर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एप्लिकेशन कोऑपरेशन सेंटर बनाएं। ये प्लान हाल ही में हुए 2025 चाइना-शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन फोरम में लॉन्च किया गया है जहां चाइना-SCO नेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप्लिकेशन कोऑपरेशन सेंटर कंस्ट्रक्शन प्लान को पेश किया गया।
क्या है ये पूरा प्लान?
चीन का कहना है कि SCO के सभी देश साथ मिलकर एक खास सेंटर बनाएंगे। ये सेंटर AI टेक्नोलॉजी को और बेहतर करने और उसे अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करने के लिए होगा।फोरम में पेश किए गए प्लान के मुताबिक ये सेंटर एक ऐसा हब बनेगा जहां ये देश मिलकर AI के नए-नए प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।इसका मकसद है कि AI को हर किसी के लिए फायदेमंद बनाया जाए,चाहे वो हेल्थकेयर हो,एजुकेशन हो या फिर इकोनॉमी को बढ़ावा देना।ये प्लान इसी साल से शुरू होने वाला है और इसका असर आने वाले सालों में दिखेगा।
क्या फायदा होगा SCO देशों को?
अगर ये प्लान सफल होता है तो SCO के देशों के लिए कई फायदे हो सकते हैं। सबसे पहले छोटे देशों को AI टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट बनने का मौका मिलेगा जो उनके लिए नई जॉब्स और इकोनॉमिक ग्रोथ ला सकता है। उदाहरण के लिए अगर भारत इसमें शामिल होता है तो हम अपनी हेल्थकेयर सिस्टम को AI से और मजबूत कर सकते हैं-जैसे मरीजों की सही डायग्नोसिस या ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करना।रूस जो पहले से ही टेक में आगे है।इस सेंटर के जरिए अपनी AI स्किल्स को और शार्प कर सकता है। हर देश को भी मौका मिलेगा कि वो दूसरों से सीखकर अपने यहां प्रोग्रेस करें। साथ ही ये सेंटर डेटा शेयरिंग और रिसर्च को बढ़ावा देगा, जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिल सकता है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)
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