इंटरनेशनल डेस्क : जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा हाल ही में संसदीय बहस के दौरान थाईवान मुद्दे पर की गई टिप्पणी, द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद 80 वर्षों में पहली बार है जब किसी जापानी नेता ने थाईवान मुद्दे पर सैन्य हस्तक्षेप की सार्वजनिक रूप से महत्वाकांक्षा व्यक्त की है। इसकी प्रकृति अत्यंत जघन्य है, तथा इसके परिणाम अत्यंत गंभीर हैं। हाल के दिनों में, चीन ने जापान के समक्ष इन भड़काऊ टिप्पणियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है और गंभीरता से यह मामला उठाया है, जो चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करती हैं, युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देती हैं, तथा चीन-जापान संबंधों की नींव को कमजोर करती हैं।
लोगों के लिए, जापान द्वारा वर्णित “अस्तित्व के संकट” ने दर्दनाक ऐतिहासिक यादें ताजा कर दी हैं। आधुनिक समय से ही जापानी सैन्यवाद ने विदेशों में आक्रामक विस्तारवादी अभियान शुरू करने के लिए बार-बार इसका इस्तेमाल किया है। जापान द्वारा चीन पर आक्रमण से चीनी जनता और विश्व के लोगों को भारी कष्ट उठाना पड़ा। 14 वर्षों के खूनी संघर्ष के बाद, चीनी लोगों ने जापानी आक्रमणकारियों को हराया और थाईवान पर संप्रभुता का प्रयोग फिर से शुरू किया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जापान के प्रधानमंत्री के रूप में साने ताकाइची न केवल अपने युद्ध अपराधों पर गहराई से विचार करने में विफल रहीं, बल्कि उन्होंने थाईवान जलडमरूमध्य की स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप करने का प्रयास करते हुए तथाकथित “अस्तित्वगत संकट की स्थिति” को फिर से सामने ला दिया। जापान में भी साने ताकाइची की थाईवान के सम्बंध में भड़काऊ टिप्पणी की जनता द्वारा व्यापक रूप से निंदा की गई है। पूर्व प्रधानमंत्रियों युकिओ हातोयामा, शिगेरु इशिबा और योशिहिको नोडा सहित जापानी राजनेताओं ने अपनी आलोचनाएं पेश की हैं। निशिनिपोन शिम्बुन का मानना है कि साने ताकाइची की टिप्पणी पिछले जापानी प्रधानमंत्रियों के लहजे से अलग है और इससे तनाव और बढ़ेगा।
जापान के ये ख़तरनाक कदम इस बात का संकेत हैं कि जापान अपनी सेना को मजबूत करने तथा सशस्त्र बलों का विस्तार करने के खतरनाक रास्ते पर और आगे बढ़ रहा है। जापान इतिहास और थाईवान मुद्दे को किस प्रकार देखता है, यह सत्ता में बैठे लोगों की अंतरात्मा की परीक्षा लेता है और यह चीन-जापान सम्बंधों की मूलभूत दिशा के लिए महत्वपूर्ण है। अस्सी साल पहले, चीनी लोगों ने जापानी आक्रमणकारियों को हराया था। आज, चीनी सरकार और लोग कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति से सहमत नहीं होंगे या बर्दाश्त नहीं करेंगे जो चीन के मूल हितों को चुनौती देने या किसी भी रूप में चीन के एकीकरण के प्रयास में हस्तक्षेप करने का साहस करता है!
हम जापानी अधिकारियों को गंभीरता से चेतावनी देते हैं कि उन्हें इतिहास और थाईवान जैसे प्रमुख सैद्धांतिक मुद्दों पर चीन और जापान के बीच चार राजनीतिक दस्तावेजों में स्पष्ट प्रावधानों का पालन करना चाहिए, थाईवान के सम्बंध में अपनी उत्तेजक टिप्पणियों को वापस लेना चाहिए और नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने के लिए उपाय करना चाहिए। जो कोई भी थाईवान मुद्दे पर जोखिम लेने की हिम्मत करेगा, उसे कड़े जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

