Last Updated: November 7, 2026

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भारतीय विशेषज्ञ की नज़र से चीन की नई आर्थिक नीति

January 7, 2026

भारतीय विशेषज्ञ की नज़र से चीन की नई आर्थिक नीति

इंटरनेशनल डेस्क: चीन की राजधानी बीजिंग में हुई सेंट्रल इकोनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस चीन के लिए काफी अहम रही। इस बैठक में सिर्फ साल 2026 की आर्थिक प्राथमिकताएं तय नहीं हुईं, बल्कि 2026 से 2030 तक चलने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना की बुनियाद भी रखी गई। सीधी भाषा में कहें, तो चीन अब यह तय कर रहा है कि अगले पाँच साल वह किस रास्ते पर चलेगा। इस बैठक का मूल संदेश साफ है। चीन चाहता है कि उसकी अर्थव्यवस्था स्थिर भी रहे और मजबूत भी बने। इसके लिए सरकार ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाया जाएगा और नीतियों को थोड़ा लचीला बनाया जाएगा, ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे और बाहरी दबावों का असर कम हो।

इस विषय पर जेएनयू की प्रोफेसर और नेशन-स्टेट डायलॉग की संस्थापक डॉ. गीता कोछड़ ने CGTN हिन्दी को दिए एक इंटरव्यू में चीन की नई आर्थिक सोच को आसान शब्दों में समझाया है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ नीति में छोटा-मोटा बदलाव नहीं है, बल्कि विकास को देखने का नजरिया ही बदल रहा है।

डॉ. कोछड़ कहती हैं कि इस पूरी कॉन्फ्रेंस के दो सबसे अहम शब्द हैं– गुणवत्ता और कार्यकुशलता। पहले चीन तेज़ विकास पर ज्यादा ध्यान देता था, अब वह बेहतर और टिकाऊ विकास पर जोर दे रहा है। यानी सवाल अब यह नहीं है कि विकास कितना तेज है, बल्कि यह है कि वह कितना मजबूत, टिकाऊ और असरदार है। इससे चीन भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना चाहता है और उस स्थिति से बचना चाहता है, जहाँ देश एक स्तर के बाद आगे नहीं बढ़ पाता, जिसे विशेषज्ञ “मिडिल-इनकम ट्रैप” कहते हैं।

चीन की सोच में एक बड़ा बदलाव यह भी है कि वह अब सिर्फ निर्यात पर निर्भर नहीं रहना चाहता। पहले उसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा विदेशों में सामान बेचने पर टिका था। अब चीन अपने घरेलू बाजार पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इसकी वजह साफ है। दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, व्यापार युद्ध हो रहे हैं, और ऐसे में मजबूत घरेलू मांग देश के लिए एक तरह की सुरक्षा बन सकती है।

डॉ. कोछड़ के अनुसार, चीन अब घरेलू मांग बढ़ाने पर गंभीरता से काम कर रहा है। जब देश के अंदर लोग ज्यादा खर्च करेंगे, तो अर्थव्यवस्था को एक स्थिर आधार मिलेगा और बाहरी झटकों का असर कम होगा। यह चीन के पुराने निर्यात-आधारित मॉडल से बड़ा बदलाव है। चीन की नई आर्थिक रणनीति सिर्फ एक-दो नीतियों पर नहीं टिकी है। यह कई जुड़े हुए हिस्सों से मिलकर बनी है। इसका सबसे बड़ा आधार है नवाचार आधारित विकास। मतलब यह कि नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन पर जोर दिया जा रहा है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों में। इसका एक मकसद यह भी है कि चीन पश्चिमी देशों की तकनीकी पाबंदियों से खुद को सुरक्षित रख सके और तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बने। इसके साथ-साथ चीन हरित अर्थव्यवस्था यानी ग्रीन ट्रांजिशन पर भी जोर दे रहा है। यह सिर्फ पर्यावरण बचाने की बात नहीं है। इसके जरिए चीन बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाना चाहता है और नई तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करना चाहता है। सरकार यह भी चाहती है कि इस बदलाव से रोजगार स्थिर रहें और लोगों को अच्छे, उच्च-मूल्य वाले काम मिलें।
चीन में हो रहा यह बड़ा आर्थिक बदलाव भारत के लिए भी मायने रखता है। पड़ोसी देश होने के नाते भारत हमेशा चीन के विकास मॉडल को ध्यान से देखता है। इसमें भारत के लिए मौके भी हैं और चेतावनियाँ भी।

डॉ. कोछड़ के मुताबिक, भारत चीन से कई सकारात्मक बातें सीख सकता है। जैसे बुनियादी ढांचे पर जोर, लंबी अवधि की योजना बनाना और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना। इन क्षेत्रों में चीन ने काफी काम किया है। लेकिन साथ ही भारत को चीन की गलतियों से भी सीख लेनी चाहिए। चीन के विकास के दौरान अमीर और गरीब इलाकों के बीच खाई बढ़ी और पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ। भारत को शुरुआत से ही संतुलित और टिकाऊ विकास का रास्ता चुनना होगा। 15वीं पंचवर्षीय योजना चीन के भविष्य का रोडमैप है। इसका मकसद है मध्यम आय वाले देशों की उस सीमा को पार करना, जहाँ विकास रुकने लगता है, और श्रम आधारित अर्थव्यवस्था से हाई-टेक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना। इस योजना में सेमीकंडक्टर, एआई और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। आखिर में बात सीधी है। चीन अब तेज़ विकास से ज्यादा समझदारी भरे, टिकाऊ और तकनीक आधारित विकास की ओर बढ़ रहा है। यह उसके लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक कदम भी है। दुनिया को यह संकेत साफ मिल रहा है कि चीन अपने भविष्य को लंबी सोच के साथ देख रहा है।

(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी (चाइना मीडिया ग्रुप), बीजिंग)

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