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चीन के तेज और अत्याधुनिक भविष्य पर जोर

इंटरनेशनल डेस्क: पेइचिंग में चार दिनों तक चली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति के चौथे पूर्ण अधिवेशन ने अपनी पांच हजार शब्दों की जो विज्ञप्ति जारी की है, एक तरह से वह चीन के अगले पांच वर्षों की कार्ययोजनाओं और लक्ष्यों का खाका है। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की यह बैठक एक तरह से चीन के सर्वोच्च शासी निकाय की बैठक कही जा सकती है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली आगामी भेंट से कुछ ही पहले हुई इस बैठक का विशेष महत्व है। इस पर ना सिर्फ चीन, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान था।

वैसे तो केंद्रीय समिति की बैठक में किसी बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत नहीं मिलता, लेकिन वैश्विक स्तर पर खासकर अमेरिका से बढ़ते कारोबारी तनावों के बीच इस दस्तावेज के जरिए पता चलता है कि चीन अपने घरेलू स्तर पर मजबूत आर्थिक विकास की दर को बनाए रखने की ना सिर्फ इच्छा रखता है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर प्रमुख विनिर्माण शक्ति बना रहना चाहता है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चीन इन दिनों “गंभीर” बदलाव और बढ़ती अनिश्चितता का सामना कर रहा है।

इस दस्तावेज में चीन का जोर वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता और उसमें सुधार जारी रखने पर है। इसका संकेत यह है कि चीन मौजूदा व्यापार युद्ध के दबाव को लेकर बहुत चिंतित नहीं है। इस दस्तावेज का संकेत है कि चीन ने साल 2035 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर बेहद प्रभावी भूमिका के साथ ही आर्थिक और राष्ट्रीय शक्ति बनने का संकल्प तो लिया ही है, “बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा” का संकल्प भी किया है।

केंद्रीय समिति की बैठक ने चीन में घरेलू माँग के साथ ही उपभोक्ता खर्च को बढ़ाकर सक्षम घरेलू बाज़ार बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। घरेलू मांग को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत चीन सरकार पहले से ही आधुनिक कारखानों और उपकरणों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। इतना ही नहीं, देश के उद्योगपतियों और कारोबारियों को अपने पुराने उपकरणों और वाहनों को बदलकर नया लेने वालों को सब्सिडी भी दे रही है।

चीन की सरकार के सहयोग के चलते देश की अर्थव्यवस्था में पिछले साल की तुलना में इस साल 4.8 फीसद की बढ़ोत्तरी दिखी है, हालांकि यह पिछली तिमाही के लिहाज से कम कही जा रही है। इसके बावजूद चीन के नेताओं ने अर्थव्यवस्था के आकार को 2035 तक की अर्थव्यवस्था की तुलना में दोगुना करने के लक्ष्य से डिगे नहीं है। इसलिए इस दस्तावेज और बैठक का बहुत महत्व माना जा रहा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इसका मतलब यह है कि अगले एक दशक में औसत सालाना आर्थिक वृद्धि दर लगभग चार से पांच प्रतिशत रहेगी।

चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 30 फीसद अकेले उत्पादन करता है। उत्पादन से जुड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई हिस्सा है। शायद यही वजह है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की इस सर्वोच्च बैठक में अगली पंचवर्षीय योजना में निर्माण को “उचित स्तर”पर रखने का बात की गई है। जिसका आधार उन्नत उद्योग होंगे।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इससे पता चलता है कि निर्माण क्षेत्र पर चीन का ध्यान सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहेगा। कुछ वर्षों में, चीनी निर्माण क्षेत्र श्रम-प्रधान और कम लागत वाले उत्पादन से इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स और बैटरी जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों की ओर बढ़ गया है। वैश्विक आर्थिक संस्थान मॉर्गन स्टेनली में चीन की आर्थिक मामलों को देखने वाले मुख्य अर्थशास्त्री रॉबिन जिंग का कहना है कि इस दस्तावेज से स्पष्ट है कि चीन आने वाले वर्षों में, उन्नत विनिर्माण पर ज़ोर देने जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन का अब जोर क्वांटम तकनीक, जैव-विनिर्माण, हाइड्रोजन और परमाणु संलयन ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अगली पीढ़ी के मोबाइल संचार आदि पर रहेगा। इसका मतलब है कि अगले 10 वर्षों में चीन उच्च-तकनीकी उद्योग के निर्माण पर जोर देगा और आधुनिकीकरण को नए सिरे से गति देने की तैयारी है।

यहां कुछ आंकड़ों पर ध्यान देने की जरूरत है। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, 2023 में वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में चीन की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत तक रही। इतना ही नहीं, चीन की बीवाईडी और सीएटीएल जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों ने बैटरी तकनीक और उससे जुड़े उत्पादन में वैश्विक श्रेष्ठता हासिल कर लिया है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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