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प्रदूषण से निपटने में चीन का अनुभव भारत के आ सकता है काम 

अक्टूबर 2025 से भारत की राजधानी दिल्ली घने धुंध और प्रदूषण में डूबी हुई है, कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 से अधिक हो गया है और कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर 373 तक पहुंच चुका है। यह दृश्य एक दशक से भी ज़्यादा पहले, चीन की राजधानी पेइचिंग की याद दिलाता है। 2013 में, पेइचिंग में केवल 41 दिन ही ऐसे थे जब वायु गुणवत्ता उत्कृष्ट (स्तर 1) थी, PM2.5 का स्तर अक्सर अधिकतम स्वीकार्य सीमा से ज़्यादा रहा था, और धुंध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था। आज, “पेइचिंग ब्लू” आसमान आम बात हो गई है।

आंकड़े बताते हैं कि चीन ने सिर्फ़ सात सालों (2013-2020) में पीएम 2.5 में उतना सुधार हासिल कर लिया जितना अमेरिका ने 30 सालों (1970-2000) में किया था। धुंध से निपटने में यह उपलब्धि दिल्ली जैसे शहरों के लिए, जो प्रदूषण की गहरी खाई में फंसे हुए हैं, बहुमूल्य अनुभव प्रदान करती है। चीन के नीले आकाश के चमत्कार की शुरुआत शीर्ष-स्तरीय डिज़ाइन के वैज्ञानिक मार्गदर्शन से हुई। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ अमूल्य संपत्ति हैं” की अवधारणा ने विकास और पर्यावरण संरक्षण को परस्पर विरोधी शक्तियों के रूप में देखने की धारणा को मौलिक रूप से उलट दिया है। “वायु प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण कार्य योजना” 2013 में शुरू की गई थी, जिसने धुंध से निपटने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की।

ऊर्जा संरचना में बदलाव चीन में धुंध से निपटने का एक प्रमुख तरीका है। उत्तरी चीन, जो पहले हीटिंग और औद्योगिक उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भर था, अब स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। चीन की कोयला खपत में हिस्सेदारी 2014 के 65.6 फीसदी से घटकर 2024 में 53.2 फीसदी तक पहुंची, जबकि गैर-जीवाश्म ऊर्जा खपत में हिस्सेदारी 2014 के 11.2 प्रतिशत से बढ़कर 19.8 प्रतिशत तक पहुंच गयी। चीन की पवन और सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गई है, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थापित हो गई है।  तकनीकी सशक्तिकरण और जनभागीदारी ने प्रदूषण नियंत्रण में उपलब्धियों को लगातार मज़बूत किया है।

चीन ने एक राष्ट्रव्यापी वायु निगरानी नेटवर्क स्थापित किया है, जिससे कॉर्पोरेट उत्सर्जन पर ऑनलाइन नज़र रखना संभव हो गया है, साथ ही कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। नई ऊर्जा उद्योग श्रृंखला की परिपक्वता ने धुंध नियंत्रण की लागत को और कम कर दिया है। चीन दुनिया के 80 फीसदी से ज़्यादा फोटोवोल्टिक मॉड्यूल और 70 फीसदी पवन ऊर्जा उपकरणों की आपूर्ति करता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को व्यापक रूप से अपनाना संभव हो गया है। इसके अलावा, बेहतर सार्वजनिक निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र हर नागरिक को धुंध नियंत्रण में भाग लेने का अवसर देते हैं, जिससे पूरे समाज में साझा शासन का एक सकारात्मक माहौल बनता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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