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भारतीय फिल्म निर्माताओं के लिए चीन के फिल्म उद्योग में अपार संभावनाएं: प्रसाद शेट्टी

चीन की वाणिज्यिक राजधानी शांगहाई में इन दिनों 27वां शांगहाई इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल चल रहा है। यह एक प्रतिष्ठित वैश्विक मंच है जो दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं और सिनेमा प्रेमियों को एक साथ लाता है। इस वर्ष के फिल्म महोत्सव में, सीजीटीएन की पत्रकार दिव्या पाण्डेय ने प्रसाद शेट्टी से बातचीत की, जो एक प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता हैं और पिछले दो दशकों से चीन और भारत के बीच फिल्म उद्योग में कार्यरत हैं। जिन्होने भारत और चीन की संस्कृतियों की गहरी समझ के साथ, भारतीय और चीनी फिल्म निर्माताओं के बीच cross cultural समझ और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस बातचीत में, प्रसाद शेट्टी ने अपनी फिल्म निर्माण यात्रा, प्रेरणाओं, और चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं के बारे में बात की। प्रसाद पिछले दस वर्षों से शांगहाई फिल्म फेस्टिवल में भाग ले रहे हैं उनका मानना है कि यह फेस्टिवल वैश्विक प्रतिभाओं को खुला मंच प्रदान करता है जिससे प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलता है।

पिछले सालों की तुलना में हुए बदलावों की चर्चा में वे कहते हैं कि दर्शकों की पसंद समय के साथ बदली है और फिल्म निर्माण की शैलियों में भी परिवर्तन आया है। चीनी दर्शक भारतीय सिनेमा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानने में रुचि रखते हैं। बॉलीवुड की फिल्में चीनी दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं, खासकर उनकी संगीत, दिल को छू लेने वाली कहानियों के कारण। भारतीय सिनेमा में सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाई जाती हैं, जो चीनी दर्शकों को भारतीय समाज और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती हैं। चीनी दर्शक भारतीय फिल्मों की कथाओं और पात्रों में रुचि रखते हैं, खासकर यदि वे उनकी अपनी संस्कृति और परंपराओं से मेल खाते हैं। भारतीय फिल्म निर्माण की तकनीक और विशेष प्रभाव भी चीनी दर्शकों को प्रभावित करते हैं।

चीनी और भारतीय फिल्म बाजारों में समानताओं के बारे में बात करते हुए प्रसाद कहते हैं कि दोनों देशों में बड़े दर्शक वर्ग हैं जो फिल्में देखना पसंद करते हैं। भारत और चीन का फिल्म उद्योग विविधता से भरा है, जिसमें विभिन्न शैलियों और भाषाओं की फिल्में बनाई जाती हैं, साथ ही दोनों देशों में फिल्म निर्माण की दर बढ़ रही है,और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि दोनों देशों की फिल्में वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शित की जा रही हैं।

भारत और चीन के फिल्म उद्योगों के बीच गहरे सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाओं पर प्रसाद का मानना है कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने से फिल्म उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है और भारतीय और चीनी फिल्म निर्माताओं के बीच सहयोग से नए और रचनात्मक कार्यों का निर्माण हो सकता है। दोनों देशों के फिल्म उद्योगों के बीच सहयोग से वैश्विक स्तर पर पहुंच बढ़ सकती है और नए दर्शकों तक पहुंचा जा सकता है। प्रसाद शेट्टी ने फिल्मों में सामाजिक मुद्दों को उठाने के महत्व और दर्शकों के साथ जुड़ने के तरीकों पर भी चर्चा की।

शांगहाई इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में प्रसाद शेट्टी से बातचीत उनके फिल्म निर्माण की दुनिया में एक झलक देखने का अवसर देती है। हमें उम्मीद है कि उनकी भविष्य की परियोजनाएं दर्शकों को प्रभावित करेंगी और फिल्म उद्योग में नए मानक स्थापित करेंगी।

(दिव्या पाण्‍डेय- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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